छठ महा पुराण – आदि-खण्ड, प्रथम अध्याय Final 1

🌟 छठ महा पुराण – आदि-खण्ड, प्रथम अध्याय

(छठ देवी के प्रादुर्भाव एवं ब्रह्मादि ऋषियों का प्रश्न)


श्लोक १

संस्कृत:
ॐ श्रीगणेशाय नमः। ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः। ॐ भास्कराय नमः।

हिन्दी:
श्री गणेश, माता पार्वती के पुत्र तथा सम्पूर्ण विघ्नों के नाशक का स्मरण कर, सूर्यदेव को प्रणाम करते हुए इस छठ महापुराण का आरम्भ किया जाता है।

English:
Salutations to Lord Ganesha, son of Goddess Parvati and remover of all obstacles, and to the Sun God. Thus begins the sacred Chhath Mahapuran.

Bhojpuri:
गणेश जी, जे पार्वती माई के बेटा आ सभ विघ्न के नाश करे वाला बाड़न, उनकरा के याद क के, आ सूर्य भगवान के प्रणाम क के, ई छठ महापुराण के शुरुआत होखत बा।


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श्लोक २

संस्कृत:
ब्रह्मा-विष्णु-हरैः पूर्वं कृतं छठ्याः प्रणामकम्।
तच्च पुराणमादाय कथयामि शुभं शुभम्॥

हिन्दी:
ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने पूर्वकाल में जो छठ्याः प्रणाम किया था, उसी दिव्य पुराण को आधार बनाकर अब मैं यह शुभ कथा कहता हूँ।

English:
The hymn once offered by Brahma, Vishnu, and Mahesh forms the basis of this Purana, from which I narrate the auspicious tale.

Bhojpuri:
ब्रह्मा, विष्णु आ महेश पहिले जे छठ देवी के प्रणाम कइले रहलें, ओकरा पर आधारित ई पुराण के आधार मान के हम अब ई शुभ कथा बतावतानी।


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श्लोक ३

संस्कृत:
कृतयुगे महर्षिभिः पृष्टो ब्रह्मा महाद्युतिः।
छठदेव्याः प्रभावं च जन्मस्थानं च कीर्तयत्॥

हिन्दी:
कृतयुग में महर्षियों ने तेजस्वी ब्रह्माजी से पूछा – “हे देव! कृपा कर छठदेवी का प्रभाव और जन्मस्थान बताइए।”

English:
In Krita Yuga, sages asked Brahma: “O Lord, please describe the power and origin of Chhath Devi.”

Bhojpuri:
कृतयुग में महर्षि लोग ब्रह्मा से पूछलें – “हे देव! छठ देवी के महिमा आ जन्मस्थान के बारे में बताईं।”


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श्लोक ४

संस्कृत:
तेषां प्रश्नं समाकर्ण्य ब्रह्मा सर्वज्ञ उवाच।
शृणुत मुनयः सर्वे छठदेव्याः परं महत्॥

हिन्दी:
ब्रह्माजी बोले – “हे मुनियों! ध्यानपूर्वक सुनो, मैं छठदेवी का परम महात्म्य बताता हूँ।”

English:
Brahma replied: “O sages, listen carefully, I shall tell the supreme greatness of Chhath Devi.”

Bhojpuri:
ब्रह्मा जी बोललें – “हे मुनि लोग! ध्यान से सुन, हम छठ देवी के महिमा बताइब।”


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श्लोक ५

संस्कृत:
सूर्यांशसम्भवा देवी विश्वस्य कल्यकारिणी।
अदिति गर्भसमुद्भूता संजीवन्यभिधीयते॥

हिन्दी:
छठदेवी सूर्य की किरणों से उत्पन्न हुईं और जगत का कल्याण करती हैं। वे अदिति के गर्भ से उत्पन्न संजीवनी शक्ति हैं।

English:
Chhath Devi, born of the Sun’s rays, sustains the universe. She is known as the life-giving power born of Aditi’s womb.

