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Showing posts from August, 2025

संदीप कुमार दुबे एवं छठी मैया फ़ाउंडेशनवर्षवार भविष्य–योजना

🌞 संदीप कुमार दुबे एवं छठी मैया फ़ाउंडेशन वर्षवार भविष्य–योजना (2025 – 2035) 2025 – मेहनत और नींव संघर्ष और मेहनत का समय। फ़ाउंडेशन और छठ पर्व का प्रचार बढ़ेगा। किताबें, लेखन और सोशल मीडिया के ज़रिए संदेश दूर तक जाएगा। 2026 – शुभारंभ और विस्तार की शुरुआत शनि–केतु की शुरुआत धार्मिक कार्यों के लिए शुभ। भूमि–पूजन या “छठी मैया धाम” की नींव रखने का योग। प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव बढ़ेगा। 2027 – तेज़ प्रगति राष्ट्रीय स्तर पर पहचान। फ़ाउंडेशन के बड़े आयोजन। समाज और मीडिया में आपकी छवि मजबूत होगी। 2028 – आध्यात्मिक उत्थान विदेश यात्राएँ और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अवसर। छठ पर्व पर डॉक्यूमेंट्री, सम्मेलन या किताब का विमोचन। राज्यों में फ़ाउंडेशन की शाखाएँ। 2029 – वैश्विक पहचान की शुरुआत शनि–शुक्र प्रवेश – यश, मान और धन। फ़ाउंडेशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान। UNESCO या इसी तरह की संस्थाओं से पहल। 2030 – स्थायित्व और धाम निर्माण छठी मैया धाम का निर्माण तेज़ी से होगा। सरकार और संस्थाओं का सहयोग मिलेगा। “संस्कृति राजदूत” जैसी अवधारणा लागू हो सकती है। 2031 – स...

छठ : मानवता की एकता का महापर्व

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🌞 छठ : मानवता की एकता का महापर्व भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में छठ महापर्व वह अद्वितीय पर्व है, जो न केवल प्रकृति की आराधना है बल्कि मानवता की सर्वधर्मीय एकता का सबसे सशक्त प्रतीक भी है। जब-जब समाज में भेदभाव की दीवारें खड़ी की गईं, तब-तब छठी मइया की पूजा ने इंसानियत को यह सिखाया कि सूरज की किरण और जल की धार पर सबका बराबर हक़ है। ✨ छठ : प्रकृति और मानवता का संगम छठ महापर्व में व्रती महिलाएँ और पुरुष सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह अर्घ्य मात्र धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के उस शाश्वत सत्य का स्मरण है कि सूरज सभी को बिना भेदभाव के ऊर्जा देता है। यही कारण है कि छठ को मानवता के लिए समानता और न्याय का उत्सव भी माना जाता है। 🌏 सर्वधर्मीय भागीदारी छठ पूजा में किसी जाति, संप्रदाय या धर्म की सीमा नहीं होती। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड से लेकर मुंबई, दिल्ली और विदेशों तक – हर जगह यह पर्व उन सभी परिवारों द्वारा मनाया जाता है जो मानवता की इस परंपरा से जुड़ते हैं। मुस्लिम, सिख, ईसाई और दूसरे धर्मों के लोग भी छठ पर्व में शामिल होकर सामाजिक एकता का सजीव उदाहर...

छठी मइया पर भरोसा

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छठी मइया पर भरोसा भारतीय संस्कृति में आस्था और विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी माने जाते हैं। जब मनुष्य कठिनाइयों, दुःखों और संघर्षों से जूझता है, तब उसे एक ही सहारा मिलता है – ईश्वर और मातृ शक्ति पर विश्वास। इन्हीं में से एक अद्वितीय आस्था का प्रतीक हैं छठी मइया , जिन्हें संतान, स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की दात्री माना गया है। छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह उस अटूट भरोसे की गवाही है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के हृदय में बसी है। जब व्रती महिला अथवा पुरुष चार दिनों तक कठोर नियमों का पालन करते हैं, भूखे-प्यासे रहकर भी सूरजदेव और छठी मइया को अर्घ्य अर्पित करते हैं, तो यह केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि विश्वास का जीवंत रूप होता है। छठी मइया पर भरोसा करना, जीवन के हर संकट को धैर्य और संयम से स्वीकार करना है। यह भरोसा सिखाता है कि यदि हमारी नीयत शुद्ध है और मन में भक्ति की सच्ची भावना है, तो मइया हर संकट में सहारा बनकर खड़ी होती हैं। कहा जाता है कि छठी मइया की कृपा से संतानहीन को संतान मिलती है, रोगी को स्वास्थ्य और निराश को नई आशा। यही कारण है कि लोकगीतो...

