“मुझे ऐसे युवा चाहिए जिनमें लोहे की तरह मजबूत इच्छाशक्ति हो।”
युवा दिवस पर संकल्प : स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत
एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
Chairman, छठी मैया फाउंडेशन
स्वामी विवेकानंद जयंती पर मनाया जाने वाला युवा दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को जगाने का अवसर है। विवेकानंद जी ने कहा था – “मुझे ऐसे युवा चाहिए जिनमें लोहे की तरह मजबूत इच्छाशक्ति हो।” उनका यह संदेश आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है, जब भारत विश्व मंच पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और चुनौतियाँ भी उतनी ही जटिल होती जा रही हैं।
भारत को युद्ध नहीं चाहिए, पर भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। क्योंकि इतिहास सिखाता है कि युद्ध कभी भी थोपा जा सकता है। इसलिए हमारी तैयारी आक्रामकता के लिए नहीं, आत्मरक्षा, स्वाभिमान और शांति की रक्षा के लिए होनी चाहिए। यह तैयारी केवल सेना की नहीं, पूरे समाज और विशेषकर युवाओं की होनी चाहिए।
युवा केवल देश की शक्ति नहीं, बल्कि उसकी ढाल और उसकी दिशा दोनों हैं।
युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता,
वह विचारों में, तकनीक में, अर्थव्यवस्था में और चरित्र में भी लड़ा जाता है।
यदि हमारा युवा जागरूक, अनुशासित और संस्कारवान है,
तो भारत को कोई कमजोर नहीं कर सकता।
स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, चरित्र और सेवा का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा था –
“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।”
यही मंत्र आज भारत के हर युवा को अपने जीवन का मूल सिद्धांत बनाना चाहिए।
छठी मैया फाउंडेशन के माध्यम से हमारा विश्वास है कि
संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।
जैसे छठ हमें संयम, समर्पण और अनुशासन सिखाता है,
वैसे ही विवेकानंद हमें साहस, आत्मबल और राष्ट्रसेवा का मार्ग दिखाते हैं।
आज का युवा यदि
मजबूत चरित्र,
स्पष्ट सोच,
राष्ट्र के प्रति निष्ठा
और परिवार व समाज के प्रति जिम्मेदारी को अपनाता है,
तो भारत को किसी भी युद्ध, किसी भी संकट और किसी भी षड्यंत्र से डरने की आवश्यकता नहीं होगी।
युवा दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि –
हम भारत को केवल शक्तिशाली ही नहीं,
बल्कि चरित्रवान, संस्कारवान और विश्व के लिए प्रेरणा बनने वाला राष्ट्र बनाएँगे।
यही स्वामी विवेकानंद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
यही युवा दिवस का वास्तविक अर्थ होगा।
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