रेखा गुप्ता : परिवार की तरह दिल्ली को सँवारती मुखिया 🌸


🌸 रेखा गुप्ता : परिवार की तरह दिल्ली को सँवारती मुखिया 🌸                   संदीप कुमार दुबे
(एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, चेयरमैन – छठी मइया फ़ाउंडेशन)
दिल्ली सिर्फ इमारतों, सड़कों और बाजारों का शहर नहीं है। यह सपनों, रिश्तों और उम्मीदों का भी घर है। हर नागरिक इस घर का एक सदस्य है। और जब घर को सँवारने वाली मुखिया संवेदनशील हो, दूरदृष्टि रखती हो और सबको साथ लेकर चलने का जज़्बा रखती हो, तभी घर सचमुच खुशहाल बनता है।
आज लोग कह रहे हैं कि रेखा गुप्ता अरविंद से बेहतर मुख्यमंत्री हैं। क्यों?
क्योंकि वह राजनीति को सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारी मानती हैं।
👉 वह दिल्ली को परिवार समझती हैं।
👉 बच्चों की शिक्षा को वह अपने बच्चों का भविष्य मानती हैं।
👉 बुज़ुर्गों की सेवा को अपने माता-पिता की सेवा मानती हैं।
👉 और महिलाओं की सुरक्षा को अपने घर की बेटियों की सुरक्षा मानती हैं।
रेखा गुप्ता ने यह साबित कर दिया है कि नेतृत्व सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि अपनापन और सेवा-भाव से चलता है।
उनकी मुस्कान, उनका सहज स्वभाव और उनकी नीतियाँ, सब मिलकर यही संदेश देती हैं –
"दिल्ली परिवार है, और मैं इसकी बड़ी बेटी होकर हर सदस्य का ख्याल रखूँगी।"
यही कारण है कि लोग भावुक होकर कहते हैं –
"अरविंद ने राजनीति की, लेकिन रेखा गुप्ता ने रिश्ते बनाए।
अरविंद ने मंच से बोला, पर रेखा गुप्ता ने दिल से जोड़ा।
और आज दिल्ली उसी जुड़ाव से आगे बढ़ रही है।"
रेखा गुप्ता का नेतृत्व हमें याद दिलाता है कि राजनीति जब परिवार की देखभाल बन जाए, तो समाज में न सिर्फ विकास होता है, बल्कि विश्वास भी जन्म लेता है।

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