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Showing posts from May, 2026

एक साल विकास का, विश्वास और समाधान का,राजनीति का वास्तविक उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना है- सतिश उपाध्याय

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एक साल विकास का, विश्वास और समाधान का विकसित मालवीय नगर के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण यात्रा अगस्त क्रांति मार्ग स्थित NCUI ऑडिटोरियम में आयोजित “विकसित मालवीय नगर का संकल्प समारोह” केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विकास, सुशासन, जनविश्वास और समयबद्ध समाधान की उस यात्रा का उत्सव था जिसने मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र को नई दिशा प्रदान की है। कार्यक्रम में दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुईं। इस अवसर पर उन्होंने मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र में पिछले एक वर्ष के दौरान संपन्न विकास कार्यों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया तथा विभिन्न जनहितकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री जी ने इस अवसर पर “एक साल विकास का, विश्वास और समाधान का” शीर्षक से प्रकाशित विशेष बुकलेट का भी विमोचन किया, जिसमें क्षेत्र में हुए विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा नागरिक सुविधाओं के विस्तार का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। कार्यक्रम में सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज जी...

Rules of Mediation — A Path Towards Peaceful Justice

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Rules of Mediation — A Path Towards Peaceful Justice By Sandeep Kumar  Dubey ,Advocate /Mediator Supreme Court of India. In today’s society, conflicts and disputes have become increasingly common in families, workplaces, businesses, and communities. While courts provide legal remedies, litigation often consumes significant time, money, and emotional energy. In such situations, mediation emerges as a peaceful, practical, and human-centered method of dispute resolution. Mediation is a structured process in which disputing parties attempt to resolve their differences through mutual discussion and understanding with the assistance of a neutral mediator. Unlike a judge, a mediator does not impose decisions. Instead, the mediator helps both parties communicate effectively and work toward a mutually acceptable solution. The true strength of mediation lies in dialogue, trust, and cooperation. It creates an environment where people are heard with dignity and respect....

मध्यस्थता के नियम — शांतिपूर्ण न्याय की ओर एक मार्ग — संदीप दुबे

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मध्यस्थता के नियम — शांतिपूर्ण न्याय की ओर एक मार्ग — Sandeep Kumar Dubey ,Advocate /Mediator Supreme court of india आज के समय में परिवार, समाज, व्यापार और कार्यस्थलों में विवाद और मतभेद तेजी से बढ़ रहे हैं। न्यायालय लोगों को कानूनी समाधान प्रदान करते हैं, लेकिन कई बार मुकदमेबाजी में समय, धन और मानसिक शांति तीनों की भारी हानि होती है। ऐसे समय में मध्यस्थता (Mediation) एक शांतिपूर्ण, व्यावहारिक और मानवीय समाधान के रूप में सामने आती है। मध्यस्थता एक ऐसी व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसमें विवादित पक्ष एक निष्पक्ष मध्यस्थ की सहायता से आपसी संवाद और सहमति के माध्यम से अपने विवाद का समाधान खोजने का प्रयास करते हैं। मध्यस्थ किसी न्यायाधीश की तरह फैसला नहीं सुनाता, बल्कि दोनों पक्षों को समझने, सुनने और समाधान तक पहुँचने में सहायता करता है। मध्यस्थता की सबसे बड़ी शक्ति संवाद, विश्वास और सहयोग में निहित है। यह एक ऐसा वातावरण तैयार करती है, जहाँ दोनों पक्ष अपनी बात सम्मानपूर्वक रख सकते हैं और एक-दूसरे को समझने का प्रयास करते हैं। मध्यस्थता का उद्देश्य किसी को जीताना या हराना न...

