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Showing posts from September, 2025

छठ व्रती : तप, त्याग और आस्था का अद्भुत प्रतीक

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🌞 छठ व्रती : तप, त्याग और आस्था का अद्भुत प्रतीक छठ महापर्व भारतीय संस्कृति का वह पर्व है, जिसमें प्रकृति, पर्यावरण, सूर्य और छठी मैया की उपासना के साथ-साथ आत्मसंयम, पवित्रता और तपस्या का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस पर्व का मूल आधार हैं — छठ व्रती, जो अपनी तपस्या और आस्था से इस अनुष्ठान को जीवंत बनाते हैं। ✨ छठ व्रती का स्वरूप छठ व्रती सामान्य भक्त नहीं होते, बल्कि वे तपस्वी और साधक होते हैं। उनका जीवन इस पर्व के दिनों में त्याग, संयम और शुद्धि का आदर्श प्रस्तुत करता है। छठ व्रती का स्वरूप तीन मुख्य विशेषताओं में प्रकट होता है — ना मान (अहंकार से रहित) – छठ व्रती व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का अभिमान नहीं रखते। वे अपने को ईश्वर की शरणागत मानते हैं और पूरी विनम्रता से पूजा करते हैं। ना मोह (मोह-माया से मुक्त) – व्रती मोह-माया और सांसारिक आकर्षण से स्वयं को अलग करके केवल भक्ति और तपस्या में लीन हो जाते हैं। ना मनमथ (वासना से रहित) – छठ व्रत में व्रती इन्द्रियों पर नियंत्रण रखते हैं और पूर्ण शुद्धता का पालन करते हैं। इस पर्व के दौरान कामना, वासना या भोग की ...

संदीप कुमार दुबे : छठ–संस्कृति के अमर वाहक

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  🌞 संदीप कुमार दुबे : छठ–संस्कृति के अमर वाहक --- संस्कृत गोपालगञ्ज–जनपदे धूपसागर–खरगौलीग्रामे, श्रीचन्द्रगोकुलदुबॆ–नीलमदेव्याः कुलाङ्गने, २६ मार्च १९७९ तिथौ प्रातःकाले ज्येष्ठः सुपुत्रः जातः। तस्य जन्मः केवलं कौटुम्बिकः नासीत्, अपि तु दैवीकः प्रसादः। यतः तस्य पितामही थावे–भवानीदेव्याः सन्निधौ प्रार्थना कृतवती— “मम वंशे ज्येष्ठपुत्रः भवतु।” देव्याः अनुग्रहात् एव सः पुत्रः अवतरितः। सः आसीत् इन्द्रदेवदुबॆस्य पौत्रः, उदयनारायणतिवारीस्य दुहितुः पुत्रः च। बाल्यकालादेव तस्य हृदये “षष्ठी–मातुः” अचला भक्ति जाग्रता। सः आवदत् मातरम्— “अहमपि स्नानं करिष्यामि, अर्घ्यं दास्यामि।” विधिशास्त्रं अधीत्य सः सर्वोच्चन्यायालयस्य अधिवक्ता अभवत्। किन्तु तस्य ध्येयम् केवलं न्यायालये न आसीत्— अपि तु धर्म–संस्कृत्योः पुनरुत्थानम्। तस्मिन् कृतं “छठ–महापुराणम्”, येन षष्ठी–मातुः महिमा युगयुगान्तरं जीवति। अनुजः बिपिनः, भगिन्यौ अञ्जुला–विभा च, जीवनसंगिनि राखी दुबे, सुपुत्रः श्रेयांश दुबे च— एतेषां प्रेम–सहयोगेन तस्य जीवनयात्रा स्फूर्तिमयी अभवत्। --- हिन्दी गोपालगंज जिले के धूपसागर–खरगौ...

युवा आंदोलन नहीं, युवा राष्ट्र निर्माण – यही असली क्रांति है

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✍️ विशेष लेख युवा आंदोलन नहीं, युवा राष्ट्र निर्माण – यही असली क्रांति है लेखक : संदीप कुमार दुबे ✨ "आंदोलन सत्ता को हिला सकता है, पर राष्ट्र निर्माण ही इतिहास बदलता है। युवा यदि अपनी ऊर्जा को जिम्मेदारी में ढालें, तो वही असली क्रांति होगी।" ✨ नेपाल आज एक गहरे संकट और संभावनाओं के बीच खड़ा है। यहाँ जनता की आवाज़ को दबाया जा रहा है, काबिल और पढ़े-लिखे लोग हाशिये पर हैं, भ्रष्टाचार करने वालों को सम्मान मिल रहा है और परिवारवाद न्यायपालिका और राजनीति पर हावी है। जनता मौन है, लेकिन यह मौन भीतर से आक्रोश से भरा हुआ है। और इस मौन को तोड़ने के लिए तैयार है नेपाल का युवा। ✦ आंदोलन की सच्चाई आंदोलन किसी भी व्यवस्था को हिलाने की ताक़त रखता है। नेपाल के युवाओं ने सड़कों पर उतरकर यह साफ़ कर दिया है कि वे थोपे गए नेतृत्व और भ्रष्ट व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन यह भी सच है कि आंदोलन यदि केवल गुस्से का विस्फोट रह जाए, तो यह देश को नुकसान पहुँचा सकता है। ✦ राष्ट्र निर्माण की राह युवाओं के सामने आज सबसे बड़ी जिम्मेदारी है – अपने आक्रोश को राष्ट्र निर्माण की शक्ति में बदलना...

