होनी को टालना संभव नहीं, लेकिन उसका सामना कैसे करना है—यह भगवान राम हमें सिखाते हैं

 

होनी को टालना संभव नहीं, लेकिन उसका सामना कैसे करना है—यह भगवान राम हमें सिखाते हैं

जीवन में कई बार ऐसी घटनाएँ घटती हैं जिन्हें हम रोक नहीं सकते। सुख और दुःख, सफलता और असफलता, मिलन और वियोग—ये सभी जीवन के स्वाभाविक पहलू हैं। सनातन धर्म में इसे ही "होनी" कहा गया है। होनी अर्थात वह जो निश्चित है और जिसे टालना संभव नहीं है।

भगवान राम का जीवन इस सत्य का सर्वोत्तम उदाहरण है। अयोध्या में उनके राज्याभिषेक की सभी तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी थीं। प्रजा उत्साहित थी और पूरा राज्य उत्सव मना रहा था। लेकिन अचानक परिस्थितियाँ बदल गईं। माता कैकेयी के दो वरदानों के कारण भगवान राम को चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करना पड़ा।

यदि भगवान राम चाहते, तो वे इस निर्णय का विरोध कर सकते थे। उनके पास शक्ति भी थी और जनसमर्थन भी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने समझा कि जो होनी है, वह होकर रहेगी। इसलिए उन्होंने परिस्थितियों से लड़ने के बजाय धर्म का पालन करना उचित समझा।

वनवास के दौरान भी उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा। माता सीता का हरण हुआ, लक्ष्मण घायल हुए, और रावण जैसे शक्तिशाली शत्रु से युद्ध करना पड़ा। लेकिन भगवान राम ने कभी धैर्य नहीं खोया। उन्होंने हर कठिनाई का सामना सत्य, संयम, साहस और धर्म के साथ किया।

भगवान राम का जीवन हमें सिखाता है कि होनी को टालना संभव नहीं है, लेकिन उसका सामना कैसे करना है, यह हमारे हाथ में है। परिस्थितियाँ हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन उन परिस्थितियों के प्रति हमारा व्यवहार और हमारे कर्म अवश्य हमारे नियंत्रण में होते हैं।

जब जीवन में कठिन समय आए, तो हमें भगवान राम की तरह धैर्य रखना चाहिए। भाग्य को दोष देने के बजाय अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। यही राम का आदर्श है और यही जीवन की सबसे बड़ी सीख है।

होनी अपना कार्य करेगी, लेकिन धर्म, सत्य और पुरुषार्थ हमें उस होनी पर विजय प्राप्त करने की शक्ति देते हैं।

जय श्री राम।

संदीप कुमार दुबे
अध्यक्ष, छठी मैया फाउंडेशन

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