छठ पूजा – मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर

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📖 छठ पूजा – मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (यूनेस्को नामांकन हेतु समग्र ग्रंथ – प्रस्तुतकर्ता: छठी मइया फ़ाउंडेशन) ✨ प्रस्तावना छठ पूजा भारतीय सभ्यता और संस्कृति की एक ऐसी जीवित परंपरा है, जो सहस्राब्दियों से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य का एक अद्वितीय उदाहरण है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और असमानता जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तब छठ पूजा हमें सिखाती है – “सूर्य ऊर्जा है, जल जीवन है, और अनुशासन मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।” 📑 अनुक्रमणिका प्रस्तावना ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रामराज्य और छठी मइया छठ का दर्शन और सांस्कृतिक महत्व छठ के अनुष्ठान (चार दिन) पर्यावरणीय एवं जलवायु संदेश सामाजिक और नैतिक मूल्य वैश्विक प्रसार यूनेस्को मानकों के अनुरूपता सहायक सामग्री (Annexures) उपसंहार 🕉️ अध्याय 1 : ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वैदिक युग: ऋग्वेद और अथर्ववेद में सूर्योपासना का उल्लेख मिलता है। वैदिक मंत्रों में “सविता” देवता को जीवनदाता माना गया है। महाभारत: द्रौपदी द्वारा सूर्य ...

✨ भक्त और भगवान ✨

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✨ भक्त और भगवान ✨ 1. भक्ति और पहचान की गहराई हनुमान जी और श्रीराम का मिलन केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि भक्ति और ईश्वर के बीच के अद्भुत संबंध का प्रतीक है। प्रश्न यह है कि — जब भक्त अपने ईश्वर तक पहुँचेगा, तो ईश्वर उसे कैसे पहचानेंगे? ईश्वर की पहचान भक्त से ईश्वर सर्वज्ञ हैं। उन्हें पहचानने के लिए बाहरी चिन्हों की ज़रूरत नहीं। भक्त को वे उसकी निष्ठा, भाव, प्रेम और समर्पण से पहचानते हैं। जैसे हनुमान जी ने प्रभु राम के लिए “निष्काम सेवा” की थी, उसी सेवा और समर्पण से भगवान ने उन्हें अपना सबसे प्रिय बना लिया। भक्त चाहे रूप, भाषा, जाति या देश कैसा भी हो — भक्ति का शुद्ध भाव ही उसकी पहचान है। भक्त की पहचान क्या है? उसके हृदय में केवल प्रभु का नाम और स्वरूप बस जाना । जब संसार के सारे प्रलोभन, भय और स्वार्थ छूट जाएं और केवल प्रभु की सेवा, स्मरण और प्रेम बच जाए — तब वही असली पहचान है। संत कहते हैं — “ईश्वर को पाने के लिए ईश्वर से अधिक किसी प्रमाण की ज़रूरत नहीं, भाव ही सबसे बड़ा परिचय है।” जैसे हनुमान और राम हनुमान जी जब राम से मिले तो प्रभु ने पूछा— “तु...