अगर प्रेम सच्चा हो, तो उसमें स्वार्थ नहीं, केवल त्याग और सेवा का भाव होना चाहिए - मनोज तिवारी

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  “अगर प्रेम सच्चा हो, तो उसमें स्वार्थ नहीं, केवल त्याग और सेवा का भाव होना चाहिए।” -   मनोज तिवारी                                                                    सतीश उपाध्याय जी ने मुस्कुराते हुए मंच से आग्रह किया— “मनोज जी, आप भी रामकथा सुनाइए।” ✍️ संदीप कुमार दुबे एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया चेयरमैन, छठी मइया फ़ाउंडेशन दिल्ली की रामलीला की रौनक रात गहराने के साथ दिल्ली की रामलीला और भी निखर उठी। मंच पर रामकथा के भाव और संगीत बह रहे थे, पर असली आकर्षण उस भीड़ में था जहाँ मनोज तिवारी जी लोगों से सीधे मिल रहे थे। उनके साथ हर क्षण एक अलग ऊर्जा का अनुभव हो रहा था। जब श्रीराम धार्मिक रामलीला समिति के चेयरमैन सतीश उपाध्याय जी ने मुस्कुराते हुए मंच से आग्रह किया— “मनोज जी, आप भी रामकथा सुनाइए।” इतना कहते ही पूरा पंडाल तालियों की गू...

“If love is true, it carries no selfishness—only the spirit of sacrifice and service.” – Manoj Tiwari

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 “If love is true, it carries no selfishness—only the spirit of sacrifice and service.” – Manoj Tiwari Satish Upadhyay’s Smiling Invitation With a warm smile from the stage, Shri Satish Upadhyay ji invited— “Manoj ji, please share the Ramkatha as well.” ✍️ Sandeep Kumar Dubey Advocate, Supreme Court of India Chairman, Chhathi Maiya Foundation The Sparkle of Delhi’s Ramlila As night deepened, Delhi’s grand Ramlila shone with even greater splendour. The stage overflowed with the emotion and music of the Ramkatha, but the true attraction lay in the crowd where Manoj Tiwari ji mingled freely with the people. Every moment in his presence carried a unique energy. When Shri Ram Dharmik Ramlila Samiti Chairman Satish Upadhyay ji smilingly invited— “Manoj ji, please narrate the Ramkatha,” the entire pavilion resounded with a wave of applause. Manoj Tiwari’s Spontaneous Parashuram Dialogue Without any formal preparation, Manoj Tiwari ji gracefu...

✍️ देव–दानव युद्ध का समय आ गया है

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✍️ देव–दानव युद्ध का समय आ गया है संदीप कुमार दुबे एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया चेयरमैन – छठी मइया फ़ाउंडेशन प्रस्तावना मानव सभ्यता का इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि जब-जब अधर्म अपनी सीमा लांघता है, तब-तब धर्म की रक्षा हेतु ईश्वरीय शक्ति अवतरित होती है। प्राचीन काल में यह संघर्ष देव और दानवों के बीच हुआ। देवता सत्य, न्याय और मर्यादा का प्रतीक रहे, जबकि दानव अन्याय, पाखंड और अहंकार के प्रतीक। यह संघर्ष केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि मानव जीवन की अनवरत यात्रा है। आज का समय भी उसी बिंदु पर खड़ा है जहाँ हम कह सकते हैं—“देव–दानव युद्ध का समय आ गया है।” आधुनिक संदर्भ में देव–दानव युद्ध आज का युग भले ही विज्ञान और तकनीक का युग हो, परंतु सत्य यही है कि अधर्म, पाखंड, हिंसा और भ्रष्टाचार की शक्तियाँ दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। समाज में असत्य का बोलबाला है। परिवारों में विश्वास का संकट है। राजनीति में नैतिकता का पतन है। धर्म और आस्था को भी स्वार्थ का साधन बनाया जा रहा है। यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसे दानवों का प्रभुत्व बढ़ने पर देवताओं का अस्तित्व संकट में पड़ा था। आज भी यह संघर्...

“रामलीला केवल परंपरा नहीं, समाज निर्माण का साधन है – सतीश उपाध्याय”

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“रामलीला केवल परंपरा नहीं, समाज निर्माण का साधन है – सतीश उपाध्याय” लेखक – संदीप कुमार दुबे एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया चेयरमैन, छठी मैया फाउंडेशन ✨ सतीश उपाध्याय जी का सांस्कृतिक नेतृत्व भारतीय संस्कृति की धरोहर को जीवित रखना और उसे नई पीढ़ियों तक पहुँचाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस दिशा में श्री सतीश उपाध्याय जी (विधायक एवं संरक्षक श्रीराम धार्मिक रामलीला समिति) का योगदान उल्लेखनीय है। वे राजनीति के साथ-साथ संस्कृति और समाज को जोड़ने वाले एक सशक्त व्यक्तित्व हैं। सतीश उपाध्याय जी मानते हैं: “रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह समाज को धर्म, संस्कृति और आदर्श जीवन की शिक्षा देने का माध्यम है। हमारा प्रयास है कि रामलीला के मंचन से नई पीढ़ी में संस्कार और सामाजिक एकता की भावना विकसित हो।” उनका यह कथन दर्शाता है कि वे रामलीला को केवल कथा या मंचन तक सीमित नहीं, बल्कि समाज निर्माण की प्रक्रिया मानते हैं। 🌸 समाज को जोड़ने वाली धारा उनके नेतृत्व में श्रीराम धार्मिक रामलीला समिति ने रामलीला के मंचन को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। मंचन की भव्यता के साथ उ...

