भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ प्रकरण: सत्य की स्थापना ही न्याय का मार्ग
भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ प्रकरण: सत्य की स्थापना ही न्याय का मार्ग बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई भरत भूषण तिवारी की मृत्यु ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। यह मामला केवल एक पुलिस मुठभेड़ का नहीं, बल्कि कानून के शासन, मानवाधिकार, पुलिस जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक युवक हाथ में हथियार लेकर पुलिस को चुनौती देता दिखाई देता है। दूसरी ओर, मृतक के परिजन और ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। इन दोनों दावों के बीच सत्य कहीं न कहीं छिपा हुआ है, और उसी सत्य की खोज आज समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। एक अधिवक्ता होने के नाते मेरा मानना है कि किसी भी घटना का मूल्यांकन भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के आधार पर होना चाहिए। यदि पुलिस पर वास्तव में जानलेवा हमला हुआ और आत्मरक्षा में कार्रवाई की गई, तो कानून पुलिस को ऐसा करने का अधिकार देता है। लेकिन यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि युवक ने आत्मसमर्पण कर दि...