भारतीय जनता पार्टी को समझने में मुझे 10 वर्ष लगे

भारतीय जनता पार्टी को समझने में मुझे 10 वर्ष लगे - संदीप

"भाजपा आपके लिए क्या करे, इससे पहले यह सोचिए कि आपने राष्ट्र के लिए क्या किया"
— संदीप कुमार दुबे

भारतीय राजनीति में अनेक दल हैं, अनेक नेता हैं और अनेक विचारधाराएँ हैं। लेकिन यदि कोई मुझसे पूछे कि भारतीय जनता पार्टी को समझने में कितना समय लगा, तो मेरा उत्तर होगा— लगभग 10 वर्ष।

इन 10 वर्षों में मैंने केवल एक राजनीतिक दल को नहीं देखा, बल्कि एक ऐसी विचारधारा को समझने का प्रयास किया जो स्वयं को सत्ता से अधिक राष्ट्र के प्रति समर्पित मानती है। यही विचारधारा भाजपा को अन्य राजनीतिक दलों से अलग पहचान देती है।

आज राजनीति का बड़ा हिस्सा अधिकारों की बात करता है, जबकि भाजपा की मूल सोच कर्तव्य पर बल देती है। अधिकांश लोग पूछते हैं—

"सरकार ने हमारे लिए क्या किया?"

लेकिन भाजपा का कार्यकर्ता स्वयं से पूछता है—

"मैंने अपने राष्ट्र, समाज और संस्कृति के लिए क्या किया?"

यही सोच भाजपा की आत्मा है।

भाजपा को अलग क्या बनाता है?

मेरी समझ में भाजपा केवल चुनाव जीतने का संगठन नहीं है। यह एक वैचारिक आंदोलन है जिसकी जड़ें भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना में निहित हैं।

जहाँ अनेक राजनीतिक दल जाति, क्षेत्र, परिवार या व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द विकसित हुए, वहीं भाजपा का निर्माण एक विचार, एक संगठनात्मक संस्कृति और राष्ट्र प्रथम की भावना पर हुआ। यही कारण है कि भाजपा का कार्यकर्ता किसी पद के बिना भी उतनी ही निष्ठा से कार्य करता है जितना कोई पदाधिकारी।

भाजपा की विचारधारा उसे अन्य राजनीतिक दलों से पाँच प्रमुख आधारों पर अलग करती है—

1. राष्ट्र प्रथम, राजनीति बाद में

भाजपा के लिए सत्ता साध्य नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का साधन है। राष्ट्रहित सर्वोपरि है। व्यक्ति, परिवार, समाज और संगठन सभी राष्ट्र के बाद आते हैं।

2. अधिकार से पहले कर्तव्य

भाजपा की सोच नागरिकों को केवल अधिकार मांगना नहीं सिखाती, बल्कि अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि उसका कार्यकर्ता हर परिस्थिति में सेवा के लिए तैयार रहता है।

3. सेवा ही संगठन

भाजपा का विस्तार केवल राजनीतिक गतिविधियों से नहीं, बल्कि सेवा कार्यों से हुआ है। आपदा, महामारी, बाढ़, भूकंप या सामाजिक संकट— हर परिस्थिति में कार्यकर्ता समाज के बीच दिखाई देता है।

4. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

भाजपा भारत को केवल एक राजनीतिक इकाई नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक राष्ट्र मानती है। भारत की सनातन परंपराएँ, सभ्यता, भाषा, विरासत और राष्ट्रीय प्रतीक उसके लिए गौरव का विषय हैं। "वंदे मातरम्" और "भारत माता की जय" केवल नारे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक हैं।

5. कर्मयोग का मार्ग

भाजपा का कार्यकर्ता भगवद्गीता के इस शाश्वत संदेश को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करता है—

"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"

अर्थात् कर्म करो, फल की चिंता मत करो।

यही कारण है कि लाखों कार्यकर्ता वर्षों तक बिना किसी व्यक्तिगत अपेक्षा के संगठन और समाज के लिए कार्य करते रहते हैं।

भाजपा की सबसे बड़ी शक्ति — उसका कार्यकर्ता

मेरे अनुभव में भाजपा की सबसे बड़ी पूंजी उसके बड़े नेता नहीं, बल्कि उसके करोड़ों समर्पित कार्यकर्ता हैं। वे जानते हैं कि राष्ट्र निर्माण कोई एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि पीढ़ियों का तप, त्याग और परिश्रम मांगता है।

वे यह भी जानते हैं कि हर कार्य का परिणाम तुरंत नहीं मिलता, लेकिन राष्ट्रहित में किया गया कोई भी प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

आज जब राजनीति का बड़ा हिस्सा व्यक्तिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण के आरोपों से घिरा दिखाई देता है, तब भाजपा की संगठनात्मक संस्कृति उसे अलग पहचान प्रदान करती है। यहाँ व्यक्ति से बड़ा संगठन और संगठन से बड़ा राष्ट्र माना जाता है।

मेरा निष्कर्ष

10 वर्षों के अनुभव के बाद मैं यह कह सकता हूँ कि भाजपा को केवल चुनावी परिणामों से नहीं समझा जा सकता। उसे समझने के लिए उसके कार्यकर्ताओं के समर्पण, उसकी संगठनात्मक संस्कृति और उसकी राष्ट्रवादी विचारधारा को समझना आवश्यक है।

भाजपा ने मुझे एक महत्वपूर्ण बात सिखाई—

"राष्ट्र हमें क्या देगा, यह महत्वपूर्ण नहीं है; हम राष्ट्र को क्या देंगे, यह अधिक महत्वपूर्ण है।"

और इसलिए मैं आज भी मानता हूँ—

"भाजपा आपके लिए क्या करे, इससे पहले यह सोचिए कि आपने राष्ट्र के लिए क्या किया।"

वंदे मातरम्।
भारत माता की जय। 🇮🇳

— संदीप कुमार दुबे
     कार्यकर्ता

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