आज का भगत सिंह हथियार में नहीं, चरित्र में खोजा जाना चाहिए
आज का भगत सिंह हथियार में नहीं, चरित्र में खोजा जाना चाहिए — संदीप कुमार दुबे जब भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की बात होती है, शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का नाम आते ही मन में एक ऐसे युवा की छवि उभरती है जिसने बहुत छोटी आयु में अपने जीवन को राष्ट्र के एक बड़े उद्देश्य से जोड़ दिया। उनका जीवन छोटा था, लेकिन उनके विचारों की यात्रा लंबी हुई। पीढ़ियाँ बदल गईं, परिस्थितियाँ बदल गईं, भारत स्वतंत्र राष्ट्र बन गया, लेकिन भगत सिंह आज भी युवाओं के मन में साहस और त्याग के प्रतीक के रूप में जीवित हैं। आज प्रश्न यह नहीं है कि दूसरा भगत सिंह कहाँ से आएगा। प्रश्न यह है कि क्या हम अपने समाज और अपने बच्चों के चरित्र में भगत सिंह के गुण पैदा कर पा रहे हैं? मेरे विचार से आज भारत को भगत सिंह की आवश्यकता अवश्य है, लेकिन उनकी तलाश हथियार में नहीं की जानी चाहिए। आज का भगत सिंह हथियार में नहीं, चरित्र में खोजा जाना चाहिए। भगत सिंह जिस दौर में पैदा हुए, वह गुलामी का दौर था। आज हम एक स्वतंत्र, संवैधानिक और लोकतांत्रिक गणराज्य में रहते हैं। समय बदल चुका है और इसलिए राष्ट्रसेवा के साधन भी बदल चुके हैं। आज दे...