छठ के आदर्शों से होगा सत्य का पुनर्जागरण: संदीप दुबे

 छठ के आदर्शों से होगा सत्य का पुनर्जागरण: संदीप दुबे
नई दिल्ली। छठ पर्व को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन का आदर्श मानते हुए छठी मैया फाउंडेशन के अध्यक्ष संदीप दुबे ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब समाज केवल छठ मनाने तक सीमित न रहे, बल्कि उसके मूल सिद्धांतों को जीवन में उतारकर सत्य की स्थापना करे।
संदीप दुबे ने अपने वक्तव्य में कहा—
“हम केवल छठ मनाएंगे नहीं, बल्कि छठ के आदर्शों को जीवन में उतारकर सत्य की स्थापना करेंगे।”
उन्होंने बताया कि छठ पर्व सत्य, शुद्धता, अनुशासन, त्याग और प्रकृति के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक है। आज के दौर में, जब समाज विभिन्न चुनौतियों और नैतिक संकटों से जूझ रहा है, ऐसे में छठ के आदर्श एक नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि छठ का संदेश केवल व्यक्तिगत पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और वैश्विक परिवर्तन का आधार बन सकता है। छठी मैया फाउंडेशन इस दिशा में “छठ मॉडल” को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न जागरूकता अभियानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक पहल की योजना बना रही है।
फाउंडेशन का उद्देश्य है कि छठ को एक वैश्विक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में स्थापित किया जाए, जिससे पूरी दुनिया भारतीय परंपरा के इस महान संदेश—सत्य, समानता और प्रकृति सम्मान—को अपनाए।
सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छठ के मूल सिद्धांतों को व्यवहार में लाया जाए, तो यह समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
 यह आह्वान केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जो छठ के माध्यम से सत्य और संस्कृति के पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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