उत्तराखण्ड के 25 वर्ष : पर्वतीय–मैदानी एकता और नये मॉडल की आवश्यकता
यह वर्ष केवल उत्सव का नहीं — मूल्यांकन का भी वर्ष है।
इन 25 वर्षों ने हमें यह सिखाया है कि
पहाड़ और मैदान को अलग–अलग देखने की पुरानी मानसिकता
अब बदलनी होगी।
पर्वतीय–मैदानी एकता ही भविष्य की असली विकास–दिशा है।
पहाड़ की संस्कृति, पवित्रता और प्रकृति–संवेदनशील जीवनशैली
और मैदान की आर्थिक ऊर्जा, संसाधन और उत्पादन क्षमता —
जब एक साथ मिलेंगी
तभी उत्तराखण्ड अपनी अगली छलाँग लगा पाएगा।
इसलिए आज आवश्यकता है —
विचारों की एकता, संवेदनाओं की साझेदारी
और लोगों को जोड़ने वाली नयी विकास दृष्टि की।
Adv. P. K. Agarwal द्वारा चलाया गया अभियान
इसी नए विचार को आधार देकर आगे बढ़ रहा है।
जन–सहभागिता बढ़ रही है।
और यह अब स्पष्ट हो रहा है कि जनता भी
अलगाव नहीं — सहयोग और एकता चाहती है।
और यही कारण है कि —
ताकि इस ध्येय को –
“जन–विश्वास + जन–जुड़ाव = विकास”
की दिशा में स्पष्ट संदेश दिया जा सके।
आज उत्तराखण्ड को नये विचार नहीं,
नयी कार्य–दृष्टि की आवश्यकता है।
और इस नयी दृष्टि की मूल पंक्ति यही है —
“पर्वतीय–मैदानी एकता — यही नया विकास–मॉडल है।”
— Sandeep Dubey
Advocate, Supreme Court of India
Chairman, Chhathi Maiya Foundation
(Dehradun — 09 November 2025)
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