छठ महापर्व संहिता 🌞
🌞 छठ महापर्व संहिता 🌞
(Chhath Mahaparv Sanhita – Adhyatm, Vidhan aur Lok Geet Samgrah)
📖 अध्याय १ : भूमिका और महिमा
छठ महापर्व भारत की सबसे प्राचीन और पवित्र परंपराओं में से एक है।
ऋग्वेद, अथर्ववेद और महाभारत जैसे ग्रंथों में सूर्योपासना के अनेक उल्लेख मिलते हैं।
यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। दीपावली के छठे दिन होने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है।
महिमा –
- सूर्योपासना और षष्ठी देवी की आराधना।
- संतान-सुख, आरोग्य, समृद्धि की प्राप्ति।
- प्रकृति-मानव का सामंजस्य।
- लोक-संस्कृति और सामूहिकता का उत्सव।
📖 अध्याय २ : छठ व्रत का विधान
- नहाय-खाय (पहला दिन): गंगा स्नान, लौकी-भात, सात्विक भोजन – शरीर और मन की शुद्धि।
- खरना (दूसरा दिन): दिनभर उपवास, शाम को खीर-रोटी-केला का प्रसाद; इसके बाद निर्जला उपवास।
- संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य – परिवार की रक्षा व समृद्धि।
- उषा अर्घ्य (चौथा दिन): उगते सूर्य को अर्घ्य – नवजीवन और ऊर्जा का स्वागत।
📖 अध्याय ३ : छठ व्रत की कथाएँ
- राजा प्रियव्रत और षष्ठी माता – संतानहीन राजा ने व्रत किया, देवी प्रसन्न हुईं और पुत्ररत्न मिला।
- रामायण कथा – अयोध्या लौटकर श्रीराम और सीता ने सूर्योपासना की।
- महाभारत कथा (कुंती–कर्ण) – कुंती ने सूर्योपासना कर कर्ण को जन्म दिया।
- द्रौपदी की कथा – पांडवों की विजय के लिए द्रौपदी ने छठ व्रत किया।
📖 अध्याय ४ : छठी मैया की आरती
ॐ जय छठी मैया, जय हो षष्ठी मैया।
सूरज सहस्त्र किरणी, जगमग जग छाया॥
नदी-ताल सरोवर, सबमें है सुखदायी।
गंगा जल में वास कर, जग को पावन बनायी॥
भक्ति भाव से जो कोई, व्रत करे तुम्हारा।
सुख-समृद्धि पा के, जीवन बने सितारा॥
निःसंतान नारी को, तू देती संतान।
भक्तन की लाज रखे, कर देती कल्याण॥
📖 अध्याय ५ : खरना गीत
- केलवा जे फरेला घवद से
- पाहिले पहिल छठी मइया पूजनिया
- अइलीं छठी मइया अंगना में
- छठी मइया तोहर महिमा अपार
- हे छठी मैया सुन लऽ अरज हमार
📖 अध्याय ६ : संध्या अर्घ्य गीत
- कांचा ही बांस के बहंगिया
- अरघे दिनानाथ हम देब
- घरे-घरे घाट सजल
- सूरज देव अरघ स्वीकार करीं
- दउरा भर-भर लेलीं बहिनिया
📖 अध्याय ७ : उषा अर्घ्य गीत
- उग हो सूरज देव
- कांचहि बांस के बहंगिया
- भोर भइल छठी मईया
- अर्घे लेऽ हे भोरवा सूरज देव
- जय-जय उगते सुरजवा
📖 अध्याय ८ : विशेष लोकगीत
- सोहर – छठी मईया तोहर महिमा अपार
- मंगलगीत – मंगलमय हो घर-आँगन
- परिवार गीत – सुख-शांति बरसऽ मईया
📖 अध्याय ९ : सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
- सामाजिक महत्व – सामूहिकता, समानता, भाईचारा।
- सांस्कृतिक महत्व – लोकगीत, प्रसाद, पारंपरिक वेशभूषा।
- पर्यावरणीय महत्व – नदी-घाट की सफाई, प्रकृति-पूजन।
- आध्यात्मिक महत्व – अनुशासन, संयम, संतान-सुख, भक्ति-आस्था।
📖 अध्याय १० : उपसंहार और आशीर्वचन
संदेश – अनुशासन, समानता, प्रकृति-प्रेम, परिवार रक्षा, भक्ति और आस्था।
समापन मंत्र:
जय-जय छठी मैया,
भक्तन सुख दिहऽ।
सुख-सम्पति बरसऽ,
दुख-दरिद्र हरऽ॥
“छठ महापर्व संहिता”
✍️ संकलन: Chhathi Maiya Foundation
📍 (संदीप कुमार दुबे, चेयरमैन – छठी मइया फ़ाउंडेशन)
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