✍️ देव–दानव युद्ध का समय आ गया है


✍️ देव–दानव युद्ध का समय आ गया है
संदीप कुमार दुबे
एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया
चेयरमैन – छठी मइया फ़ाउंडेशन
प्रस्तावना
मानव सभ्यता का इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि जब-जब अधर्म अपनी सीमा लांघता है, तब-तब धर्म की रक्षा हेतु ईश्वरीय शक्ति अवतरित होती है। प्राचीन काल में यह संघर्ष देव और दानवों के बीच हुआ। देवता सत्य, न्याय और मर्यादा का प्रतीक रहे, जबकि दानव अन्याय, पाखंड और अहंकार के प्रतीक। यह संघर्ष केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि मानव जीवन की अनवरत यात्रा है। आज का समय भी उसी बिंदु पर खड़ा है जहाँ हम कह सकते हैं—“देव–दानव युद्ध का समय आ गया है।”
आधुनिक संदर्भ में देव–दानव युद्ध
आज का युग भले ही विज्ञान और तकनीक का युग हो, परंतु सत्य यही है कि अधर्म, पाखंड, हिंसा और भ्रष्टाचार की शक्तियाँ दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं।
समाज में असत्य का बोलबाला है।
परिवारों में विश्वास का संकट है।
राजनीति में नैतिकता का पतन है।
धर्म और आस्था को भी स्वार्थ का साधन बनाया जा रहा है।
यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसे दानवों का प्रभुत्व बढ़ने पर देवताओं का अस्तित्व संकट में पड़ा था। आज भी यह संघर्ष जारी है, अंतर बस इतना है कि यह युद्ध शस्त्रों से नहीं बल्कि विचारों, संस्कारों और कर्मों के स्तर पर लड़ा जा रहा है।
देवत्व बनाम दानवत्व – मानव मन का द्वंद्व
हर मनुष्य के भीतर देवत्व और दानवत्व दोनों प्रवृत्तियाँ रहती हैं।
जब हम सत्य, करुणा, सेवा और त्याग का पालन करते हैं, तब हम देवत्व को पोषित करते हैं।
जब हम छल, अहंकार, लोभ और अन्याय का सहारा लेते हैं, तब दानवत्व प्रबल होता है।
इसलिए आज का युद्ध बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक है। हमें अपने भीतर बसे दानव को पराजित कर देवत्व को जाग्रत करना है। यही सच्चा धर्म-युद्ध है।
छठी मइया की भूमिका
भारतीय संस्कृति में छठ पर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म-स्थापना का संकल्प है।
यह पर्व सत्य, संयम और तपस्या की साधना है।
इसमें सूर्योपासना द्वारा जीवन की ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त की जाती है।
छठी मइया मानवता को यह संदेश देती हैं कि धर्मपक्ष कभी अकेला नहीं पड़ता—सत्य के साथ सदैव ईश्वरीय शक्ति खड़ी होती है।
आज जब समाज में अधर्म की अंधेरी छाया फैल रही है, तब छठी मइया ही वह दिव्य शक्ति हैं जो देवताओं का साथ देकर धर्म की पुनः स्थापना करेंगी।
धर्म-स्थापना का आह्वान
आज की सबसे बड़ी आवश्यकता यही है कि हम धर्म की पुनः स्थापना करें।
घर-घर में सत्य और सदाचार का दीप प्रज्वलित करें।
समाज से पाखंड, हिंसा और अन्याय को मिटाने का प्रयास करें।
राजनीति और शासन में नैतिकता और पारदर्शिता को महत्व दें।
अगली पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और सत्य का वास्तविक पाठ पढ़ाएँ।
यह कार्य केवल किसी एक व्यक्ति, संगठन या संप्रदाय का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता का कर्तव्य है।
निष्कर्ष
आज का समय हमें पुकार रहा है—“देव–दानव युद्ध का समय आ गया है।”
यह युद्ध किसी रणभूमि में नहीं, बल्कि हमारे घरों, समाजों और मनों में लड़ा जाएगा। यह संघर्ष सत्य और असत्य, धर्म और अधर्म, न्याय और अन्याय के बीच है।
विश्वास रखिए, अंतिम विजय धर्म की ही होगी।
छठी मइया का आशीर्वाद देवताओं के साथ है।
अधर्म की रात चाहे कितनी भी लंबी हो, धर्म का सूर्योदय निश्चित है।
🌞 जय छठी मइया! 🌞
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