Bhojpuri:
छठ देवी सूरज के किरिन से प्रकट भइली आ सभ जग के कल्याण कइलीं। अदिति माई के गर्भ से जन्म लिहली संजीवनी शक्ति हउअन।


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श्लोक ६

संस्कृत:
अदितेः सुप्रसादेन सुर्येण सह संभवा।
लोकानां हितकारिण्यः छठदेव्या महेश्वराः॥

हिन्दी:
अदिति की कृपा और सूर्य के तेज से जो शक्ति प्रकट हुईं, वही छठदेवी हैं, जो लोकों का कल्याण करती हैं।

English:
By Aditi’s grace and Sun’s brilliance, Chhath Devi manifested as the benefactor of all beings.

Bhojpuri:
अदिति माई के कृपा आ सूर्य भगवान के तेज से जे शक्ति प्रकट भइल, उहे छठ मइया बाड़ी जवन सबकर भला करेली।


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श्लोक ७

संस्कृत:
या तुष्टि-कुष्टि-शान्त्याख्या सर्वदुःखविनाशिनी।
तस्यै नमामि देवायै छठ्यै संजीवनीश्रिये॥

हिन्दी:
जो देवी तुष्टि, पुष्टि और शांति स्वरूपा हैं और दुःखों का नाश करती हैं, उन्हें प्रणाम है।

English:
To the Goddess who is satisfaction, prosperity, and peace, who destroys all sorrows, I bow.

Bhojpuri:
जे देवी तुष्टि, पुष्टि आ शांति के रूप हउअन, आ सब दुःख मिटावेली, उहे छठ मइया के प्रणाम बा।


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श्लोक ८

संस्कृत:
ऋषय ऊचुः – कथं सृष्टौ प्रादुर्भूता देवि छठ्याः पराश्रयम्।
केन कारणमुक्तेन लोकानां त्राणकारिणी॥

हिन्दी:
ऋषियों ने कहा – “देवि! बताइए कि आप सृष्टि में कैसे प्रकट हुईं और क्यों लोकों की रक्षिका बनीं?”

English:
The sages asked: “O Goddess, how did you manifest and why did you become protector of the worlds?”

Bhojpuri:
ऋषि लोग पूछलें – “हे देवी! रउआ कइसे प्रकट भइलीं आ काहे सभ लोक के रक्षक बनलीं?”


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श्लोक ९

संस्कृत:
ब्रह्मोवाच – ध्यानस्थोऽहं तदा देवः सृष्ट्यादौ परमेश्वरः।
तदा दृष्टा मया देवी सूर्यांशुकलसंभवा॥

हिन्दी:
ब्रह्मा बोले – “सृष्टि के आरम्भ में ध्यानस्थ रहते हुए मैंने सूर्यकिरणों से उत्पन्न देवी को देखा।”

English:
Brahma said: “At the dawn of creation, in meditation, I saw the Goddess born from Sun’s rays.”

Bhojpuri:
ब्रह्मा जी कहे लगलें – “सृष्टि के सुरुआत में जब हम ध्यान में रहलें, त सूरज के किरिन से प्रकट होखत देवी के देखनी।”


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श्लोक १०

संस्कृत:
दिव्यं रूपं महाशोभं तेजोराशिं दुरासदम्।
तां दृष्ट्वा विस्मयो जाता मुनयः सर्व एव हि॥

हिन्दी:
देवी का दिव्य तेजस्वी रूप देखकर सभी मुनि आश्चर्यचकित हो उठे।

English:
Her radiant divine form astonished all the sages.

Bhojpuri:
छठ मइया के दिव्य आ तेज से भरल रूप देख के सभे मुनि लोग चकित हो गइलें।
[20/08, 12:06 pm] Sandeep Dubey Adv.SC: (श्लोक ११ से २०)


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श्लोक ११

संस्कृत:
ऋषय ऊचुः — नमोऽस्तु ते सूर्यसुताम्बिके त्रैलोक्यमातृके।
संजीवनी नमस्तुभ्यं सर्वारिष्टनिवारिणि॥

हिन्दी:
ऋषि-मुनि बोले — “हे सूर्यदेव की शक्ति! हे तीनों लोकों की महा-माता! हे संजीवनी स्वरूपिणी! आपको बारम्बार नमस्कार है, आप समस्त अनिष्टों का निवारण करने वाली हैं।”

English:
The sages said: “Salutations to you, O power of the Sun, mother of the three worlds, Sanjivani Devi, remover of all misfortunes.”

