संघ के 100 वर्ष : राष्ट्र निर्माण की अखंड यात्रा 🌿
✍️ लेखक – संदीप कुमार दुबे
आज जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100 वर्ष पूरे कर रहा है, तो यह प्रश्न हर मन में उठना स्वाभाविक है कि “संघ आखिर करता क्या है?”
संघ का कार्य – राष्ट्र के लिए जीवन मूल्य गढ़ना
संघ का कार्य किसी राजनीतिक संगठन जैसा नहीं है। यह समाज को संगठित करने और व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करने की महान परंपरा है।
संघ व्यक्ति को अनुशासन, समय–पालन और संगठन–भावना सिखाता है।
यह हमें बताता है कि राष्ट्र की सेवा ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।
संघ की शाखा में खेल, व्यायाम, गीत, चर्चा और सेवा कार्यों के माध्यम से व्यक्तित्व का विकास होता है।
शाखा – जीवन का संस्कार केंद्र
संघ की शाखा केवल एक घंटे का कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यक्ति–निर्माण की प्रयोगशाला है। यहाँ बच्चा
👉 अपने अंदर आत्मविश्वास जगाता है,
👉 देशभक्ति और समाजसेवा का भाव सीखता है,
👉 नेतृत्व और संगठन–कौशल विकसित करता है।
शाखा में जाने वाला बालक धीरे–धीरे एक ऐसा नागरिक बनता है,
जो समाज, धर्म और राष्ट्र के प्रति निष्ठावान, जिम्मेदार और त्यागी होता है।
100 वर्षों की उपलब्धि
पिछले सौ वर्षों में संघ ने
करोड़ों स्वयंसेवक तैयार किए,
सेवा–कार्य, आपदा–सहायता और शिक्षा–संस्कार का विशाल तंत्र खड़ा किया,
समाज के प्रत्येक वर्ग में राष्ट्रभावना और सांस्कृतिक गौरव जगाया।
आज संघ केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और विचारधारा का ध्वजवाहक बन चुका है।
क्यों भेजें अपने बच्चों को शाखा में?
आज की पीढ़ी मोबाइल और भौतिक सुख–सुविधाओं में उलझी हुई है। ऐसे समय में यदि हमें अपने बच्चों को
संस्कारित,
अनुशासित,
और राष्ट्रभक्त नागरिक बनाना है,
तो उन्हें संघ की शाखा में भेजना आवश्यक है। यही आने वाली सदी के भारत की सबसे बड़ी पूंजी होगी।
✍️ निष्कर्ष
संघ के 100 वर्ष केवल एक संगठन की यात्रा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को जागृत करने का सतत प्रयास है।
इसलिए मैं सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि—
👉 अपने बच्चों को अवश्य संघ की शाखा में भेजें।
👉 यह केवल शाखा नहीं, बल्कि जीवन और राष्ट्र निर्माण का विद्यालय है।
🌸 संदीप कुमार दुबे
अधिवक्ता, उच्चतम न्यायालय
अध्यक्ष, छठी मइया फाउंडेशन
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