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जब पूरी दुनिया तुम्हारी गलतियाँ गिनाती है, तब माँ तुम्हारी अच्छाइयाँ याद रखती है -श्रद्धांजलि सभा में मेरा श्रद्धासुमन

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श्रद्धांजलि सभा में मेरा श्रद्धासुमन — अधिवक्ता संदीप कुमार दुबे माँ केवल जन्म देने वाली नहीं होती, बल्कि वह हर उस व्यक्ति के जीवन में माँ बन जाती है, जिसे अपने स्नेह, संस्कार और आशीर्वाद से अपनाती है। जीवन में कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं और कुछ ईश्वर के विशेष आशीर्वाद के रूप में। मेरे लिए पूज्य अनुराधा माँ ऐसा ही एक ईश्वरीय आशीर्वाद थीं। वे केवल मेरी सासू माँ नहीं थीं, बल्कि मेरी माँ थीं। उन्होंने मुझे कभी दामाद नहीं समझा, बल्कि सदैव अपने पुत्र की तरह प्रेम, सम्मान और विश्वास दिया। जब मैं इस परिवार का हिस्सा बना, तब मैंने अनुभव किया कि एक माँ का हृदय कितना विशाल होता है। उन्होंने कभी यह अनुभव नहीं होने दिया कि मैं इस परिवार का बाहरी सदस्य हूँ। उनका स्नेह, उनका अपनापन और उनके आशीर्वाद ने मुझे सदैव यह विश्वास दिलाया कि रिश्ते केवल रक्त से नहीं, बल्कि प्रेम और संस्कार से बनते हैं। आज उनका शारीरिक रूप हमारे बीच नहीं है, परन्तु उनका स्नेह, उनके संस्कार और उनकी स्मृतियाँ सदैव हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा रहेंगी। एक संत ने कहा था— "जब पूरी दुनिया तुम्हारी गलतियाँ गिनाती है, ...

नीलकंठ का स्वरूप बताता है कि समाज के विष को स्वयं सहकर भी दूसरों के लिए अमृत समान जीवन देना ही महानता है -मेरे शिव

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मेरे शिव – इस वर्ष क्या है खास? श्रद्धा, सत्य और सामाजिक समरसता का महापर्व – संदीप कुमार दुबे अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय चेयरमैन, छठी मैया फाउंडेशन हर हर महादेव! भारत की सांस्कृतिक चेतना में भगवान शिव केवल एक आराध्य देव नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन के सर्वोच्च प्रतीक हैं। वे तप के भी देव हैं और करुणा के भी; संहार के भी अधिपति हैं और नवसृजन के भी प्रेरणास्रोत। इसलिए शिव की उपासना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य, संयम, सेवा और समरसता से परिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देती है। इस वर्ष श्रावण मास और कांवड़ यात्रा का उत्साह देशभर में विशेष रूप से दिखाई दे रहा है। करोड़ों शिवभक्त आस्था, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ महादेव की आराधना कर रहे हैं। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंतता, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक शक्ति का विराट स्वरूप है। आज जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भगवान शिव का संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक हो जाता है। शिव हमें सिखाते हैं कि क्रोध पर धैर्य, असत्य पर सत्य, अहंकार पर विनम्रता और स्वार्थ पर लोककल्याण की विजय ही सच्...

रिश्ते बचाने के 101 स्वर्णिम सूत्र

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रिश्ते बचाने के 101 स्वर्णिम सूत्र "महान रिश्ते किसी एक बड़े कार्य से नहीं, बल्कि प्रतिदिन किए गए छोटे-छोटे अच्छे व्यवहारों से बनते हैं।" संवाद पहले सुनिए, फिर बोलिए। उत्तर देने से पहले समझिए। क्रोध में निर्णय मत लीजिए। धीरे बोलिए, स्पष्ट बोलिए। अपमानजनक शब्द कभी मत बोलिए। संवाद बंद मत कीजिए। मौन को दंड मत बनाइए। समस्या पर बात कीजिए, व्यक्ति पर नहीं। असहमति का अर्थ दुश्मनी नहीं है। सम्मान के साथ अपनी बात रखिए। विश्वास झूठ से बचिए। वचन निभाइए। पारदर्शिता रखिए। विश्वास टूटे तो धैर्य से जोड़िए। अनावश्यक संदेह मत कीजिए। वादे कम, पालन अधिक कीजिए। ईमानदारी सबसे बड़ा निवेश है। विश्वास समय से बनता है। विश्वास का दुरुपयोग मत कीजिए। भरोसा दीजिए, भय नहीं। सम्मान सार्वजनिक रूप से अपमान मत कीजिए। धन्यवाद कहना सीखिए। क्षमा माँगना सीखिए। क्षमा करना सीखिए। हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान कीजिए। मतभेद में भी मर्यादा रखिए। तुलना मत कीजिए। व्यंग्य से बचिए। सम्मान रिश्ते की नींव है। अहंकार से पहले इंसान को देखिए। परिवार प्रतिदिन साथ भोजन कीज...