यूनेस्को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया तेज़, छठी मइया फ़ाउंडेशन ने लॉन्च किया #ChhathConnect” अभियान

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यूनेस्को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया तेज़, छठी मइया फ़ाउंडेशन ने लॉन्च किया “Chhath Connect” अभियान नई दिल्ली, 22 सितम्बर 2025। छठ महापर्व को यूनेस्को (UNESCO) की “मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची” में शामिल कराने की दिशा में भारत सरकार ने प्रक्रिया को गति दी है। संस्कृति मंत्रालय के आईसीएच (Intangible Cultural Heritage) कक्ष ने इस संबंध में छठी मइया फ़ाउंडेशन को प्रवासी भारतीय समुदाय से सहमति-पत्र (Consent Letters) जुटाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है। ये सहमति-पत्र यूनेस्को नामांकन डॉज़ियर का अनिवार्य हिस्सा होंगे। इसी क्रम में, छठी मइया फ़ाउंडेशन ने सोमवार को अपनी नई पहल “Chhath Connect” अभियान शुरू करने की औपचारिक घोषणा की। इस डिजिटल अभियान के अंतर्गत— छठ महापर्व की लाइव कवरेज, डॉक्यूमेंट्री निर्माण, भक्ति गीत व लोक संस्कृति का प्रचार-प्रसार, और सोशल मीडिया पर #ChhathConnect पहल चलाई जाएगी। फ़ाउंडेशन के चेयरमैन संदीप कुमार दुबे (एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया) ने कहा— “छठ महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता और ...

छठ-व्रत का विश्वव्यापी महात्म्य एवं भविष्यवाणी खण्ड

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  🔱 छठ महा पुराण षष्ठ अध्याय – प्रथम श्लोक से आरम्भ (छठ-व्रत का विश्वव्यापी महात्म्य एवं भविष्यवाणी खण्ड) श्लोक १ मुनय ऊचुः — किमेतद् व्रतमाख्यातं यत् सर्वेषां हितप्रदम् । भविष्ये केन रूपेण लोकानां कल्यणाय वै ॥ व्याख्या: मुनियों ने कहा — “हे भगवन्! यह व्रत जो सर्वप्राणियों का हित करने वाला बताया गया है, भविष्यकाल में यह किस रूप में प्रकट होकर लोकों का कल्याण करेगा?” श्लोक २ सूतः उवाच — शृणुत मुनयः सर्वे दिव्यं व्रतमिदं शनैः । युगान्तेऽपि भवेद् धर्म्यं विश्वस्यैव सुखावहम् ॥ व्याख्या: सूत्रधार बोले — “हे मुनियो! यह दिव्य व्रत धीरे-धीरे युगों के अंत तक भी धर्मरूप होकर सम्पूर्ण संसार के लिए सुखप्रद बना रहेगा, यह सुनिये।” श्लोक ३ कलियुगे विशेषेण प्रवृत्तं चैव सर्वतः । भारतस्यातिरेकेण विदेशेषु प्रकीर्तितम्॥ व्याख्या: कलियुग में यह व्रत विशेष रूप से सर्वत्र फैल जाएगा और केवल भारत ही नहीं, विदेशों में भी इसका महात्म्य आदरपूर्वक प्रचारित होगा। श्लोक ४ ये च युगपते श्रद्धया छठ्यै पूजां समाचरन् । तेषां प्रजा सुखिता च धनो यशः च सुलभः॥ व्याख्या: ज...

अमित शाह का बार-बार बिहार दौरा : राजनीति के नए समीकरण की तैयारी।

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अमित शाह का बार-बार बिहार दौरा : राजनीति के नए समीकरण की तैयारी पटना, सितम्बर 2025। बिहार की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में है। भाजपा के शीर्ष नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का लगातार बिहार आना केवल दौरा नहीं, बल्कि रणनीतिक तैयारी है। शाह का हर दौरा संगठन को ऊर्जा देता है, विपक्ष को चुनौती देता है और राजनीतिक समीकरणों को बदलने का संकेत देता है। संगठन को मजबूती, कार्यकर्ताओं को ऊर्जा अमित शाह ने हर दौरे में बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती पर जोर दिया। “चुनाव केवल बड़े भाषणों से नहीं, बूथ जीतने से जीते जाते हैं।” — अमित शाह युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों तक पहुँच बढ़ाने पर उनका फोकस साफ़ झलकता है। विपक्ष पर तीखे हमले पटना में हालिया जनसभा में अमित शाह ने विपक्ष पर सीधा वार किया। “राहुल गांधी और लालू परिवार ने बिहार का विकास रोका। उनकी राजनीति केवल घुसपैठियों को बचाने की है।” — अमित शाह यह बयान न सिर्फ़ विपक्ष पर प्रहार था, बल्कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी आक्रामक राजनीति का संकेत था। तिथियाँ और अहम कार्यक्रम 18 सितम्बर 2025 (पटना) : कार्यकर्ताओं की बैठकें और ज...