भक्ति, संस्कृति और न्याय – भारत की आत्मा

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📖 भक्ति, संस्कृति और न्याय – भारत की आत्मा 🌸 प्रस्तावना भारत केवल एक राष्ट्र नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिकता और संस्कृति की जीवित आत्मा है। यहाँ भक्ति, संस्कृति और न्याय की तीन धाराएँ एक-दूसरे में मिलकर बहती हैं। भक्ति – आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली शक्ति। संस्कृति – परिवार और समाज को जोड़ने वाली परंपरा। न्याय – धर्म और संतुलन को स्थापित करने वाली व्यवस्था। भारत की पहचान केवल राजनीति या अर्थव्यवस्था से नहीं होती, बल्कि इसकी आत्मा इन तीनों धाराओं से प्रकट होती है। यही त्रिवेणी इसे सनातन और अमर बनाती है। ✨ भाग 1 – भक्ति खंड अध्याय 1 भक्ति का स्वरूप : आत्मा और परमात्मा का मिलन भक्ति का अर्थ है — प्रेम और समर्पण । जब आत्मा अपने स्वार्थ, अहंकार और बंधनों को त्यागकर केवल परमात्मा की ओर प्रवाहित हो जाती है, तभी भक्ति कहलाती है। 🌿 कथा : हनुमान और श्रीराम एक बार श्रीराम ने हनुमान से पूछा – “हनुमान! तुम मुझे किस रूप में देखते हो?” हनुमान जी ने विनम्रता से उत्तर दिया – “शरीर की दृष्टि से मैं आपका दास हूँ।” “जीवात्मा की दृष्टि से मैं आपका अंश हूँ।” “औ...

🌟 मैं भक्त प्रह्लाद और मेरे ईश्वर नरेंद्र मोदी

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🌟 मैं भक्त प्रह्लाद और मेरे ईश्वर नरेंद्र मोदी जी भारत की महान परंपरा में भक्त और ईश्वर का संबंध केवल आराधना तक सीमित नहीं है, वह सत्य और धर्म की स्थापना का माध्यम भी बनता है। जैसे सत्य के पक्षधर भक्त प्रह्लाद ने असत्य और अन्याय के सामने नतमस्तक होने से इनकार किया, वैसे ही आज मैं स्वयं को प्रह्लाद की भाँति देखता हूँ – एक साधारण मनुष्य, परंतु अडिग विश्वास से भरा हुआ। मेरा विश्वास है कि इस युग में नरेंद्र मोदी जी केवल एक नेता नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रतिनिधि हैं। उनके भीतर मैं वही दिव्य तेज देखता हूँ जो भक्त प्रह्लाद ने भगवान विष्णु में देखा था। मोदी जी का जीवन संघर्षों, त्याग और राष्ट्रभक्ति से बना है। उनके प्रत्येक कदम में मुझे धर्म की रक्षा और संस्कृति की पुनर्स्थापना का संकल्प दिखाई देता है। भक्त प्रह्लाद को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, पर उनका विश्वास कभी डिगा नहीं। ठीक उसी प्रकार, मैं भी मानता हूँ कि जब-जब असत्य, अन्याय या अंधकार प्रबल होता है, तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं। मेरे लिए वह अवतार आज नरेंद्र मोदी जी हैं। मैं स्वयं को उनका ...

छठी मइया उपासना और भगवान सूर्य अर्घ्य

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🙏📖 छठी मइया उपासना और भगवान सूर्य अर्घ्य ✍️ प्रस्तावना भारतीय संस्कृति में छठ महापर्व का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। यह पर्व सूर्य देव – जो जीवन का आधार और ऊर्जा का स्रोत हैं – तथा छठी मइया – जो मातृत्व, संतान–सुख और परिवार–कल्याण की अधिष्ठात्री शक्ति हैं – दोनों की संयुक्त उपासना का अद्भुत संगम है। छठ महापर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह प्रकृति–पूजन, स्वास्थ्य–विज्ञान, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक साधना का अनुपम उदाहरण है। नदी–तालाब की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, लोकगीतों की माधुरी और सामूहिक सहभागिता – सब मिलकर इसे एक लोक–जीवन का उत्सव बनाते हैं। यह पुस्तक छठी मइया की उपासना और भगवान सूर्य अर्घ्य की परंपरा को गहराई से समझने का प्रयास है। इसमें छठ पर्व की विधियाँ, व्रती की आस्था, लोकगीत, सामाजिक और वैश्विक महत्व तथा आत्मोद्धार की भूमिका को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। 🌸 अध्याय 1 : छठी मइया का स्वरूप भारतीय लोकजीवन में छठी मइया को सूर्य भगवान की बहन और उषा देवी का रूप माना गया है। माना जाता है कि छठी मइया संतान–सुख, परिवार–कल्याण और आरोग्य की...

