फादर्स डे पर श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता मेरे आदर्श पिता श्री चंद्रगोकुला दुबे जी को समर्पित

फादर्स डे पर श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता

मेरे आदर्श पिता श्री चंद्रगोकुला दुबे जी को समर्पित
पिता केवल एक शब्द नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष, प्रेम, धैर्य, संस्कार और सुरक्षा का दूसरा नाम हैं। मेरे पिता श्री चंद्रगोकुला दुबे जी हमारे परिवार की शक्ति, प्रेरणा और गौरव हैं। उन्होंने अपने जीवन से हमें सिखाया है कि सच्ची सफलता केवल पद, प्रतिष्ठा या धन में नहीं, बल्कि परिवार, समाज और अपने मूल्यों के प्रति जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने में है।

पिताजी अपने माता-पिता स्वर्गीय इंद्रदेव दुबे एवं स्वर्गीय रामपरी देवी के इकलौते पुत्र और अपनी एकमात्र बहन के प्रिय भाई हैं। दादा-दादी के स्नेह, संस्कार और आदर्शों में पले-बढ़े पिताजी ने जीवनभर परिवार, समाज और मानवता की सेवा को अपना धर्म माना। उन्होंने अपने कर्मों से यह सिद्ध किया कि सच्चा सम्मान पद से नहीं, बल्कि सेवा और सदाचार से प्राप्त होता है।

लगभग 20 वर्षों तक अपने गांव के मुखिया के रूप में उन्होंने जनसेवा की मिसाल कायम की। गांव के विकास, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के लिए उनके योगदान को आज भी लोग सम्मानपूर्वक याद करते हैं। उनकी सरलता, ईमानदारी और निष्पक्षता ने उन्हें समाज में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। वर्तमान में वे पेशे से अधिवक्ता (वकील) हैं और न्याय एवं सत्य के मार्ग पर लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

उनका विवाह श्रीमती नीलम दुबे जी से हुआ, जो एक समर्पित एवं सम्मानित अध्यापिका हैं। माता-पिता दोनों ने मिलकर अपने परिवार को शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की मजबूत नींव प्रदान की। उनकी मेहनत और त्याग का ही परिणाम है कि उनका परिवार आज प्रेम, सम्मान और संस्कारों से समृद्ध है।

हम चार भाई-बहन — संदीप कुमार दुबे, बिपिन कुमार दुबे, अंजुला और बिभा  — स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि हमें ऐसे माता-पिता का सान्निध्य प्राप्त हुआ। पिताजी ने हमें सिखाया कि जीवन में ईमानदारी, परिश्रम, धैर्य और सत्य से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं होती। उन्होंने हमेशा हमें सत्य के मार्ग पर चलने, दूसरों का सम्मान करने और कठिन परिस्थितियों में भी कभी हार न मानने की प्रेरणा दी।

पिताजी का जीवन त्याग और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा, भविष्य और खुशियों के लिए हमेशा अपने सुखों का त्याग किया। परिवार की हर आवश्यकता को अपनी आवश्यकता से ऊपर रखा। उन्होंने कभी अपनी परेशानियों को परिवार पर हावी नहीं होने दिया, बल्कि हर परिस्थिति में एक मजबूत स्तंभ बनकर हमारा साथ दिया। उनका स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।

आज जब हम उनके जीवन को देखते हैं, तो महसूस होता है कि उन्होंने केवल एक परिवार का निर्माण नहीं किया, बल्कि संस्कारों की ऐसी अमूल्य विरासत दी है जो आने वाली पीढ़ियों तक हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी। एक आदर्श पुत्र, भाई, पति, पिता, मुखिया और अधिवक्ता के रूप में उन्होंने हर भूमिका को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और गरिमा के साथ निभाया है।

फादर्स डे के इस पावन अवसर पर मैं अपने पूज्य पिताजी को सादर नमन करता हूं और उनके प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। उनके संघर्ष, त्याग, प्रेम और आशीर्वाद के बिना हमारा जीवन अधूरा है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि वे पिताजी को उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और दीर्घायु प्रदान करें तथा उनका स्नेह और आशीर्वाद सदैव हम सभी पर बना रहे।

"पिता वह वटवृक्ष हैं जिनकी छाया में परिवार सुरक्षित रहता है और जिनके संस्कार पीढ़ियों को दिशा देते हैं।"

"पिता का व्यक्तित्व एक ऐसे दीपक की तरह होता है, जो स्वयं जलकर अपने परिवार के जीवन को प्रकाश से भर देता है।"

🌹 फादर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं एवं अपने पूज्य पिताजी को कोटि-कोटि प्रणाम। 🌹

— संदीप कुमार दुबे
अधिवक्ता, 🙏🏻❤️🌹

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