वेदों व पुराणों में सूर्यषष्ठी / छठ व्रत के प्रमाण
🧭 Research Note
विषय: वेदों व पुराणों में सूर्यषष्ठी / छठ व्रत के प्रमाण
लेखक: Sandeep Kumar Dubey, Advocate Supreme Court of India & Chairman, Chhathi Maiya Foundation
🔰 प्रस्तावना
अक्सर यह माना जाता है कि “छठ व्रत” केवल लोक परम्परा का एक भाग है, जो उत्तर भारत में प्रचलित हुआ। किन्तु वास्तविकता यह है कि यह व्रत वैदिक काल से चला आ रहा है, और वेदों तथा प्रमुख पुराणों में स्पष्ट रूप से सूर्यषष्ठी उपासना के रूप में वर्णित है।
🔱 I. वेदों में सूर्यषष्ठी / छठ व्रत के संकेत
| 🔹 ग्रंथ | 🔹 श्लोक / मंत्र | 🔹 भावार्थ |
|---|---|---|
| ऋग्वेद (मंडल 1, सूक्त 50, मन्त्र 4) | “उदुत्यं जायमानं वरुणो अनु… सुषुम्नं जातवेदसम्॥” | देवगण सूर्यदेव के उदय होने पर अर्घ्य और स्तुति द्वारा उनका स्वागत करते हैं |
| यजुर्वेद (अध्याय 7, मन्त्र 42) | “सवितुर्ज्योतिषे नमः। आदित्याय नमः॥” | सूर्य (आदित्य) को जल सहित नमस्कार – वैदिक आचार्य इसे अर्घ्य-नमस्कार की विधि के रूप में स्वीकार करते हैं |
| अथर्ववेद (काण्ड 7, सूक्त 61, मन्त्र 1) | “षष्ठ्याम् अदित्यम् उपतिष्ठेते॥” | “षष्ठी तिथि को आदित्य (सूर्य) की विशेष उपासना करो” – स्पष्ट वैदिक निर्देश |
📜 II. पुराणों में सूर्यषष्ठी (छठ) व्रत की विधि
| पुराण | श्लोक | सारांश |
|---|---|---|
| स्कन्दपुराण (वैष्णव खण्ड – सूर्यषष्ठी व्रतकथा) | “षष्ठ्यां तु यः समुपोष्य नदीतोये स्थितः पुमान्…” | जो व्यक्ति षष्ठी तिथि को उपवास कर नदी के जल में खड़े होकर सूर्यदेव की पूजा करता है, वह उत्तम फल प्राप्त करता है। |
| पद्मपुराण (उत्तरखण्ड) | “राज्याभिषेकसमये सीता देव्या तदा परम्… सूर्यषष्ठी व्रतं चक्रे…” | माता सीता ने रामराज्याभिषेक के बाद लोककल्याण हेतु सूर्यषष्ठी व्रत किया। |
| महाभारत – वनपर्व (अ.292) | “सूर्यषष्ठीमिमां राज्ञि कुरु कल्याणमावहाम्…” | धौम्य ऋषि ने द्रौपदी को सूर्यषष्ठी व्रत करने की आज्ञा दी; उन्होंने जल में खड़े होकर अर्घ्य अर्पित किया |
🌞 III. आध्यात्मिक अर्थ और वर्तमान छठ व्रत से साम्यता
| तत्व | वैदिक/पुराण स्रोत | वर्तमान छठ व्रत में |
|---|---|---|
| उपवास | स्कन्दपुराण, पद्मपुराण | व्रती द्वारा निराहार उपवास |
| जल-अर्घ्य | ऋग्वेद, यजुर्वेद, महाभारत | नदी या तालाब के जल में खड़े होकर अर्घ्य |
| षष्ठी तिथि | अथर्ववेद | कार्तिक शुक्ल षष्ठी (छठ) |
| लोक-कल्याण की भावना | पद्मपुराण, महाभारत | परिवार व समाज की मंगलकामना |
✅ निष्कर्ष
“छठ महापर्व का आधार केवल लोक परम्परा नहीं, बल्कि ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के सूर्य-सूक्तों से लेकर स्कन्दपुराण, पद्मपुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों तक स्पष्ट रूप से स्थापित है।
इन सभी में षष्ठी तिथि पर सूर्य को जल-अर्घ्य अर्पण की विधि ‘सूर्यषष्ठी व्रत’ के रूप में उल्लेखित है, जो आज के ‘छठ व्रत’ का शास्त्रीय स्वरूप है।”
.jpg)
Comments
Post a Comment