भविष्य वाणी – 2025–2032 कौन बचेगा?

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🌞 छठ व्रत : सत्य का संदेश  🌞✍️ लेखक Sandeep Kumar Dubey Advocate, Supreme Court of India Chairman, Chhathi Maiya Foundation   🚩 आने वाला समय एक बड़ी परीक्षा का होगा। 🚩 2025 से 2032 तक का काल सत्य और असत्य का संघर्ष लेकर आएगा। 🚩 इस बीच प्रकृति प्रकोप करेगी – जल घटेगा, धरती तपेगी और समाज पाखंड से घिर जाएगा। ✨ कौन बचेगा? ✅ वही लोग सुरक्षित रहेंगे जो सत्य धारण करेंगे। ✅ जो संयम, सेवा और शुचिता का पालन करेंगे। ✅ जो छठ व्रत की मर्यादा निभाकर सूर्य और प्रकृति को प्रणाम करेंगे। ✅ जो जल, वायु, धरती और अग्नि का मान रखेंगे। ✍️ भविष्य वाणी –  🌑 संकट का काल पच्चीस से बत्तीस बरस, समय बड़ा गंभीर। सत्य-असत्य की होड़ में, होगा जग अंधीर।। धरती तपे, जल घटे, आकाश विपत्ति बरसाए। पाखंड और लोभ में फंसा, मनुष्य स्वयं मिट जाए।। 🌞 उद्धार का मार्ग सत्य धारण जो करेगा, वही संकट से बचे। संयम, सेवा, शुचिता धरे, उसके द्वार सुख सजे।। छठ व्रत का पालन करे, सूर्य को शीश झुकाए। प्रकृति का मान रखे, वही हर बाधा मिटाए।। 🌊 प्रकृति का आदेश जल की रक्षा जो करेगा, वही जीवन पाए। धरती, वायु, अग्नि ...

छठ पर्व: अब वैश्विक धरोहर बनने की ओर

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छठ पर्व: अब वैश्विक धरोहर बनने की ओर भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएँ इतनी समृद्ध हैं कि वे समय-समय पर पूरी दुनिया को आकर्षित करती रही हैं। योग, आयुर्वेद, भारतीय संगीत और शास्त्रीय नृत्य इसकी प्रमुख मिसालें हैं। इन्हीं में से एक सबसे पवित्र और लोकआस्था से जुड़ा पर्व है छठ, जिसे अब UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल करने की दिशा में पहल शुरू हो चुकी है। छठ पर्व का वैशिष्ट्य छठ कोई साधारण धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह एक ऐसा लोकपर्व है जिसमें – सूर्योपासना होती है, जो जीवन और ऊर्जा के मूल स्रोत हैं। प्रकृति संरक्षण का संदेश मिलता है, क्योंकि यह पर्व नदियों, तालाबों और प्राकृतिक जलाशयों के किनारे होता है। स्वच्छता और अनुशासन का महत्व है; छठ में पवित्रता और साफ-सफाई सर्वोपरि होती है। समानता और सामूहिकता का भाव है; गरीब-अमीर, ऊँच-नीच, महिला-पुरुष सब एक साथ खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। नारी शक्ति और तपस्या का परिचय है; व्रती प्रायः महिलाएँ होती हैं, जो परिवार और समाज की सुख-समृद्धि के लिए कठिन तप करती हैं। UNESCO ...

मोदी के सतीश : बच्चों की मुस्कान के साथ जन्मदिन का उत्सव

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मोदी के सतीश : बच्चों की मुस्कान के साथ जन्मदिन का उत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर जब झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले कुछ गरीब बच्चों ने मालवीय नगर के विधायक श्री सतीश उपाध्याय जी से कहा – “हम भी पिज़्ज़ा खाना चाहते हैं”, तो सतीश जी ने बच्चों की मासूम ज़िद को तुरंत स्वीकार कर लिया। वे न केवल बच्चों को अपने साथ पिज़्ज़ा खिलाने ले गए बल्कि उनके चेहरे की मुस्कान देखकर स्वयं भी भावुक हो उठे। यह दृश्य बताता है कि राजनीति केवल भाषणों और कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज की सबसे छोटी उम्मीदों को पूरा करने में उसका असली अर्थ छिपा है। सतीश उपाध्याय जी का यह मानवीय व्यवहार साफ करता है कि वे सचमुच “मोदी के सतीश” हैं—जिनके लिए सेवा ही राजनीति का सबसे बड़ा उद्देश्य है। जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी जी गरीब और वंचित वर्ग की खुशियों को अपना संकल्प मानते हैं, उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए सतीश जी ने बच्चों की छोटी-सी खुशी को अपने जीवन का बड़ा उत्सव बना दिया। बच्चों के साथ यह सादा किन्तु सच्चा उत्सव बताता है कि प्रधानमंत्री मोदी जी का जन्मदिन सिर्फ औपचारिकताओं का दिन नहीं, ब...