छठ महापर्व संहिता 🌞

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🌞 छठ महापर्व संहिता 🌞 (Chhath Mahaparv Sanhita – Adhyatm, Vidhan aur Lok Geet Samgrah) 📖 अध्याय १ : भूमिका और महिमा छठ महापर्व भारत की सबसे प्राचीन और पवित्र परंपराओं में से एक है। ऋग्वेद, अथर्ववेद और महाभारत जैसे ग्रंथों में सूर्योपासना के अनेक उल्लेख मिलते हैं। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। दीपावली के छठे दिन होने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। महिमा – सूर्योपासना और षष्ठी देवी की आराधना। संतान-सुख, आरोग्य, समृद्धि की प्राप्ति। प्रकृति-मानव का सामंजस्य। लोक-संस्कृति और सामूहिकता का उत्सव। 📖 अध्याय २ : छठ व्रत का विधान नहाय-खाय (पहला दिन): गंगा स्नान, लौकी-भात, सात्विक भोजन – शरीर और मन की शुद्धि। खरना (दूसरा दिन): दिनभर उपवास, शाम को खीर-रोटी-केला का प्रसाद; इसके बाद निर्जला उपवास। संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य – परिवार की रक्षा व समृद्धि। उषा अर्घ्य (चौथा दिन): उगते सूर्य को अर्घ्य – नवजीवन और ऊर्जा का स्वागत। 📖 अध्याय ३ : छठ व्रत की कथाएँ राजा प्रियव्रत और षष...

संदीप कुमार दुबे : छठ–संस्कृति के अमर वाहक

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 🌞 संदीप कुमार दुबे : छठ–संस्कृति के अमर वाहक संस्कृत गोपालगञ्ज–जनपदे धूपसागर–खरगौलीग्रामे, श्रीचन्द्रगोकुलदुबॆ–नीलमदेव्याः कुलाङ्गने, २६ मार्च १९७९ तिथौ प्रातःकाले ज्येष्ठः सुपुत्रः जातः। तस्य जन्मः केवलं कौटुम्बिकः नासीत्, अपि तु दैवीकः प्रसादः। यतः तस्य पितामही थावे–भवानीदेव्याः सन्निधौ प्रार्थना कृतवती— “मम वंशे ज्येष्ठपुत्रः भवतु।” देव्याः अनुग्रहात् एव सः पुत्रः अवतरितः। सः आसीत् इन्द्रदेवदुबॆस्य पौत्रः, उदयनारायणतिवारीस्य दुहितुः पुत्रः च। बाल्यकालादेव तस्य हृदये “षष्ठी–मातुः” अचला भक्ति जाग्रता। सः आवदत् मातरम्— “अहमपि स्नानं करिष्यामि, अर्घ्यं दास्यामि।” विधिशास्त्रं अधीत्य सः सर्वोच्चन्यायालयस्य अधिवक्ता अभवत्। किन्तु तस्य ध्येयम् केवलं न्यायालये न आसीत्— अपि तु धर्म–संस्कृत्योः पुनरुत्थानम्। तस्मिन् कृतं “छठ–महापुराणम्”, येन षष्ठी–मातुः महिमा युगयुगान्तरं जीवति। अनुजः बिपिनः, भगिन्यौ अञ्जुला–विभा च, जीवनसंगिनि राखी दुबे, सुपुत्रः श्रेयांश दुबे च— एतेषां प्रेम–सहयोगेन तस्य जीवनयात्रा स्फूर्तिमयी अभवत्। --- हिन्दी गोपालगंज जिले के धूपसागर–खरगौली ग्राम में, २६ ...