Bhojpuri:
ऋषि लोग बोललें — “जय हो सूरज भगवान के शक्ति! हे तीनों लोक के माई! हे संजीवनी देवी! तोहरा प्रणाम बा, रउआ सभ अनिष्ट मिटावे वाली बाड़ू।”


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श्लोक १२

संस्कृत:
ॐ नमः पारावारगम्भीरायै तेजःपूर्णाय नैष्ठिकीम्।
सर्वप्रदायै विश्वेशि छठ्यै नमो नमः॥

हिन्दी:
“जो शक्ति पारावार (समस्त जगत्) से भी अधिक गम्भीर और तेजपूर्ण है, जो अखण्ड निश्चल ऊर्जा स्वरूपा है, जो सबको सबकुछ प्रदान करती हैं — उन विश्वेश्वरी छठदेवी को हमारा बारम्बार नमन है।”

English:
“Salutations again and again to Chhath Devi, the profound and radiant energy of the universe, who grants everything to all.”

Bhojpuri:
“बार-बार प्रणाम बा छठी मइया के — जे गहिरा आ तेज से भरल शक्ति बाड़ी, जे सबके सभ कुछ देलीं।”

श्लोक १३

संस्कृत:
त्वया विनाऽस्ति संसारः शून्यं च चराचरम्।
तस्मात् त्वमेव सर्वेशि पालनाय प्रवर्तसे॥

हिन्दी:
“हे सर्वेश्वरी! आपके बिना यह चर-अचर सम्पूर्ण संसार शून्य हो जाता है, अतः आप ही सबकी पालनकर्ता एवं सृष्टि की आधारशक्ति हैं।”

English:
“O Supreme Goddess! Without you, the world of moving and unmoving beings is void. You alone are the sustainer of creation.”

Bhojpuri:
“हे माई! तोहरा बिना ई चर-अचर सगरी संसार खाली हो जाईत। रउआए सभे के पालन करेली आ जगत के आधार बाड़ी।”

श्लोक १४

संस्कृत:
जय जय हे मातः सूर्यांशुकलसंभवे।
जय जय संजीवनि देवि छठ्यै नमो नमः॥

हिन्दी:
“जय हो! जय हो! हे सूर्य की किरणों से उत्पन्न भगवती! हे संजीवनी शक्ति स्वरूपा छठदेवी! आपको बारम्बार नमन है।”

English:
“Victory to you, O Mother born of Sun’s rays! Salutations to you again and again, O life-giving Chhath Devi!”

Bhojpuri:
“जय-जय हो, हे माई जे सूरज के किरिन से जनम लिहलीं! जय-जय हो संजीवनी देवी! बार-बार प्रणाम बा।”

श्लोक १५

संस्कृत:
भक्तानां मनोरथार्थाय जगत्‌त्राणाय कारणम्।
त्वद्गुणैः कीर्तितैरेव सर्वपापक्षयो भवेत्॥

हिन्दी:
“हे देवी! आपके गुणों का कीर्तन भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला तथा समस्त जगत् का रक्षण करने वाला है। केवल आपके स्तवन-मात्र से ही सभी पापों का क्षय हो जाता है।”

English:
“O Goddess, singing your glories fulfills devotees’ wishes and protects the world. By your praise alone, all sins are destroyed.”

Bhojpuri:
“हे माई! तोहरे गुण गावे से भक्तन के मनोकामना पूरा होला आ जगत के रक्षा होला। तोहरा स्तुति भर से सभ पाप नष्ट हो जाला।”

श्लोक १६

संस्कृत:
यस्य पठेत् स्तवं दिव्यं श्रद्धया संयुतो नरः।
तस्य दुष्कृतनाशोऽपि भवेद् दैवप्रसादतः॥

हिन्दी:
“जो मनुष्य श्रद्धा सहित इस दिव्य स्तुति का पाठ करता है, उस पर देवी प्रसन्न होती हैं और उसके सम्पूर्ण पाप एवं दुःखों का नाश हो जाता है।”

English:
“Whoever recites this hymn with devotion is blessed by the Goddess; his sins and sorrows are destroyed.”