संविधान, समाज और संसद : मनन कुमार मिश्रा की भूमिका

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संविधान, समाज और संसद : मनन कुमार मिश्रा की भूमिका भारत का लोकतंत्र अपनी जड़ों में कानून और संविधान से पोषित होता है। लोकतंत्र की नींव केवल जनमत पर आधारित नहीं है, बल्कि यह न्याय, समानता और अधिकारों की सुरक्षा पर भी टिकी है। यही कारण है कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज़ादी के बाद तक, अधिवक्ताओं ने राजनीति और समाज में निर्णायक भूमिका निभाई। बिहार की राजनीति में भी अधिवक्ताओं का योगदान ऐतिहासिक और गहन रहा है। इसी परंपरा के आधुनिक प्रतीक हैं मनन कुमार मिश्रा – अधिवक्ता, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के  चेयरमैन और वर्तमान में बिहार से राज्यसभा सांसद। अधिवक्ताओं की परंपरा और बिहार बिहार, जिसे भारत का राजनीतिक और बौद्धिक केंद्र कहा जाता है, हमेशा से अधिवक्ताओं की भूमि रही है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, देश के पहले राष्ट्रपति, एक प्रख्यात अधिवक्ता थे जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में न केवल नेतृत्व किया, बल्कि संविधान सभा की कार्यवाही में भी अहम भूमिका निभाई। सच्चिदानंद सिन्हा, जो संविधान सभा के पहले अंतरिम अध्यक्ष बने, वे भी अधिवक्ता रहे। अनुग्रह नारायण सिंह, जिन्हें बिहार का आधुनिक...

नरेंद्र मोदी : साधारण से असाधारण तक की प्रेरणादायी यात्रा

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“नरेंद्र मोदी : साधारण से असाधारण तक की प्रेरणादायी यात्रा” आज हम भारत के यशस्वी, जनप्रिय एवं दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी का जन्मदिन मना रहे हैं। 17 सितंबर का दिन केवल एक व्यक्ति का जन्मदिन नहीं है, बल्कि यह भारत की उस जनभावना का उत्सव है, जिसमें एक साधारण परिवार से निकलकर देश का सर्वोच्च नेतृत्व संभालने की अद्भुत गाथा छिपी हुई है। संघर्ष से शिखर तक की यात्रा नरेंद्र मोदी जी का जीवन संघर्ष, समर्पण और सेवा की मिसाल है। बचपन में चाय की दुकान पर सहयोग करने वाले मोदी जी ने संघ और संगठन के कार्यों से राजनीति में प्रवेश किया। छोटे से कस्बे के साधारण बालक ने परिश्रम और त्याग के बल पर विश्व राजनीति के मंच तक अपनी पहचान बनाई। भारत को नई दिशा देने वाला नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं— डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया ने तकनीकी व औद्योगिक विकास को नया आयाम दिया। जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने करोड़ों गरीबों के जीवन में आशा और विश्वास जगाया। आत्मनिर्भर भारत के अभियान ने देश को स...

अनुभव बनाम जोश : क्यों बिहार को चाहिए नीतीश कुमार का संतुलित नेतृत्व

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अनुभव बनाम जोश : क्यों बिहार को चाहिए नीतीश कुमार का संतुलित नेतृत्व अनुभव और ऊर्जा का संगम ही है विकास का सूत्र बिहार की राजनीति में हमेशा यह सवाल उठता रहा है कि राज्य को युवा नेतृत्व की नई ऊर्जा की ज़रूरत है या फिर परिपक्व अनुभव की। यह बहस जितनी पुरानी है, उतनी ही प्रासंगिक भी है। लेकिन जब हम व्यावहारिक दृष्टि से देखते हैं, तो स्पष्ट होता है कि बिहार जैसे जटिल और विविधताओं से भरे राज्य को ऐसा नेतृत्व चाहिए, जिसमें अनुभव की गहराई और युवाओं की ऊर्जा, दोनों का संतुलन हो। इस संदर्भ में नीतीश कुमार का नेतृत्व सबसे उपयुक्त और सशक्त प्रतीत होता है। अनुभव की शक्ति नीतीश कुमार ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में बिहार की राजनीति और समाज की नब्ज़ को गहराई से समझा है। उनका अनुभव बताता है कि किस परिस्थिति में धैर्य रखना है और कब निर्णायक कदम उठाना है। सड़क, बिजली, शिक्षा और कानून-व्यवस्था में जो परिवर्तन बिहार ने देखा, वह उनके अनुभव और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। जोश को दिशा देने वाला मार्गदर्शन युवा नेतृत्व उत्साह और नवाचार लाता है, लेकिन अगर उसका मार्गदर्शन न हो तो यह ऊर्जा बिखर सकती है।...

हिंदी : हमारी आत्मा, हमारी पहचान

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हिंदी : हमारी आत्मा, हमारी पहचान। लेखक : संदीप कुमार दुबे (एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया एवं चेयरमैन, छठी मइया फाउंडेशन) हर वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस पूरे देश में बड़े उत्साह और गौरव के साथ मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी केवल संचार का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान की आत्मा है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है। हिंदी की महत्ता हिंदी विश्व की उन गिनी-चुनी भाषाओं में से एक है, जिसे करोड़ों लोग अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद, गुयाना, सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और इंग्लैंड तक में हिंदी बोलने वाले लोग बसे हुए हैं। आज इंटरनेट और सोशल मीडिया के युग में हिंदी ने वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना ली है। चुनौतियाँ और दायित्व आज भी यह चिंता का विषय है कि अपने ही देश में अंग्रेज़ी को प्रतिष्ठा और अवसर की भाषा माना जाता है, जबकि हिंदी और अन्य भारतीय भ...