संदीप कुमार दुबे : छठ–संस्कृति के अमर वाहक

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🌞 संदीप कुमार दुबे : छठ–संस्कृति के अमर वाहक --- संस्कृत गोपालगञ्ज–जनपदे धूपसागर–खरगौलीग्रामे, श्रीचन्द्रगोकुलदुबॆ–नीलमदेव्याः कुलाङ्गने, २६ मार्च १९७९ तिथौ प्रातःकाले ज्येष्ठः सुपुत्रः जातः। तस्य जन्मः केवलं कौटुम्बिकः नासीत्, अपि तु दैवीकः प्रसादः। यतः तस्य पितामही थावे–भवानीदेव्याः सन्निधौ प्रार्थना कृतवती— “मम वंशे ज्येष्ठपुत्रः भवतु।” देव्याः अनुग्रहात् एव सः पुत्रः अवतरितः। सः आसीत् इन्द्रदेवदुबॆस्य पौत्रः, उदयनारायणतिवारीस्य दुहितुः पुत्रः च। बाल्यकालादेव तस्य हृदये “षष्ठी–मातुः” अचला भक्ति जाग्रता। सः आवदत् मातरम्— “अहमपि स्नानं करिष्यामि, अर्घ्यं दास्यामि।” विधिशास्त्रं अधीत्य सः सर्वोच्चन्यायालयस्य अधिवक्ता अभवत्। किन्तु तस्य ध्येयम् केवलं न्यायालये न आसीत्— अपि तु धर्म–संस्कृत्योः पुनरुत्थानम्। तस्मिन् कृतं “छठ–महापुराणम्”, येन षष्ठी–मातुः महिमा युगयुगान्तरं जीवति। अनुजः बिपिनः, भगिन्यौ अञ्जुला–विभा च, जीवनसंगिनि राखी दुबे, सुपुत्रः श्रेयांश दुबे च— एतेषां प्रेम–सहयोगेन तस्य जीवनयात्रा स्फूर्तिमयी अभवत्। --- हिन्दी गोपालगंज जिले के धूपसागर–खरगौली ग्राम में, २६ ...

छठ पूजा 🌞 सूर्य अर्घ्य एवं छठी मइया की आराधना 🌸

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📖 छठ पूजा महाग्रंथ 🌞 सूर्य अर्घ्य एवं छठी मइया की आराधना 🌸 अध्याय १ : छठी मइया का स्वरूप संस्कृत षष्ठीदेवी जगन्माता, अदितेः स्वरूपिणी। बालरक्षा–करिणी च, संतानप्रदायिनी॥ हिन्दी छठी मइया षष्ठी देवी का लोक रूप हैं। वे अदिति स्वरूपा माता हैं, जो संतान की रक्षा करती हैं और मातृत्व का आशीर्वाद देती हैं। English Chhathi Maiya is the folk form of Goddess Shashthi , a manifestation of Aditi , the cosmic mother. She is the guardian of children and the bestower of progeny. भोजपुरी छठी मइया अदिती माई के लोक रूप हईं। ऊ बाल-बच्चा के रखवाली करेली आ माईपना के आशीर्वाद दिहेली। अध्याय २ : छठी मइया की उत्पत्ति संस्कृत ब्रह्मणो मानसपुत्री, कार्तिकेयपालिका। षष्ठीदेवी प्रसन्ना स्यात्, पुत्ररक्षा–करप्रदा॥ हिन्दी पुराणों के अनुसार छठी मइया ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं। वे कार्तिकेय की पालनहार और बालकों की रक्षिका हैं। English According to the Puranas, Chhathi Maiya is the mind-born daughter of Brahma . She is also revered as the foster mother of Kartikeya and the protector o...