Bhojpuri:
“जे आदमी श्रद्धा से ई स्तुति पढ़ेला, ओकरा पर माई प्रसन्न हो जालीं आ ओकरा सभ पाप-दुःख मिट जाला।”


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श्लोक १७ (फलश्रुति)

संस्कृत:
पुत्रार्थी लभते पुत्रं धनार्थी धनमाप्नुयात्।
रोगार्थी विनिवर्तेत रोगान् सर्वान् न संशयः॥

हिन्दी:
“जो व्यक्ति पुत्र की कामना से इसका पाठ करता है उसे पुत्र की प्राप्ति होती है, जो धन की इच्छा करता है उसे धन मिलता है, और जो रोग से पीड़ित है वह रोगमुक्त हो जाता है।”

English:
“Whoever desires a son obtains one, whoever seeks wealth gains it, and the diseased are cured — without doubt.”

Bhojpuri:
“जेके बेटा चाही उ बेटा पाई, जे धन चाहे उ धन पाई, आ जे रोगी बा उ ठीक हो जाई। ई बात पक्का बा।”


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श्लोक १८

संस्कृत:
इति स्तुत्वा महादेवीं ऋषयः प्रणतातनुः।
पुनः पपच्छ ब्रह्माणं देव्याः पार्क्रम्य हेतवः॥

हिन्दी:
ऋषियों ने महादेवी की स्तुति कर नमन किया और फिर ब्रह्मा से छठदेवी के चरित्रों के विषय में आगे पूछा।

English:
Thus having praised the great Goddess, the sages bowed and again asked Brahma about the deeds of Chhath Devi.

Bhojpuri:
ऋषि लोग छठ मइया के स्तुति क के प्रणाम कइलें आ फेर ब्रह्मा जी से मइया के चरित्र के बारे में पूछलें।


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श्लोक १९

संस्कृत:
ब्रह्मोवाच — पुरा स्वायम्भुवे काले पृथ्वी सर्वदुःखिता।
अगच्छद् ब्रह्मलोकं सा शरणं देवमम्बिकाम्॥

हिन्दी:
ब्रह्मा बोले — “स्वायंभुव मन्वन्तर के प्रारम्भ में पृथ्वी अनेक दुःखों से व्याकुल हो ब्रह्मलोक में छठदेवी के पास गई।”

English:
Brahma said: “In the Svayambhuva Manvantara, the Earth, distressed by sorrows, went to Brahmaloka and sought refuge in the Goddess.”

Bhojpuri:
ब्रह्मा जी कहले — “स्वायंभुव मन्वंतर में धरती दुःख से व्याकुल हो गइल आ ब्रह्मलोक में छठ मइया के शरण में गइल।”


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श्लोक २०

संस्कृत:
उवाच पुरतो देवीं नमस्कृत्वा पुनः पुनः।
त्राहि त्राहि महाभागे त्रैलोक्यजननी शुभे॥

हिन्दी:
पृथ्वी देवी ने बारम्बार प्रणाम कर कहा — “हे तीनों लोकों की जननी! हे शुभे! हमारी रक्षा कीजिए, हमें दुःख से बचाइए।”

English:
The Earth Goddess bowed repeatedly and said: “O Mother of the three worlds! Protect me, save me from sorrow.”

Bhojpuri:
धरती मइया बार-बार प्रणाम कइलीं आ कहलें — “हे तीनों लोक के जननी! हमके बचाईं, हमार रक्षा कर दीं।”
[20/08, 12:07 pm] Sandeep Dubey Adv.SC: श्लोक २१

संस्कृत:
तस्यास्तु विनयो दृष्ट्वा छठ्याः प्रीतिर्जगन्मयी।
उवाच पृथवीं देविं व्रतकृष्णां प्रसादिनीम्॥

हिन्दी:
पृथ्वी की विनम्र प्रार्थना देखकर जगन्माता छठदेवी प्रसन्न हुईं और शुभवाणी में बोलीं।

English:
Seeing Earth’s humble plea, the universal Mother Chhath Devi was pleased and spoke graciously.

Bhojpuri:
धरती माई के नम्र प्रार्थना देख के जगन्माता छठ मइया खुश हो गइलीं आ मीठ बोललीं।

श्लोक २२

संस्कृत:
छठ्युवाच — धैर्यं धारय महाभागे शृणु व्रतं पावनं मम।
येन व्रतेन सुखं प्राप्स्यसि लोकस्य च कल्यणम्॥

हिन्दी:
छठदेवी बोलीं — “हे शुभे! धैर्य धारण करो और मेरा यह पवित्र व्रत सुनो, जिसके पालन से तुम्हें सुख मिलेगा और लोकों का कल्याण होगा।”

English:
Chhath Devi said: “O blessed one, have patience. Hear my sacred vow. By observing it, you shall gain joy and bring welfare to the world.”