नरेंद्र मोदी : एक स्वप्नदृष्टा राष्ट्र निर्माता

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  नरेंद्र मोदी : एक स्वप्नदृष्टा राष्ट्र निर्माता नरेंद्र मोदी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक ऐसे स्वप्नदृष्टा (Day Dreamer) हैं जो वर्तमान की सीमाओं से परे जाकर भविष्य की कल्पना करते हैं। उनका सपना है एक ऐसा भारत, जहाँ धर्म और जाति की दीवारें ढह जाएं, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर मिले, और जहाँ विकास का सूरज हर गांव और हर चेहरे पर रोशनी बिखेरे। मोदी का यह सपना मात्र राजनीति का भाषण नहीं, बल्कि उनके जीवन संघर्ष से उपजा एक गहन अनुभव है। बचपन में चाय बेचने वाला बालक जब देश का प्रधानमंत्री बना, तब उसने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत में कोई भी व्यक्ति अपनी मेहनत और समर्पण से शिखर तक पहुँच सकता है। यही उनकी नए समाज की कल्पना है – एक ऐसा समाज, जहाँ पहचान जाति या मजहब से नहीं बल्कि योग्यता, परिश्रम और कर्म से होती है। मोदी युवाओं पर सबसे अधिक भरोसा करते हैं। उनका विश्वास है कि भारत की असली ताकत उसकी युवा पीढ़ी है। वे बार-बार यह कहते हैं कि "युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की धड़कन है।" उनके सपनों का भारत वही है जिसमें युवा न केवल नौकरी खोजने वाले हों, बल्कि अवसरों क...

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मन-पढ़ने की कोशिश: विज्ञान, संभावनाएँ और नैतिक चुनौतियाँ✍

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मन-पढ़ने की कोशिश: विज्ञान, संभावनाएँ और नैतिक चुनौतियाँ ✍ लेखक: Sandeep Kumar Dubey, Advocate Supreme Court of India, Chairman – Chhathi Maiya Foundation प्रस्तावना मानव मस्तिष्क सदियों से रहस्य का केंद्र रहा है। हमारी सोच, भावनाएँ और कल्पनाएँ — सब इसमें छिपी रहती हैं। लेकिन अब सवाल उठता है: क्या तकनीक, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), हमारे मन को पढ़ सकती है? हाल के वैज्ञानिक शोध इस दिशा में आश्चर्यजनक प्रगति दिखा रहे हैं। 1. भावनाओं को पढ़ने की क्षमता AI अब चेहरे के हावभाव, आँखों की गति और आवाज़ के उतार-चढ़ाव से भावनाओं की पहचान कर सकती है। अमेरिका और जापान की प्रयोगशालाओं में बने मॉडल 85% तक सटीकता से बता सकते हैं कि कोई व्यक्ति खुश है, गुस्से में है या उदास। 2. दिमाग़ी तरंगों का डिकोडिंग (Brain Signal Decoding) Stanford University (2025) ने साबित किया कि पक्षाघात से पीड़ित मरीज जब दिमाग में “silent speech” सोचते हैं, तो उनके न्यूरल सिग्नलों से शब्दों का अनुमान लगाया जा सकता है। Berkeley और UCSF की टीम ने brain-to-voice neuroprosthesis तैयार किया...

रेखा गुप्ता : परिवार की तरह दिल्ली को सँवारती मुखिया 🌸

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🌸 रेखा गुप्ता : परिवार की तरह दिल्ली को सँवारती मुखिया 🌸                   संदीप कुमार दुबे (एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, चेयरमैन – छठी मइया फ़ाउंडेशन) दिल्ली सिर्फ इमारतों, सड़कों और बाजारों का शहर नहीं है। यह सपनों, रिश्तों और उम्मीदों का भी घर है। हर नागरिक इस घर का एक सदस्य है। और जब घर को सँवारने वाली मुखिया संवेदनशील हो, दूरदृष्टि रखती हो और सबको साथ लेकर चलने का जज़्बा रखती हो, तभी घर सचमुच खुशहाल बनता है। आज लोग कह रहे हैं कि रेखा गुप्ता अरविंद से बेहतर मुख्यमंत्री हैं। क्यों? क्योंकि वह राजनीति को सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारी मानती हैं। 👉 वह दिल्ली को परिवार समझती हैं। 👉 बच्चों की शिक्षा को वह अपने बच्चों का भविष्य मानती हैं। 👉 बुज़ुर्गों की सेवा को अपने माता-पिता की सेवा मानती हैं। 👉 और महिलाओं की सुरक्षा को अपने घर की बेटियों की सुरक्षा मानती हैं। रेखा गुप्ता ने यह साबित कर दिया है कि नेतृत्व सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि अपनापन और सेवा-भाव से चलता है। उनकी मुस्कान, उनका सहज स...

