संघ शताब्दी वर्ष के मूल मंत्र -निस्वार्थ सेवा ही सबसे श्रेष्ठ पूजा है।


🌸
🌸
आज का दिन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सत्य की असत्य पर विजय, धर्म की अधर्म पर विजय और प्रकाश की अंधकार पर विजय का स्मरण है।
विजयादशमी हमें यह प्रेरणा देती है कि जीवन की हर चुनौती और अन्याय के सामने यदि हम सत्य, साहस और धैर्य के साथ खड़े हों, तो विजय निश्चित होती है।
संघ के लिए विजयादशमी का विशेष महत्व है। इसी दिन डॉ. हेडगेवार जी ने 1925 में संगठन का शुभारंभ किया। आज जब हम शताब्दी वर्ष मना रहे हैं, तो यह उत्सव और भी अधिक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बन गया है।
हम सबने अपनी गणवेश को पूर्ण कर ली है, और जब परिवार सहित उत्सव स्थल पर पहुँचते हैं, तो यह केवल उपस्थिति नहीं होती, बल्कि राष्ट्रसेवा का सार्वजनिक उद्घोष होता है।
यह अवसर हमें यह स्मरण कराता है कि –
अन्याय और अधर्म चाहे कितना भी बलवान क्यों न हो, विजय सदैव सत्य और धर्म की होती है।
अनुशासन, संगठन और सेवा से ही राष्ट्र का उत्थान संभव है।
प्रत्येक स्वयंसेवक समाज का दीपक है, जो अंधकार को प्रकाश में बदलने का कार्य करता है।
🌸 संघ शताब्दी वर्ष के मूल मंत्र 🌸

संघ का जीवन दर्शन यही है कि राष्ट्र ही सर्वोपरि है।
भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि एक जीवंत राष्ट्र-पुरुष है।
इसमें हमारी संस्कृति, परंपराएँ, आस्था और इतिहास धड़कते हैं।
अतः राष्ट्र की रक्षा करना ही हमारी पूजा है और राष्ट्र के उत्थान के लिए जीना ही सच्चा धर्म है।

व्यक्ति कितना भी महान क्यों न हो, उसकी शक्ति सीमित रहती है।
लेकिन जब पूरा समाज एकजुट होता है, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
संघ का सिद्धांत है – "संगठन ही शक्ति है।"
इसीलिए समाज ही हमारी वास्तविक शक्ति है।
मानव जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है निस्वार्थ सेवा।
सेवा केवल मदद नहीं, बल्कि समाज के दुःख को अपना दुःख मानकर उसे दूर करने का प्रयास है।
संघ के स्वयंसेवक शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, ग्राम विकास, आपदा राहत और संस्कार निर्माण में सेवा कार्य करते हैं।
इसीलिए संघ जीवन का मूल मंत्र है – सेवा ही सर्वोच्च साधना है।

संघ शताब्दी वर्ष हमें यह तीन दिव्य संदेश देता है—
👉 राष्ट्र ही परम देवता है → राष्ट्रभक्ति से बड़ा कोई धर्म नहीं।
👉 समाज ही शक्ति है → एकता और संगठन से ही भारत विश्वगुरु बनेगा।
👉 सेवा ही जीवन मंत्र है → निस्वार्थ सेवा ही सबसे श्रेष्ठ पूजा है।
🌺 आइए, इस विजयादशमी और संघ शताब्दी वर्ष पर इन तीनों मंत्रों को जीवन का आधार बनाकर,
हम सब मिलकर भारत माता को पुनः विश्व में सर्वोच्च स्थान दिलाएँ।
🕉️ भारत माता की जय!
🙏 जय जय श्रीराम!
🙏 वंदे मातरम्!
✍️ संदीप कुमार दुबे
Advocate, Supreme Court of India
Chairman, Chhathi Maiya Foundation.

Comments

Popular posts from this blog

भारत की न्यायपालिका में `Robo Judge`

रेखा गुप्ता : परिवार की तरह दिल्ली को सँवारती मुखिया 🌸

भगवान श्रीराम एवं माता सीता द्वारा छठ