सतीश उपाध्याय : रामभक्ति और सेवाभाव


सतीश उपाध्याय : रामभक्ति और सेवाभाव 
भारतीय संस्कृति में जब भी धर्म और सेवा की चर्चा होती है, वहाँ भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी का नाम सबसे पहले आता है। इन्हीं मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाने वाले एक नाम हैं – सतीश उपाध्याय।
सतीश उपाध्याय केवल राजनीति के नेता नहीं हैं, वे जनता के सेवक हैं। वे भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं और अपने जीवन को हनुमान जी की असीम शक्ति, निष्ठा और सेवा भाव से प्रेरित मानते हैं। यही कारण है कि उनके सार्वजनिक कार्यों में सेवा, त्याग और निस्वार्थ समर्पण की झलक साफ दिखाई देती है।
हनुमान भक्ति से सेवा का संकल्प
सतीश उपाध्याय मानते हैं कि “हनुमान जी ने रामजी की सेवा बिना किसी स्वार्थ के की। वही भाव मेरे जीवन का मार्गदर्शन करता है।”
इसी कारण वे राजनीति को सेवा का साधन मानते हैं, न कि सत्ता का माध्यम।
चाहे ग़रीबों तक सरकारी योजनाएँ पहुँचाना हो, आपदा के समय राहत कार्य करना हो या समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय दिलाना – हर जगह वे स्वयं आगे बढ़कर कार्य करते हैं।
रामलीला महोत्सव 2025 – धर्म और संस्कृति का संगम
इसी धार्मिक और सांस्कृतिक भावना का उदाहरण हाल ही में देखने को मिला।
 माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी से उनके कार्यालय में भेंट और उन्हें श्रीराम धार्मिक रामलीला समिति (पंजी.) द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव 2025 में पधारने का सादर निमंत्रण ।
मुख्यमंत्री महोदया ने स्नेहपूर्वक इस आमंत्रण को स्वीकार किया और समिति के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर समिति के चेयरमैन के रूप में सतीश उपाध्याय स्वयं उपस्थित रहे।
साथ ही वाइस चेयरमैन विधायक श्रीमती शिखा राय जी, अध्यक्ष श्री भरत जैन जी, और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
जनता के दिलों में विश्वास
जनता उन्हें केवल नेता नहीं, बल्कि अपना भाई, बेटा और सेवक मानती है।
उनकी सरलता, सहजता और कार्य के प्रति समर्पण ने उन्हें हर वर्ग में लोकप्रिय बनाया है।
दिल्ली के लोग मानते हैं कि अगर दिल्ली में “रामराज्य” की झलक कहीं दिखती है, तो वह सतीश उपाध्याय के विचार और कार्यशैली में दिखती है।
धर्म और राजनीति का संतुलन
सतीश उपाध्याय रामलीला, धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक मंचों में सक्रिय रहते हैं।
वे मानते हैं कि समाज तभी मजबूत होगा जब धर्म, संस्कृति और आधुनिक विकास तीनों साथ चलेंगे।
उनका व्यक्तित्व इस संतुलन का प्रत्यक्ष उदाहरण है – एक ओर रामभक्ति और हनुमान श्रद्धा, तो दूसरी ओर जनसेवा और विकास का संकल्प।
सच्चे सेवक की पहचान
आज हर गली और मोहल्ले में यह स्वर गूंज रहा है –
👉 “राम के भक्त, हनुमान के साधक – सतीश उपाध्याय ही जनता के सच्चे सेवक और सच्चे नेता हैं।”

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