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) : न्याय और मध्यस्थता का नया भविष्य

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) : न्याय और मध्यस्थता का नया भविष्य लेखक : संदीप कुमार दुबे Advocate, Supreme Court of India Chairman, Chhathi Maiya Foundation प्रस्तावना मानव समाज में न्याय व्यवस्था और विवाद समाधान हमेशा से सबसे बड़ी आवश्यकता रहे हैं। लेकिन आज अदालतों में लाखों मामले लंबित हैं, न्याय में देरी लोगों का विश्वास कम करती है और वकील व जज कार्यभार से दबे रहते हैं। ऐसे समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) न्याय और मध्यस्थता (Mediation) को तेज़, सुलभ और पारदर्शी बनाने वाला एक क्रांतिकारी साधन बनकर सामने आया है। कानून और न्याय में AI की भूमिका ई-कोर्ट्स और केस मैनेजमेंट – AI आधारित टूल्स मुकदमों का वर्गीकरण और प्राथमिकता तय कर सकते हैं। कानूनी शोध (Legal Research) – लाखों फैसलों और विधानों का विश्लेषण AI मिनटों में कर देता है। मध्यस्थता (Mediation) – AI प्लेटफॉर्म पक्षकारों को समझौते के विकल्प सुझा सकते हैं और विवाद को जल्द सुलझाने में मदद कर सकते हैं। कॉन्ट्रैक्ट विश्लेषण – बड़े-बड़े कानूनी दस्तावेज़ों की समीक्षा कर जोखिमों को उजागर करना। निष्पक्षता ...

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य : इंसान, आत्मा और आने वाला कल

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य : इंसान, आत्मा और आने वाला कल लेखक : संदीप कुमार दुबे Advocate, Supreme Court of India Chairman, Chhathi Maiya Foundation प्रस्तावना आज की दुनिया तेज़ी से बदल रही है। मोबाइल से लेकर गाड़ियों तक, अस्पताल से लेकर अदालत तक – हर जगह अब AI (Artificial Intelligence / कृत्रिम बुद्धिमत्ता) पहुँच चुकी है। लेकिन यह सिर्फ़ शुरुआत है। आगे आने वाले समय में दो बड़े पड़ाव और होंगे – AGI (Artificial General Intelligence) – इंसान जैसी सोचने वाली मशीनें। ASI (Artificial Super Intelligence) – इंसान से भी ज्यादा बुद्धिमान मशीनें। यहीं से सवाल उठता है – क्या मशीनें इंसान की जगह ले लेंगी? क्या वे आत्मा और ईश्वर को भी चुनौती देंगी? AGI : इंसान जैसी सोच वाली मशीन AGI का मतलब है कि मशीनें हर क्षेत्र में इंसान जैसी बुद्धि दिखाएँ। वे पढ़ेंगी, समझेंगी, सवालों के जवाब देंगी, और समस्याएँ हल करेंगी। लेकिन याद रखिए – सोचना ही आत्मा नहीं है। आत्मा में भावनाएँ, करुणा और नैतिकता होती है, जो मशीन कभी नहीं पा सकती। 👉 इसलिए AGI हमें याद दिलाएगा – बुद्धि की नकल हो सकती है, लेकिन दि...

मोदी युग

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“भारतीय राजनीति में  भारतीय राजनीति में मोदी युग : एक शोध–आधारित अध्ययन लेखक : संदीप कुमार दुबे (एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया एवं चेयरमैन, छठी मइया फाउंडेशन) सारांश (Abstract) यह शोध–पत्र 2014 के बाद भारतीय राजनीति में आए “मोदी युग” के बहुआयामी विश्लेषण पर आधारित है। नरेंद्र मोदी का नेतृत्व केवल चुनावी सफलता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और सांस्कृतिक विमर्श की दिशा को गहराई से प्रभावित किया। यह अध्ययन दर्शाता है कि मोदी युग भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में निर्णायक मोड़ है, जहाँ राजनीति व्यक्ति–केंद्रित होकर राष्ट्रवाद, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की धुरी पर टिक गई। Keywords: मोदी युग, भारतीय राजनीति, राष्ट्रवाद, विकास, विदेश नीति, सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण। प्रस्तावना (Introduction) भारतीय राजनीति का इतिहास नेतृत्व–केंद्रित युगों में विभाजित रहा है। नेहरू युग ने संस्थाओं और लोकतांत्रिक ढाँचे की नींव रखी (Guha, 2010), इंदिरा गांधी युग सत्ता केंद्रीकरण और आपातकाल का प्रतीक रहा (Frank, 2001), और अटल बिहारी वाजपेयी यु...

