युवा आंदोलन नहीं, युवा राष्ट्र निर्माण – यही असली क्रांति है

✍️ लेख
युवा आंदोलन नहीं, युवा राष्ट्र निर्माण – यही असली क्रांति है
लेखक : संदीप कुमार दुबे
आज नेपाल के हालात केवल एक देश की कहानी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की युवा पीढ़ी के लिए एक चेतावनी और प्रेरणा हैं। जब भ्रष्टाचारियों का सम्मान होने लगे, पढ़े-लिखे और काबिल लोग हाशिए पर धकेल दिए जाएँ, परिवारवाद और गुटबाज़ी न्यायपालिका और राजनीति पर हावी हो जाए और जनता मौन हो, तो स्वाभाविक रूप से आंदोलन खड़े होते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या आंदोलन ही अंतिम लक्ष्य है या आंदोलन से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण असली क्रांति है?
✦ आंदोलन की सीमाएँ
इतिहास गवाह है कि आंदोलन व्यवस्था को हिला सकते हैं, लेकिन यदि उनमें स्पष्ट दिशा न हो तो वे केवल अराजकता लाते हैं। टूटे हुए काँच से नए सपनों की इमारत नहीं बनती। यदि आंदोलन केवल गुस्से का विस्फोट बनकर रह जाए, तो उससे राष्ट्र को नुकसान पहुँचता है।
✦ राष्ट्र निर्माण की राह
युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी है – आंदोलन को निर्माण की शक्ति में बदलना।
भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने का संकल्प।
परिवारवाद और जातिवाद से परे नई राजनीति का विकल्प।
प्रतिभा, ईमानदारी और योग्यता पर आधारित नेतृत्व।
शिक्षा और तकनीक के माध्यम से समाज का सशक्तिकरण।
और सबसे महत्वपूर्ण, हर कदम पर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना।
✦ असली क्रांति क्या है?
क्रांति का मतलब केवल सत्ता पलटना नहीं होता। असली क्रांति वह है, जो एक समाज को नई दिशा दे, आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य सौंपे और राष्ट्र को गर्व करने लायक स्थिति में खड़ा करे। यही कारण है कि आज का नारा होना चाहिए –
“युवा आंदोलन नहीं, युवा राष्ट्र निर्माण – यही असली क्रांति है।”
✦ निष्कर्ष
नेपाल के युवा इतिहास के मोड़ पर खड़े हैं। वे चाहे तो केवल आंदोलनकारी कहलाएँगे, या वे चाहे तो राष्ट्र निर्माता के रूप में आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनेंगे। असली चुनाव उनके हाथ में है।
 

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