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बहुत अच्छा। आज से हम इस पुस्तक का प्रकाशन-योग्य संस्करण लिखना शुरू करते हैं। मैं इसे सामान्य पुस्तक नहीं, बल्कि एक ऐसी कृति बनाना चाहता हूँ जो वर्षों तक पढ़ी जाए। --- रिश्ते बचाने की कला 19 ऐसे सूत्र जो हर रिश्ते को मजबूत और स्थायी बना सकते हैं एक अधिवक्ता एवं मध्यस्थ (Mediator) के अनुभव, भारतीय जीवन-मूल्यों और व्यवहारिक सिद्धांतों पर आधारित मार्गदर्शिका ✍️ लेखक संदीप कुमार दुबे अधिवक्ता एवं मध्यस्थ (Advocate & Mediator) चेयरमैन, छठी मैया फाउंडेशन --- समर्पण (Dedication) यह पुस्तक उन सभी रिश्तों को समर्पित है— जो टूटने की कगार पर थे, लेकिन संवाद ने उन्हें बचा लिया। जो अहंकार के कारण बिखर सकते थे, लेकिन क्षमा ने उन्हें फिर जोड़ दिया। जो मौन से दूर हुए, लेकिन सही समय पर हुए संवाद ने उन्हें फिर निकट ला दिया। यह पुस्तक उन माता-पिता को समर्पित है जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए स्वयं का सुख त्याग देते हैं। उन जीवनसाथियों को, जो कठिन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ते। उन बच्चों को, जो अपने माता-पिता की मुस्कान में अपना संसार देखते हैं। उन मित्रों को, जो बिना किसी स्वार्थ के...

Divorce Is Not the Enemy—Violence Is: Rethinking Family Justice in India

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  Divorce Is Not the Enemy—Violence Is: Rethinking Family Justice in India By Sandeep Kumar Dubey Advocate & Mediator, Supreme Court of India Every time a husband kills his wife, a wife attacks her husband, or a couple's marital dispute ends in suicide or murder, the nation is left asking the same painful question: How did a relationship built on trust end in such tragedy? The answer does not lie in divorce. Divorce is a lawful and civilized mechanism that enables two individuals to end a marriage that has irretrievably broken down. The real crisis begins when unresolved conflict transforms into hatred, revenge, and violence. That is where society, institutions, and even the justice system must pause and ask whether enough was done to prevent the tragedy. As a lawyer and mediator, I believe that divorce is not the failure of society; violence is. A democratic nation governed by the rule of law recognizes the right of every individual to leave an unhappy or uns...

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बहुत अच्छा संदीप जी। अब हम चैट में लेख लिखना बंद करते हैं और एक ऐतिहासिक ग्रंथ लिखना शुरू करते हैं। मैं इसे सामान्य पुस्तक नहीं, बल्कि भारत सरकार को समर्पित Vision Book के रूप में लिखूँगा। मेरा लक्ष्य रहेगा कि आने वाले वर्षों में जब कोई छठ पर गंभीर अध्ययन करे, तो इस पुस्तक  पुस्तक का नाम छठ भारत की आस्था से विश्व की धरोहर तक Vision 2047 विकसित भारत के लिए राष्ट्रीय सांस्कृतिक दृष्टि --- लेखक संदीप कुमार दुबे संस्थापक एवं अध्यक्ष छठी मैया फाउंडेशन संस्थापक छठी मैया रिसर्च सेंटर --- प्रकाशक छठी मैया रिसर्च सेंटर नई दिल्ली --- ध्येय वाक्य "सत्य • सेवा • समरसता • प्रकृति संरक्षण • विश्व कल्याण" --- समर्पण भारत माता को समर्पित सूर्यदेव की दिव्य ऊर्जा, षष्ठी देवी (छठी मैया) की करुणा तथा उन करोड़ों श्रद्धालुओं को सादर समर्पित जिन्होंने युगों से छठ महापर्व की पवित्र परंपरा को अपने तप, त्याग, अनुशासन और अटूट श्रद्धा से जीवित रखा है। यह ग्रंथ उन माताओं को भी समर्पित है जिनकी आस्था ने पीढ़ियों को संस्कार दिए, उन परिवारों को जिन्होंने छठ को केवल पर्व नहीं बल्कि जीवन-मूल्य बनाया, और उन प्...

भारतीय जनता पार्टी को समझने में मुझे 10 वर्ष लगे

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भारतीय जनता पार्टी को समझने में मुझे 10 वर्ष लगे - संदीप "भाजपा आपके लिए क्या करे, इससे पहले यह सोचिए कि आपने राष्ट्र के लिए क्या किया" — संदीप कुमार दुबे भारतीय राजनीति में अनेक दल हैं, अनेक नेता हैं और अनेक विचारधाराएँ हैं। लेकिन यदि कोई मुझसे पूछे कि भारतीय जनता पार्टी को समझने में कितना समय लगा, तो मेरा उत्तर होगा— लगभग 10 वर्ष। इन 10 वर्षों में मैंने केवल एक राजनीतिक दल को नहीं देखा, बल्कि एक ऐसी विचारधारा को समझने का प्रयास किया जो स्वयं को सत्ता से अधिक राष्ट्र के प्रति समर्पित मानती है। यही विचारधारा भाजपा को अन्य राजनीतिक दलों से अलग पहचान देती है। आज राजनीति का बड़ा हिस्सा अधिकारों की बात करता है, जबकि भाजपा की मूल सोच कर्तव्य पर बल देती है। अधिकांश लोग पूछते हैं— "सरकार ने हमारे लिए क्या किया?" लेकिन भाजपा का कार्यकर्ता स्वयं से पूछता है— "मैंने अपने राष्ट्र, समाज और संस्कृति के लिए क्या किया?" यही सोच भाजपा की आत्मा है। भाजपा को अलग क्या बनाता है? मेरी समझ में भाजपा केवल चुनाव जीतने का संगठन नहीं है। यह एक वैचारिक आंदोलन है जिसकी जड...