सत्य ईश्वर का सबसे निकट मार्ग : सन्दीप दुबे
सत्य का मार्ग — अमरत्व का द्वार** लेखक: सन्दीप दुबे भूमिका : सत्य की पहली पुकार मनुष्य का जीवन बाहर से जितना बड़ा दिखता है, अंदर से उतना ही छोटा, नाजुक और प्रश्नों से भरा होता है। हर व्यक्ति, चाहे वह राजपथ पर बैठा शासक हो या रोज़ी-रोटी कमाने वाला साधारण व्यक्ति, कभी न कभी रुककर स्वयं से पूछता है— “मैं सही क्या कर रहा हूँ?” “मेरा मार्ग क्या है?” “जीवन का सत्य क्या है?” यह प्रश्न जब उठता है, तो समझिए कि यह साधारण प्रश्न नहीं— यह आत्मा की जागृति है। यह सत्य की पहली पुकार है। जीवन में सत्य खोजने की इच्छा का जन्म ही इस बात का संकेत है कि मनुष्य अब बाहरी चमकदमक से आगे बढ़कर अंतर की रोशनी को खोजने के लिए तैयार है। सत्य क्यों इतना आवश्यक है? सत्य मानव जीवन की साँस है। सत्य वह है जो मनुष्य को भीतर से सुरक्षित महसूस कराता है। क्योंकि— सत्य में दंभ नहीं सत्य में भय नहीं सत्य में छुपाव नहीं सत्य में बोझ नहीं और सबसे बड़ा—सत्य में कपट नहीं झूठ पर खड़ा जीवन उस दीवार की तरह है जिसमें हल्की-सी आँधी उसे गिरा देती है। सत्य पर खड़ा जीवन उस पर्वत की तरह है जिसे हज...