हमें सत्य, धर्म, मानवता और न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना होगा

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“हमें सत्य, धर्म, मानवता और न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना होगा” — Sandeep Kumar Dubey आज का समय केवल विकास और आधुनिकता का नहीं, बल्कि नैतिक परीक्षा का समय भी है। समाज में झूठ, भ्रष्टाचार, हिंसा, स्वार्थ, नफरत और अन्याय लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लोग एक-दूसरे पर विश्वास खोते जा रहे हैं और मानवता कहीं न कहीं कमजोर होती दिखाई दे रही है। ऐसे समय में हमें केवल आलोचना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संकल्प की आवश्यकता है। इसीलिए मैं मानता हूँ कि हमें सत्य, धर्म, मानवता और न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना होगा। यही एक ऐसा मार्ग है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र — तीनों को मजबूत बना सकता है। सत्य का मार्ग सत्य केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, वह कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और सम्मान के साथ खड़ा रहता है। झूठ कुछ समय के लिए लाभ दे सकता है, लेकिन स्थायी विश्वास केवल सत्य से ही प्राप्त होता है। आज समाज को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो सत्य बोलने का साहस रखें और ईमानदारी को अपनी पहचान बनाएं। धर्म का वास्तविक अर्थ धर्म का अर्थ...

“सत्य सेना” क्या करेगी?

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“सत्य सेना” क्या करेगी? — Sandeep Kumar Dubey आज समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ झूठ, भ्रष्टाचार, स्वार्थ, हिंसा और नैतिक पतन तेजी से बढ़ रहा है। लोगों का विश्वास एक-दूसरे से, व्यवस्था से और सामाजिक मूल्यों से कमजोर होता जा रहा है। ऐसे समय में मैंने “सत्य सेना” के गठन का निर्णय लिया है, ताकि सत्य, मानवता, सेवा और संस्कार में विश्वास रखने वाले लोग एक मंच पर आ सकें। “सत्य सेना” किसी राजनीतिक, हिंसात्मक या उग्र विचारधारा का संगठन नहीं होगा। यह एक शांतिपूर्ण सामाजिक और नैतिक जागरूकता अभियान होगा, जिसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। “सत्य सेना” क्या करेगी? 1. सत्य और ईमानदारी का प्रचार सत्य सेना लोगों को सत्य बोलने, ईमानदारी से जीवन जीने और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करेगी। 2. युवाओं को सही दिशा देना आज का युवा भ्रम, नशे, हिंसा और गलत प्रभावों से प्रभावित हो रहा है। सत्य सेना युवाओं को राष्ट्रसेवा, संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक सोच की दिशा में प्रेरित करेगी। 3. माता-पिता और बुजुर्गों के सम्मान का अभियान सत्य सेना परिवार और संस्कारों को मजबूत कर...

98. सत्य ही सबसे बड़ा मूल्य है

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सत्य ही सबसे बड़ा मूल्य है — Sandeep Dubey सत्य केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। जिस व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की नींव सत्य पर टिकी होती है, वही स्थायी रूप से महान बनता है। झूठ कुछ समय के लिए चमक सकता है, लेकिन अंततः विजय सत्य की ही होती है। छठ महापर्व हमें सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व सिखाता है कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता ही सच्ची पूजा है। जब व्यक्ति अपने जीवन में सत्य को अपनाता है, तब उसके भीतर विश्वास, आत्मबल और शांति का जन्म होता है। सत्य से विश्वास बनता है, विश्वास से संबंध बनते हैं, संबंधों से समाज बनता है, और समाज से राष्ट्र महान बनता है। आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग बाहरी दिखावे में उलझकर सत्य से दूर होते जा रहे हैं। स्वार्थ, छल और असत्य मनुष्य को भीतर से कमजोर कर देते हैं। लेकिन जो व्यक्ति सत्य का साथ देता है, वह कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहता है। छठ हमें यह भी सिखाता है कि सत्य केवल बोलने की चीज नहीं, बल्कि जीने की प्रक्रिया है। सत्य सोच में हो, व्यवहार में हो, कर्म में हो और संबंधों में हो — तभी जीवन सार्थक बनता है...