मोदी युग : राष्ट्रवाद, निर्णायक नेतृत्व और वैश्विक भारत

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मोदी युग : राष्ट्रवाद, निर्णायक नेतृत्व और वैश्विक भारत लेखक : संदीप कुमार दुबे (एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया एवं चेयरमैन, छठी मइया फाउंडेशन) प्रस्तावना 2014 के बाद भारतीय राजनीति ने एक ऐसा दौर देखा जिसने लोकतंत्र, समाज और वैश्विक कूटनीति की दिशा ही बदल दी। नरेंद्र मोदी का उदय केवल एक नेता का उभार नहीं बल्कि भारतीय राजनीति की परिभाषा का पुनर्लेखन था। मोदी युग की पहचान तीन आधार स्तंभों से होती है – राष्ट्रवाद, निर्णायक नेतृत्व और वैश्विक भारत। 1. मोदी युग और राष्ट्रवाद मोदी युग में राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक नारा नहीं रहा बल्कि एक जीवंत भावनात्मक शक्ति बन गया। सेना के सम्मान, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसी कार्रवाइयों ने जनता के मन में गौरव का भाव भरा। धारा 370 का निरसन, राम मंदिर निर्माण, काशी–विश्वनाथ कॉरिडोर और योग दिवस जैसे कदमों ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जन–जन तक पहुँचाया। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का नारा राष्ट्रवाद को समावेशी रूप देता है। 👉 राष्ट्रवाद अब केवल सीमाओं की सुरक्षा नहीं बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और विकास का साझा संकल्प बन गया है। 2. म...

अब इंसान अमर होगा – नई तकनीक से खुला भविष्य का दरवाज़ा

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अब इंसान अमर होगा – नई तकनीक से खुला भविष्य का दरवाज़ा ✍️ संदीप कुमार दुबे (एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, चेयरमैन – छठी मइया फ़ाउंडेशन) मानव सभ्यता के सबसे बड़े सपनों में से एक – अमरता – अब केवल कल्पना या पौराणिक कथा नहीं रह गई है। दुनिया भर में हो रहे बायोटेक्नोलॉजी, जेनेटिक इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोगों ने इंसान को इस विश्वास के करीब पहुँचा दिया है कि वह मृत्यु को टाल सकता है और शायद अमर भी हो सकता है। नई तकनीक की राह 🔬 एंटी-एजिंग दवाएँ – ऐसी दवाएँ विकसित हो रही हैं जो कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं। 🧬 जीन एडिटिंग (CRISPR) – अब वैज्ञानिक बुढ़ापे से जुड़े जीन हटाने पर काम कर रहे हैं। 🫀 3D ऑर्गन प्रिंटिंग – खराब अंग प्रिंटर से बनाकर शरीर में लगाया जा सकता है। 🤖 नैनोबॉट्स और साइबोर्ग तकनीक – इंसान के शरीर में मशीनें मिलकर उसे बीमारियों से बचाएँगी। 🧠 माइंड अपलोडिंग – इंसान की चेतना को कम्प्यूटर में ट्रांसफर करने की दिशा में शोध तेज़ हो चुका है। इन नई तकनीकों के मिलन से इंसान 120–150 साल तक जीने की क्षमता पा सकता है, और आगे ...

सतीश उपाध्याय : रामभक्ति और सेवाभाव

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सतीश उपाध्याय : रामभक्ति और सेवाभाव  भारतीय संस्कृति में जब भी धर्म और सेवा की चर्चा होती है, वहाँ भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी का नाम सबसे पहले आता है। इन्हीं मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाने वाले एक नाम हैं – सतीश उपाध्याय। सतीश उपाध्याय केवल राजनीति के नेता नहीं हैं, वे जनता के सेवक हैं। वे भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं और अपने जीवन को हनुमान जी की असीम शक्ति, निष्ठा और सेवा भाव से प्रेरित मानते हैं। यही कारण है कि उनके सार्वजनिक कार्यों में सेवा, त्याग और निस्वार्थ समर्पण की झलक साफ दिखाई देती है। हनुमान भक्ति से सेवा का संकल्प सतीश उपाध्याय मानते हैं कि “हनुमान जी ने रामजी की सेवा बिना किसी स्वार्थ के की। वही भाव मेरे जीवन का मार्गदर्शन करता है।” इसी कारण वे राजनीति को सेवा का साधन मानते हैं, न कि सत्ता का माध्यम। चाहे ग़रीबों तक सरकारी योजनाएँ पहुँचाना हो, आपदा के समय राहत कार्य करना हो या समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय दिलाना – हर जगह वे स्वयं आगे बढ़कर कार्य करते हैं। रामलीला महोत्सव 2025 – धर्म और संस्कृति का संगम इसी धार्मिक और सांस्क...

समाज और राष्ट्र के पथप्रदर्शक : पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

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समाज और राष्ट्र के पथप्रदर्शक : पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) केवल एक संगठन भर नहीं है, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और जीवन मूल्यों का सशक्त प्रतीक है। इस संगठन ने पिछले सौ वर्षों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर राष्ट्रभक्ति, सेवा और संस्कार का अद्वितीय कार्य किया है। इस विराट कार्य का नेतृत्व वर्तमान समय में पूजनीय सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत जी कर रहे हैं। आज उनके जन्मदिवस के पावन अवसर पर मैं उन्हें हृदय से शुभकामनाएँ अर्पित करता हूँ और उनके दीर्घ, स्वस्थ एवं प्रेरणादायी जीवन की मंगलकामना करता हूँ। डॉ. मोहन भागवत जी का जीवन त्याग, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उनके जीवन और विचारों से हमें यह सीख मिलती है कि – व्यक्ति से बड़ा समाज है और समाज से बड़ा राष्ट्र। समाज का उत्थान ही सच्ची देशभक्ति है। समरसता, सेवा और संगठन ही भारत के नवजागरण की कुंजी हैं। उनके नेतृत्व में संघ ने न केवल संगठनात्मक विस्तार किया है, बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का...