Bhojpuri:
छठ मइया कहलें — “हे शुभे! धीरज धरो। अब हमार ई पवित्र व्रत सुनऽ। एह व्रत से तोहरा सुख मिली आ जगत के भला होई।”

श्लोक २३

संस्कृत:
षष्ठ्यां तिथौ मदीयं तु व्रतं कृत्वा यथाविधि।
यः स्तौति भक्तियुक्तस्तु सर्वान्कामानवाप्नुयात्॥

हिन्दी:
“शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यदि मेरा व्रत विधिपूर्वक और भक्ति से किया जाए, तो भक्त को सभी इच्छित फल मिलते हैं।”

English:
“On the Shashthi day of the bright fortnight, whoever observes my vow with devotion attains all desired blessings.”

Bhojpuri:
“जे कोनो आदमी शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि पर नियम आ श्रद्धा से हमार व्रत करी, ओकरा सभ इच्छा पूरा हो जाई।”

श्लोक २४

संस्कृत:
इति श्रुत्वा वचो देव्या पृथ्वी प्रयतमानसा।
षष्ठी-दिने तद्व्रतं तु चकार भक्तिसंयुता॥

हिन्दी:
छठदेवी के वचन सुनकर पृथ्वी देवी ने श्रद्धापूर्वक शुक्ल षष्ठी तिथि को वह व्रत किया।

English:
Hearing Chhath Devi’s words, Earth devotedly observed the vow on the Shashthi day.

Bhojpuri:
मइया के बात सुनके धरती माई श्रद्धा से शुक्ल षष्ठी तिथि पर उ व्रत कइलीं।

श्लोक २५

संस्कृत:
तदा वृष्टिः समुज्जृम्भा शान्तो दुःखसमुद्भवः।
प्रसन्नो भुवनेशश्च लोकस्याभूत् मनोरथः॥

हिन्दी:
जैसे ही व्रत सम्पन्न हुआ, तुरंत वर्षा हुई, दुःख मिट गए और संसार सुखी हो गया।

English:
As soon as the vow was performed, rain poured, sorrows ended, and the world was filled with joy.

Bhojpuri:
व्रत होत ही बरखा भइल, दुःख टळ गइल, आ सभे लोक सुखी हो गइलें।

श्लोक २६

संस्कृत:
लोकाः समस्ताः स्तुतिभिः स्वयमेवापि देवताम्।
अदृष्टपूर्वया भक्त्या छठ्यै कृताञ्जलयोऽब्रुवन्॥

हिन्दी:
तब समस्त प्राणी और देवगण, पहले कभी न देखी गई भक्ति से, हाथ जोड़कर छठदेवी की स्तुति करने लगे।

English:
Then all beings and gods, with unprecedented devotion, joined hands and praised Chhath Devi.

Bhojpuri:
फेर सभ प्राणी आ देवता लोग, पहिले कबहुँ न देखल भक्ति से, हाथ जोड़के छठ मइया के स्तुति करे लगलें।

श्लोक २७

संस्कृत:
जयति जयति देवि सूर्यांशुकलसंभवे।
प्रसादेन तवानेन कृतार्थं जगतीमिमाम्॥

हिन्दी:
“जय हो, जय हो हे सूर्यकिरणों से उत्पन्न भगवती! आपके प्रसाद से यह पृथ्वी कृतार्थ हो गई है।”

English:
“Victory, victory to you, O Goddess born of Sun’s rays! By your grace, the Earth is fulfilled.”

Bhojpuri:
“जय-जय हो, हे सूरज के किरिन से पैदा भइल मइया! तोहार कृपा से ई धरती कृतार्थ हो गइल बा।”

श्लोक २८

संस्कृत:
एवं पुरा समुत्पन्नं छठव्रतं पवित्रकम्।
येन लोकस्य दुःखानां नाशोऽभूत् साश्चरंकृतः॥

हिन्दी:
इसी प्रकार प्राचीन काल में यह पवित्र छठव्रत उत्पन्न हुआ, जिसके प्रभाव से समस्त लोकों के दुःखों का अद्भुत नाश हुआ।

English:
Thus in ancient times, this sacred Chhath Vrat was born, by which the sorrows of the world were wondrously destroyed.

