मोदी युग : राष्ट्रवाद, निर्णायक नेतृत्व और वैश्विक भारत
लेखक : संदीप कुमार दुबे
(एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया एवं चेयरमैन, छठी मइया फाउंडेशन)
प्रस्तावना
2014 के बाद भारतीय राजनीति ने एक ऐसा दौर देखा जिसने लोकतंत्र, समाज और वैश्विक कूटनीति की दिशा ही बदल दी। नरेंद्र मोदी का उदय केवल एक नेता का उभार नहीं बल्कि भारतीय राजनीति की परिभाषा का पुनर्लेखन था। मोदी युग की पहचान तीन आधार स्तंभों से होती है – राष्ट्रवाद, निर्णायक नेतृत्व और वैश्विक भारत।
1. मोदी युग और राष्ट्रवाद
मोदी युग में राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक नारा नहीं रहा बल्कि एक जीवंत भावनात्मक शक्ति बन गया।
सेना के सम्मान, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसी कार्रवाइयों ने जनता के मन में गौरव का भाव भरा।
धारा 370 का निरसन, राम मंदिर निर्माण, काशी–विश्वनाथ कॉरिडोर और योग दिवस जैसे कदमों ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जन–जन तक पहुँचाया।
“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का नारा राष्ट्रवाद को समावेशी रूप देता है।
👉 राष्ट्रवाद अब केवल सीमाओं की सुरक्षा नहीं बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और विकास का साझा संकल्प बन गया है।
2. मोदी युग और निर्णायक नेतृत्व
मोदी युग की सबसे बड़ी विशेषता निर्णायक नेतृत्व है।
नोटबंदी, जीएसटी, तीन तलाक कानून, धारा 370 निरसन और सीएए जैसे कदमों ने दिखाया कि मोदी कठिन से कठिन निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते।
मोदी की राजनीति व्यक्ति–आधारित है, जहाँ चुनाव का विमर्श “जनता बनाम मोदी” बन गया।
विपक्ष की कमजोर स्थिति और जनता का विश्वास मिलकर मोदी को भारत का सबसे प्रभावशाली नेता बनाते हैं।
संकट के समय (कोविड–19 महामारी, सीमा पर तनाव) मोदी ने जनता से सीधा संवाद किया और नेतृत्व का भाव प्रकट किया।
👉 मोदी युग में भारत ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में भी निर्णायक और दृढ़ नेतृत्व संभव है।
3. मोदी युग और वैश्विक भारत
मोदी युग में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान बनाई।
अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और खाड़ी देशों के साथ मजबूत संबंध।
“वैक्सीन मैत्री” ने भारत को कोविड–19 महामारी में मानवता का नेतृत्वकर्ता सिद्ध किया।
G20 की अध्यक्षता ने भारत को वैश्विक एजेंडा–निर्माता के रूप में स्थापित किया।
योग दिवस (21 जून) ने भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर मान्यता दिलाई।
प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव ने भारत को विश्व–भारतीय समुदाय का नेतृत्वकर्ता बनाया।
👉 मोदी युग ने भारत को अनुसरण करने वाला राष्ट्र नहीं बल्कि दिशा देने वाला राष्ट्र बना दिया।
4. मोदी युग की चुनौतियाँ
बेरोज़गारी और महंगाई।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर उठते प्रश्न।
सामाजिक–सांप्रदायिक तनाव पर आलोचना।
आर्थिक असमानता और कृषि संकट।
👉 फिर भी, इन चुनौतियों के बीच मोदी युग का प्रभाव इतना प्रबल है कि यह भारतीय राजनीति का सबसे निर्णायक कालखंड बन गया है।
निष्कर्ष
“मोदी युग : राष्ट्रवाद, निर्णायक नेतृत्व और वैश्विक भारत” – यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं बल्कि भारत की नई पहचान है।
राष्ट्रवाद ने भारत को आत्मविश्वासी बनाया।
निर्णायक नेतृत्व ने जटिल निर्णयों को संभव किया।
वैश्विक भारत ने भारत को विश्व–मंच पर अग्रणी बना दिया।
आने वाली पीढ़ियाँ मोदी युग को उस समय के रूप में याद करेंगी जब भारत ने अपनी अस्मिता, संस्कृति और शक्ति को पुनः स्थापित कर विश्व–समाज में निर्णायक भूमिका निभाई।
Comments
Post a Comment