बिहारवासी सूर्य के समान हैं
बिहारवासी सूर्य के समान हैं —
जिस प्रकार सूर्य की किरणें धरती के हर हिस्से को छूती हैं,
उसी प्रकार बिहार का पुरुषार्थ और प्रतिभा भी
दुनिया के हर कोने में अपनी छाप छोड़ चुका है।
जहाँ भी श्रम है — वहाँ बिहारी है।
जहाँ भी चमक है — वहाँ उसका योगदान है।
पंजाब-हरियाणा के खेतों में घुटने भर कीचड़ में धान रोपने वाले हाथ भी मेरे हैं,
और दिल्ली के मंत्रालय में धान का समर्थन मूल्य तय करने वाली कलम भी मेरी है।
एक मैं निर्णय लेता हूँ कि देश में पर्याप्त अनाज है,
या आयात करना पड़ेगा।
मैं पटना से पेरिस तक,
कोकड़ाझाड़ से कैलिफ़ोर्निया तक —
हर धरातल और हर आकाश में विद्यमान हूँ।
मैं रेलवे ट्रैक की सुरक्षा जांच करता हूँ,
और 35,000 फीट की ऊँचाई पर विमान के कॉकपिट में भी बैठा हूँ।
मैं मुंबई की सड़कों पर दौड़ती टैक्सी भी चलाता हूँ,
और दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक के आख़िरी कमरे में
नीतियों की धार को अंतिम रूप भी देता हूँ।
गगनचुंबी इमारतें हों या अनाज से भरे विशाल गोदाम —
नींव से लेकर शिखर तक
मेरे हाथों की मेहनत बसी है।
अर्थशास्त्र की नीति —
राजनीति का सिद्धांत —
मैंने ही लिखा था।
और मैं ही आज भी लिख रहा हूँ।
आप मेरे “अस्त” हो जाने का भ्रम पाले हुए हैं…
जबकि मैं आज भी आपके शहरों में
आपके लिए नीतियाँ बना रहा हूँ।
सूर्य मुझमें है… और मैं सूर्य में हूँ।
मैं कभी अस्त नहीं हो सकता —
क्योंकि मैं निस्वार्थ कर्मशील इंसान हूँ।
मैं बिहारी हूँ —
और सूर्य का उत्तराधिकारी हूँ।
शुभकामनाएँ।
— Sandeep Dubey (Writer)
Comments
Post a Comment