न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला : लखनऊ विश्वविद्यालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक का गौरवपूर्ण सफर
लखनऊ विश्वविद्यालय की विधि शिक्षा (LLB Hons) के दिनों की स्मृतियाँ आज फिर ताज़ा हो उठीं, जब मेरे साथी और सहपाठी श्री राजीव लोचन शुक्ला ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण किया। यह केवल उनके लिए नहीं, बल्कि समस्त विधिजगत और हम जैसे उनके सहपाठियों के लिए भी अपार गर्व का क्षण है।
विद्यार्थी जीवन से लेकर अधिवक्ता तक
लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि विभाग में साथ पढ़ते हुए ही यह साफ झलकता था कि श्री शुक्ला जी की कानून पर गहरी पकड़ और स्पष्ट दृष्टिकोण उन्हें अन्य से अलग बनाता है। उनकी तार्किक क्षमता और संवेदनशील विचारधारा उन्हें सदैव न्याय और सच्चाई की ओर अग्रसर करती रही।
एक कुशल अधिवक्ता
अधिवक्ता के रूप में उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में उल्लेखनीय कार्य किया। न केवल उन्होंने अपने मुवक्किलों को न्याय दिलाने का प्रयास किया, बल्कि न्यायालय में अपनी मर्यादित भाषा, सशक्त तर्क और विधिक समझ से सभी का विश्वास अर्जित किया। मेरी उनसे घर पर हुई मुलाक़ात ने यह अनुभव कराया कि वे सरलता और विनम्रता से परिपूर्ण व्यक्ति हैं।
न्यायिक पथ पर नई यात्रा
आज जब वे न्यायाधीश के पद पर आसीन हुए हैं, तो यह निश्चय ही न्यायपालिका के लिए एक सुखद और शुभ संकेत है। उनकी कानून की समझ, संवैधानिक मूल्यों के प्रति आस्था और निष्पक्ष दृष्टिकोण न्याय प्रणाली को नई दिशा देगा।
मेरी शुभकामनाएँ
मैं अपने हृदय की गहराइयों से माननीय न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला जी को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे विश्वास है कि वे न केवल न्यायपालिका की गरिमा को बढ़ाएँगे, बल्कि आने वाले वर्षों में समाज और राष्ट्र के लिए न्याय व सत्य के प्रतीक बनकर उभरेंगे।
– संदीप कुमार दुबे
अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय
अध्यक्ष, छठी मैया फाउंडेशन
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