न्यायपालिका से भरोसा उठना लोकतंत्र के लिए खतरा— जिम्मेदार कौन?

न्यायपालिका से भरोसा उठना लोकतंत्र के लिए खतरा — जिम्मेदार कौन?
लेखक: संदीप कुमार दुबे, अधिवक्ता एवं मध्यस्थ

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि जनता के विश्वास पर खड़ा होता है। यह विश्वास संविधान, संसद, कार्यपालिका, पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर टिका होता है। जब इन संस्थाओं पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ने लगता है, तब लोकतंत्र की नींव भी कमजोर होने लगती है।

आज देश के अनेक हिस्सों में यह चिंता दिखाई देती है कि आम नागरिक को न्याय प्राप्त करने में वर्षों लग जाते हैं, जबकि प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत लोग व्यवस्था तक अधिक आसानी से पहुंच बना लेते हैं। यह धारणा लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

अमीरी-गरीबी की बढ़ती खाई

भारत आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है, लेकिन विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। एक ओर कुछ लोग अपार संपत्ति अर्जित कर रहे हैं, तो दूसरी ओर करोड़ों लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जब आर्थिक विषमता बढ़ती है, तब सामाजिक असंतोष भी बढ़ता है। गरीब वर्ग को यह महसूस होने लगता है कि व्यवस्था उसके लिए नहीं बनी है। यही भावना लोकतंत्र के प्रति निराशा को जन्म देती है।

पुलिस-अपराधी-नेता गठजोड़ की बढ़ती धारणा

समाज में एक चिंताजनक धारणा यह भी बन रही है कि कुछ मामलों में अपराधियों, भ्रष्ट तत्वों, प्रभावशाली नेताओं और पुलिस तंत्र के बीच अनुचित संबंध स्थापित हो जाते हैं। जब किसी मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती, पीड़ित की आवाज नहीं सुनी जाती या प्रभावशाली लोगों के विरुद्ध कार्रवाई में देरी होती है, तब जनता के मन में संदेह पैदा होता है।

यह कहना उचित नहीं होगा कि पूरी पुलिस व्यवस्था या पूरा राजनीतिक वर्ग ऐसा है। देश में हजारों ईमानदार पुलिसकर्मी, अधिकारी और जनप्रतिनिधि जनता की सेवा में समर्पित हैं। लेकिन कुछ घटनाएं पूरे तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर देती हैं।

लोकतंत्र में सबसे बड़ा संकट तब उत्पन्न होता है जब जनता कानून के शासन से अधिक व्यक्ति विशेष के प्रभाव को शक्तिशाली मानने लगे। यदि लोगों को यह लगने लगे कि न्याय धन, सत्ता और पहुंच पर निर्भर है, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख कमजोर पड़ जाती है।

न्यायपालिका पर विश्वास क्यों आवश्यक है?

न्यायपालिका लोकतंत्र की अंतिम आशा होती है। जब नागरिक को कहीं और न्याय नहीं मिलता, तब वह अदालत की ओर देखता है। यदि न्यायपालिका पर भी विश्वास कम होने लगे, तो लोकतंत्र के मूल आधार पर संकट उत्पन्न हो सकता है।

न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। समयबद्ध, सुलभ और निष्पक्ष न्याय ही जनता के विश्वास को मजबूत कर सकता है।

जिम्मेदार कौन?

इस स्थिति के लिए किसी एक संस्था को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

- सरकारें जिम्मेदार हैं, यदि वे न्यायिक और प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता नहीं देतीं।
- न्यायिक व्यवस्था जिम्मेदार है, यदि न्याय में अत्यधिक विलंब होता है।
- प्रशासन और पुलिस जिम्मेदार हैं, यदि निष्पक्षता और जवाबदेही कमजोर पड़ती है।
- राजनीतिक दल जिम्मेदार हैं, यदि अपराधी तत्वों को संरक्षण मिलता है।
- समाज और नागरिक भी जिम्मेदार हैं, यदि वे भ्रष्टाचार, झूठ और अन्याय के प्रति मौन रहते हैं।

समाधान क्या है?

1. न्यायिक सुधार और समयबद्ध न्याय।
2. पुलिस सुधार एवं राजनीतिक हस्तक्षेप में कमी।
3. मध्यस्थता (Mediation) और वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ावा।
4. शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का समान विस्तार।
5. शासन और न्याय प्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही।
6. राजनीति का अपराधीकरण समाप्त करने के लिए कठोर कदम।
7. समाज में सत्य, नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों का पुनर्जागरण।

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है। यदि न्यायपालिका, पुलिस और राजनीतिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है तथा समाज अमीरी-गरीबी की गहरी खाई में बंटता जाता है, तो यह केवल प्रशासनिक या आर्थिक संकट नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संकट बन जाता है।

आज आवश्यकता दोषारोपण की नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सुधार की है। हमें ऐसा भारत बनाना होगा जहां कानून सबके लिए समान हो, न्याय सबको उपलब्ध हो और लोकतंत्र का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

"जब न्याय पर विश्वास मजबूत होता है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है; और जब कानून का राज व्यक्ति के प्रभाव से ऊपर होता है, तभी राष्ट्र वास्तव में सभ्य और विकसित कहलाता है।"

Comments

Popular posts from this blog

छठ के आदर्शों से होगा सत्य का पुनर्जागरण: संदीप दुबे

भारतीय जनता पार्टी को समझने में मुझे 10 वर्ष लगे

युवाओं को छठी मैया का व्रत सिखाएँगे, ताकि वे टूटते परिवारों को जोड़ सकें