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आज का भगत सिंह हथियार में नहीं, चरित्र में खोजा जाना चाहिए

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आज का भगत सिंह हथियार में नहीं, चरित्र में खोजा जाना चाहिए — संदीप कुमार दुबे जब भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की बात होती है, शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का नाम आते ही मन में एक ऐसे युवा की छवि उभरती है जिसने बहुत छोटी आयु में अपने जीवन को राष्ट्र के एक बड़े उद्देश्य से जोड़ दिया। उनका जीवन छोटा था, लेकिन उनके विचारों की यात्रा लंबी हुई। पीढ़ियाँ बदल गईं, परिस्थितियाँ बदल गईं, भारत स्वतंत्र राष्ट्र बन गया, लेकिन भगत सिंह आज भी युवाओं के मन में साहस और त्याग के प्रतीक के रूप में जीवित हैं। आज प्रश्न यह नहीं है कि दूसरा भगत सिंह कहाँ से आएगा। प्रश्न यह है कि क्या हम अपने समाज और अपने बच्चों के चरित्र में भगत सिंह के गुण पैदा कर पा रहे हैं? मेरे विचार से आज भारत को भगत सिंह की आवश्यकता अवश्य है, लेकिन उनकी तलाश हथियार में नहीं की जानी चाहिए। आज का भगत सिंह हथियार में नहीं, चरित्र में खोजा जाना चाहिए। भगत सिंह जिस दौर में पैदा हुए, वह गुलामी का दौर था। आज हम एक स्वतंत्र, संवैधानिक और लोकतांत्रिक गणराज्य में रहते हैं। समय बदल चुका है और इसलिए राष्ट्रसेवा के साधन भी बदल चुके हैं। आज दे...

श्री छठ महापुराणसंस्कृत श्लोक एवं हिन्दी व्याख्या Final

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श्री छठ महापुराण संस्कृत श्लोक एवं हिन्दी व्याख्या संग्राहक एवं प्रस्तुतकर्ता संदीप कुमार दुबे अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, भारत अध्यक्ष — छठी मैया फाउंडेशन मंगलाचरण ॐ श्रीगणेशाय नमः। ॐ सूर्याय नमः। ॐ षष्ठ्यै देव्यै नमः। वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ अध्याय प्रथम छठी मैया की प्रारंभिक स्तुति संस्कृत ॐ षष्ठ्यै नमः। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ सूर्यतेजःसमायुक्तां प्रकृतेः परमां कलाम्। षष्ठीं देवीं नमस्यामि लोकमङ्गलकारिणीम्॥ पुत्रसौख्यप्रदां देवीं परिवारहितैषिणीम्। नदीतीरनिवासिन्यां श्रद्धाभक्त्या नमाम्यहम्॥ अस्ताचलगते सूर्ये यां स्मरन्ति व्रतस्थिताः। उदिते भास्करे चैव तां षष्ठीं प्रणमाम्यहम्॥ हिन्दी व्याख्या “ॐ षष्ठ्यै नमः”—अर्थात् षष्ठी स्वरूपा छठी मैया को प्रणाम। जो देवी समस्त जीव-जगत में मातृशक्ति, सृजन, संरक्षण, करुणा और जीवन की निरंतरता के रूप में प्रतिष्ठित हैं, उन भगवती को बार-बार प्रणाम है। छठ की उपासना मनुष्य को केवल देवता के सम्मुख नहीं ले जाती, बल्कि उसे सूर्य, जल और ...