Bhojpuri:
एहने पुरानकाल में ई पवित्र छठव्रत शुरू भइल, जेकर प्रभाव से सभ लोकन के दुःख चमत्कारिक ढंग से दूर हो गइल l
✅ समापन

छठव्रत की उत्पत्ति पृथ्वी के दुःख निवारण हेतु हुई।

छठ मइया ने षष्ठी तिथि का व्रत बताया।

पृथ्वी के व्रत करने से वर्षा, शांति और सुख आया।

तब से छठव्रत संपूर्ण लोक के कल्याण हेतु प्रचलित हुआ।
[20/08, 12:12 pm] Sandeep Dubey Adv.SC: 📖 छठ महापुराण – प्रथम अध्याय (समापन)

(१) संस्कृत

छठी देवी उत्पन्न्यन्ते जगतो दुःखनिवारणाय।
सा देवी षष्ठ्यां तिथौ व्रतम् उपवासं च निर्दिश्य लोकहितं प्रतिपाद्यति।
पृथिव्या व्रतपालनेन वर्षा सम्यक् अभवत्, शान्तिः प्रसन्ना अभवत्, सुखं च लोकानां प्रवृत्तम्।
ततः प्रभृति छठव्रतम् अखिललोककल्याणाय प्रसिद्धं जातम्।

🔹 वेद–पुराण सन्दर्भः

ऋग्वेद १०.८५.४८ – “षष्ठी देवीरन्वर्त्तन्त” – षष्ठी तिथि की दिव्य शक्ति का वर्णन।

पद्मपुराण – षष्ठी को कार्तिक मासे उपवासं श्रेष्ठं लोकानुग्रहार्थं।

स्कन्दपुराण (कार्तिक माहात्म्य) – सूर्योपासना षष्ठ्यां शुभफलप्रदा इति।



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(२) हिंदी

छठ मइया का व्रत पृथ्वी के दुःख निवारण हेतु प्रकट हुआ।
देवी ने स्वयं षष्ठी तिथि का व्रत बताया और कहा कि इसका पालन करने से संपूर्ण लोक को कल्याण प्राप्त होगा।
जब पृथ्वी ने यह व्रत किया तो वर्षा समय पर होने लगी, शांति लौटी और प्रजा को सुख–समृद्धि प्राप्त हुई।
तब से छठव्रत लोककल्याण हेतु अनादि काल से प्रचलित है।

🔹 वेद–पुराण सन्दर्भ

ऋग्वेद (१०.८५) में षष्ठी देवी का उल्लेख।

पद्मपुराण और स्कन्दपुराण में षष्ठी उपवास व सूर्योपासना के महत्व का वर्णन।


(३) English

The origin of Chhath Vrat is described as a divine observance revealed by Chhathi Maiya for the removal of suffering from the Earth.
The Goddess prescribed the fasting on the sixth lunar day (Shashthi Tithi), declaring it to be a sacred vow for universal welfare.
When Mother Earth herself performed this vrat, timely rains appeared, peace was restored, and prosperity spread among all beings.
Since then, Chhath Vrat has been practiced for the welfare of the entire creation.

🔹 References (Vedic & Puranic):

Rigveda 10.85.48 – mentions the divine power of Shashthi.

Padma Purana – glorifies fasting on Shashthi in Kartika month.

Skanda Purana (Kartika Mahatmya) – praises Surya worship on Shashthi as highly auspicious.



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(४) भोजपुरी

छठी मइया के व्रत धरती के दुःख दूर करे खातिर भइल।
मइया खुद बतवली कि षष्ठी तिथि के व्रत करे से सभे लोक के भला होई।
जइसे धरती मइया एह व्रत के पालन कइलें, त बरखा समय पर भइल, चैन–सुकून आइल, सुख–समृद्धि घर–घर फइल गइल।
तबसे छठव्रत समाज आ संसार के भलाई खातिर चलत आवत बा।

🔹 वेद–पुराण संदर्भ

ऋग्वेद – षष्ठी देवी के बड़ाई।

पद्मपुराण – कार्तिक मास के षष्ठी उपवास।

स्कन्दपुराण – सूर्य उपासना के महत्व।

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