छठ पर्व: अब वैश्विक धरोहर बनने की ओर
छठ पर्व: अब वैश्विक धरोहर बनने की ओर
भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएँ इतनी समृद्ध हैं कि वे समय-समय पर पूरी दुनिया को आकर्षित करती रही हैं। योग, आयुर्वेद, भारतीय संगीत और शास्त्रीय नृत्य इसकी प्रमुख मिसालें हैं। इन्हीं में से एक सबसे पवित्र और लोकआस्था से जुड़ा पर्व है छठ, जिसे अब UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल करने की दिशा में पहल शुरू हो चुकी है।
छठ पर्व का वैशिष्ट्य
छठ कोई साधारण धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह एक ऐसा लोकपर्व है जिसमें –
सूर्योपासना होती है, जो जीवन और ऊर्जा के मूल स्रोत हैं।
प्रकृति संरक्षण का संदेश मिलता है, क्योंकि यह पर्व नदियों, तालाबों और प्राकृतिक जलाशयों के किनारे होता है।
स्वच्छता और अनुशासन का महत्व है; छठ में पवित्रता और साफ-सफाई सर्वोपरि होती है।
समानता और सामूहिकता का भाव है; गरीब-अमीर, ऊँच-नीच, महिला-पुरुष सब एक साथ खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
नारी शक्ति और तपस्या का परिचय है; व्रती प्रायः महिलाएँ होती हैं, जो परिवार और समाज की सुख-समृद्धि के लिए कठिन तप करती हैं।
UNESCO में शामिल होने का महत्व
अगर छठ पर्व को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया जाता है तो इसके गहरे मायने होंगे –
वैश्विक पहचान – छठ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और सम्मान मिलेगा।
संरक्षण और संवर्धन – छठ के गीत, लोककथाएँ और पारंपरिक विधियाँ दस्तावेज़ीकृत होकर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहेंगी।
भारत की सांस्कृतिक शक्ति (Soft Power) – जैसे योग ने भारत को पूरी दुनिया में पहचान दी, वैसे ही छठ भी भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मज़बूत करेगा।
पर्यटन और आर्थिक विकास – छठ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन बढ़ेगा, जिससे बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।
वैश्विक संदेश – सूर्योपासना, प्रकृति संरक्षण और सामूहिक एकता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचेगा।
Chhathi Maiya Foundation, जिसकी स्थापना छठ पर्व को वैश्विक पहचान दिलाने और इसे सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित करने के लिए की गई है, इस दिशा में सक्रिय रूप से प्रयासरत है।
छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानव और प्रकृति के सामंजस्य की सबसे सुंदर मिसाल है। इसका UNESCO की धरोहर सूची में शामिल होना न केवल भारत के लिए गौरव की बात होगी, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक प्रेरणा बनेगा। छठ का वैश्विक उत्सव मानवता को यह संदेश देगा कि अगर हम प्रकृति और ऊर्जा के स्रोतों का सम्मान करें तो जीवन में संतुलन और समृद्धि निश्चित है।
✍️ लेखक
Sandeep Kumar Dubey
Advocate, Supreme Court of India
Chairman, Chhathi Maiya Foundation
Comments
Post a Comment