समाज और राष्ट्र के पथप्रदर्शक : पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी
समाज और राष्ट्र के पथप्रदर्शक : पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी
विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) केवल एक संगठन भर नहीं है, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और जीवन मूल्यों का सशक्त प्रतीक है। इस संगठन ने पिछले सौ वर्षों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर राष्ट्रभक्ति, सेवा और संस्कार का अद्वितीय कार्य किया है। इस विराट कार्य का नेतृत्व वर्तमान समय में पूजनीय सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत जी कर रहे हैं।
आज उनके जन्मदिवस के पावन अवसर पर मैं उन्हें हृदय से शुभकामनाएँ अर्पित करता हूँ और उनके दीर्घ, स्वस्थ एवं प्रेरणादायी जीवन की मंगलकामना करता हूँ।
डॉ. मोहन भागवत जी का जीवन त्याग, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उनके जीवन और विचारों से हमें यह सीख मिलती है कि –
व्यक्ति से बड़ा समाज है और समाज से बड़ा राष्ट्र।
समाज का उत्थान ही सच्ची देशभक्ति है।
समरसता, सेवा और संगठन ही भारत के नवजागरण की कुंजी हैं।
उनके नेतृत्व में संघ ने न केवल संगठनात्मक विस्तार किया है, बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त किया है। ग्राम विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र रक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में संघ और उसके स्वयंसेवकों ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
डॉ. भागवत जी की सरलता, सहजता और दूरदृष्टि ने करोड़ों स्वयंसेवकों को निरंतर प्रेरित किया है। वे केवल एक संगठन प्रमुख नहीं, बल्कि राष्ट्र के मार्गदर्शक और पथप्रदर्शक हैं। उनका यह कथन विशेष रूप से स्मरणीय है कि –
“संघ का कार्य किसी व्यक्ति या समूह के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के उत्थान के लिए है।”
आज जब भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है, तब मोहन भागवत जी का चिंतन, मार्गदर्शन और जीवनदर्शन हम सभी के लिए अमूल्य धरोहर है।
इस पावन अवसर पर मैं,
संदीप कुमार दुबे
वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, भारत
चेयरमैन, छठी मइया फाउंडेशन
पूजनीय सरसंघचालक जी के दीर्घ, स्वस्थ और सफल जीवन की हृदय से मंगलकामना करता हूँ। उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन सदैव राष्ट्र व समाज का पथ आलोकित करता रहे।
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