99 छठ हमें इंसानियत सिखाता है

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छठ हमें इंसानियत सिखाता है — Sandeep Dubey छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, अनुशासन, सेवा और आत्मशुद्धि का महान संदेश है। यह वह संस्कृति है जो हमें सिखाती है कि सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि इंसानियत में बसता है। जब छठ व्रती जल में खड़े होकर सूर्य देव और छठी मैया को अर्घ्य देते हैं, तब वे केवल अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना नहीं करते, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का भाव रखते हैं। यही भावना छठ को दुनिया के सबसे पवित्र और मानवीय पर्वों में शामिल करती है। छठ हमें सिखाता है कि जीवन में नियम और संयम कितना आवश्यक है। व्रती कई दिनों तक कठिन तपस्या करते हैं, शुद्धता का पालन करते हैं, और अपने मन, वचन एवं कर्म को पवित्र बनाने का प्रयास करते हैं। यह संदेश देता है कि यदि मनुष्य अपने जीवन में अनुशासन अपना ले, तो उसका जीवन भी प्रकाशमय हो सकता है। छठ का सबसे बड़ा संदेश है — “सबका सम्मान करो, सबका भला सोचो, और हर प्राणी में ईश्वर को देखो।” इस पर्व में अमीर-गरीब, ऊँच-नीच, जाति-पंथ का कोई भेद नहीं रहता। घाट पर सभी एक साथ खड़े होकर पूजा करते हैं। यही सामाजिक समानता और भा...

100 .सत्य ही मानवता का भविष्य है

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सत्य ही मानवता का भविष्य है — Sandeep Kumar Dubey Chairman, Chhathi Maiya Foundation आज मानव समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ विज्ञान ने प्रगति तो बहुत की है, लेकिन मनुष्य के भीतर का सत्य कमजोर होता जा रहा है। झूठ, स्वार्थ, छल, हिंसा और अविश्वास ने समाज की नींव को हिलाना शुरू कर दिया है। ऐसे समय में छठ महापर्व केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता को सत्य, अनुशासन, सेवा और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाने वाला दिव्य संदेश है। छठ हमें सिखाता है कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि भीतर के सत्य में होती है। जब मनुष्य सत्य को अपनाता है, तब उसके विचार शुद्ध होते हैं। शुद्ध विचारों से व्यवहार पवित्र होता है और पवित्र व्यवहार से समाज मजबूत बनता है। यही मजबूत समाज मानवता के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है। आज दुनिया में सबसे बड़ी कमी धन की नहीं, बल्कि विश्वास की है। सत्य ही वह आधार है जिससे परिवार जुड़ते हैं, समाज में विश्वास बढ़ता है और राष्ट्र मजबूत बनता है। यदि मनुष्य सत्य बोलना, सत्य सोचना और सत्य के मार्ग पर चलना शुरू कर दे, तो अनेक सामाजिक समस्याएँ स्वतः ...

माया बहुत ठगनी है— संदीप

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माया बहुत ठगनी है यह संसार जितना सुंदर दिखाई देता है, उतना सरल नहीं है। यहाँ हर ओर माया का जाल फैला हुआ है। मनुष्य जन्म लेते ही रिश्तों, इच्छाओं, धन, प्रतिष्ठा, शक्ति और अहंकार के ऐसे चक्र में फँस जाता है कि वह अपने जीवन का वास्तविक उद्देश्य ही भूल जाता है। इसीलिए संतों और महापुरुषों ने बार-बार कहा है — “माया बहुत ठगनी है।” माया मनुष्य को कभी धन के पीछे दौड़ाती है, कभी झूठी प्रशंसा के पीछे, तो कभी ऐसे अहंकार में डाल देती है जहाँ उसे स्वयं के अलावा कोई दिखाई नहीं देता। मनुष्य सोचता है कि अधिक धन, बड़ा घर, ऊँचा पद और प्रसिद्धि ही जीवन का सबसे बड़ा सुख है, लेकिन जब जीवन कठिन मोड़ पर पहुँचता है तब समझ आता है कि इन सबका वास्तविक मूल्य बहुत सीमित है। आज का समाज भी इसी माया के प्रभाव में जी रहा है। लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में रिश्तों की गर्माहट खोते जा रहे हैं। सत्य की जगह दिखावा बढ़ रहा है। प्रेम की जगह स्वार्थ बढ़ रहा है। मानवता की जगह अहंकार बढ़ रहा है। यही माया का सबसे बड़ा छल है कि मनुष्य को गलत मार्ग पर ले जाकर भी उसे यह एहसास नहीं होने देती कि वह भटक ...