Chhath वैश्विक एवं पर्यावरणीय संदेश

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🌍 वैश्विक एवं पर्यावरणीय संदेश (Detailed) संस्कृत सूर्योपासना धर्मः, केवलं पूजा नास्ति। एषः महान् उत्सवः अस्य धरण्याः जलवायु-संतुलनस्य, नदी-सरसोः संरक्षणस्य, वन-प्रकृत्याः पालनस्य च साक्षात्कारः अस्ति। अत्र मनुष्यः केवलं भक्तः न, अपि तु भूमेः रक्षकः, प्रकृतेः सेवकः च भवति। सर्वे मिलित्वा यदि सूर्योपासना करिष्यामः, तर्हि पृथिवी शीतला, जलशुद्धिः, वायुः निर्मलः, जीवनं सुखमयम् भविष्यति। हिन्दी सूर्य उपासना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह धरती की जलवायु संतुलन , नदियों और जलाशयों का संरक्षण, वनस्पति और प्रकृति की रक्षा का एक दिव्य अभियान है। जब हम सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तो केवल सूर्य देवता की स्तुति नहीं करते, बल्कि जल, वायु और पृथ्वी की शुद्धि का संकल्प भी लेते हैं। यदि संपूर्ण मानवता छठ पर्व का यह संदेश अपनाए, तो विश्व से प्रदूषण घटेगा, प्रकृति फिर से मुस्कुराएगी और मानव जीवन सुख, शांति और स्वास्थ्य से भर जाएगा। English Sun worship is not merely a ritual; it is a profound commitment to climate balance , to the protection of rivers and water ...

छठ महा पुराण – संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या संग्राहक रूप

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छठ महा पुराण – संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या संग्राहक रूप अध्याय 1 – प्रारंभिक स्तुति (Stuti of Chhathi Maiya) संस्कृत: ॐ छठ्यै नमः। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ हिन्दी: “ओं छठ्यै नमः। जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति रूप में प्रतिष्ठित हैं, उनका बार-बार नमन।" अध्याय 2 – राम-सीता एवं छठ-व्रत (Ram & Sita and Chhath Vrat) संस्कृत: शौनक उवाच — रामस्य वनवासेऽन्ते कृतं किमिदमादरात्। हिन्दी: “शौनक ऋषि बोले — जब भगवान राम का वनवास समाप्त हुआ, तब उन्होंने कौन-सा ऐसा कार्य किया जिससे उन्हें राज्यलक्ष्मी और प्रजा का सुख प्राप्त हुआ?” संस्कृत: वैश्यंपायन उवाच — छठ्याः पुण्यं महाव्रतं चकार भक्तिसंयुता॥ हिन्दी: “वैश्यंपायन ऋषि बोले — उसने छठदेवी का महापुण्य व्रत भक्ति सहित किया।” संस्कृत: स्नात्वा तु पुण्यतोयेन कुर्वाणेव नियंक्तया। सूर्यदर्शनकाल्ये सा ददौ अर्घ्यं यथाविधि॥ हिन्दी: “स्नान कर, पवित्र जल से शुद्ध होकर, सूर्यदर्शन के समय विधिपूर्वक अर्घ्य दिया।” अध्याय 3 – द्रौपदी एवं छठ-व्रत (Draupadi &...

छठ महा पुराण – आदि-खण्ड, प्रथम अध्याय Final 1

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🌟 छठ महा पुराण – आदि-खण्ड, प्रथम अध्याय (छठ देवी के प्रादुर्भाव एवं ब्रह्मादि ऋषियों का प्रश्न) श्लोक १ संस्कृत: ॐ श्रीगणेशाय नमः। ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः। ॐ भास्कराय नमः। हिन्दी: श्री गणेश, माता पार्वती के पुत्र तथा सम्पूर्ण विघ्नों के नाशक का स्मरण कर, सूर्यदेव को प्रणाम करते हुए इस छठ महापुराण का आरम्भ किया जाता है। English: Salutations to Lord Ganesha, son of Goddess Parvati and remover of all obstacles, and to the Sun God. Thus begins the sacred Chhath Mahapuran. Bhojpuri: गणेश जी, जे पार्वती माई के बेटा आ सभ विघ्न के नाश करे वाला बाड़न, उनकरा के याद क के, आ सूर्य भगवान के प्रणाम क के, ई छठ महापुराण के शुरुआत होखत बा। --- श्लोक २ संस्कृत: ब्रह्मा-विष्णु-हरैः पूर्वं कृतं छठ्याः प्रणामकम्। तच्च पुराणमादाय कथयामि शुभं शुभम्॥ हिन्दी: ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने पूर्वकाल में जो छठ्याः प्रणाम किया था, उसी दिव्य पुराण को आधार बनाकर अब मैं यह शुभ कथा कहता हूँ। English: The hymn once offered by Brahma, Vishnu, and Mahesh forms the basis of this Purana, from which I narrate the auspicious tale...