वेदों में छठ व्रत



हिस्सा 1: वेदों में छठ व्रत

  1. ऋग्वेद (मंडल 1, सूक्त 50, मंत्र 4)

संस्कृत श्लोक:

उदुत्यं जायमानं वरुणो अनु,
अर्यमा मित्रो अर्वते।
आ स्थातृभिः पथिभिः सूर्यं यतः,
सुषुम्नं जातवेदसम्॥

हिंदी में समझें:

  • वैदिक काल में सूर्य का उदय होते ही देवगण उसे जल अर्पित कर सम्मानित करते थे।
  • यही अर्घ्य देने की परंपरा आज छठ व्रत में होती है।
  • इसे हम कह सकते हैं – सूर्य देव की स्तुति + जल अर्पण

  1. यजुर्वेद (अध्याय 7, मंत्र 42)

संस्कृत:

सवितुर्ज्योतिषे नमः।  
आदित्याय नमः॥

हिंदी अर्थ:

  • सूर्यदेव (आदित्य) को प्रणाम।
  • इसे वैदिक समय में अर्घ्य अर्पित करने की विधि के रूप में बताया गया।

  1. अथर्ववेद (काण्ड 7, सूक्त 61, मंत्र 1)

संस्कृत:

षष्ठ्याम् अदित्यम् उपतिष्ठेते॥

हिंदी अर्थ:

  • “षष्ठी तिथि को सूर्य की उपासना करो।”
  • यही श्लोक आज के छठ व्रत का वैदिक आधार है।

हिस्सा 2: पुराणों में छठ व्रत

  1. स्कन्दपुराण
षष्ठ्यां तु यः समुपोष्य नदीतोये स्थितः।
आदित्यं पूजयेद् भक्त्या स वीर्यं प्राप्नुयान्नरः॥
  • जो व्यक्ति षष्ठी तिथि को उपवास रखकर नदी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देता है, उसे पुण्य और बल मिलता है।
  1. पद्मपुराण (उत्तरखण्ड)
राज्याभिषेकसमये सीता देव्या तदा परम्।
सूर्यषष्ठी व्रतं चक्रे लोककल्याण हेतवे॥
  • रामराज्याभिषेक के बाद सीता ने लोककल्याण हेतु सूर्यषष्ठी व्रत किया।

हिस्सा 3: महाकाव्य में प्रमाण

  1. महाभारत (वनपर्व)
सूर्यषष्ठीमिमां राज्ञि कुरु कल्याणमावहाम्॥
  • धौम्य ऋषि ने द्रौपदी को सूर्यषष्ठी व्रत करने की आज्ञा दी।
  • द्रौपदी ने नदी में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया।
  • इसके फलस्वरूप उसे अक्षय पात्र का वरदान प्राप्त हुआ।

हिस्सा 4: निष्कर्ष

  • वेद: सूर्योपासना और षष्ठी तिथि का निर्देश।
  • पुराण: सूर्यषष्ठी व्रत की विधि और महिमा।
  • महाकाव्य: सीता और द्रौपदी द्वारा व्रत का ऐतिहासिक प्रमाण।

संदेश: छठ व्रत न केवल लोक परंपरा है, बल्कि वैदिक और पुराणिक शास्त्रीय परंपरा का जीवित स्वरूप है।



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