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Showing posts from December, 2025

ऐसे थे हमारे अटल बिहारी वाजपेयी जी

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  ऐसे थे हमारे अटल  जी 101वीं जयंती पर स्मरण  भारत की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल सत्ता का संचालन नहीं करते, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को दिशा देते हैं। Atal Bihari Vajpayee ऐसे ही युगपुरुष थे—जिन्होंने राजनीति को शालीनता, विचार को संतुलन और नेतृत्व को करुणा से जोड़ा। अटल जी के व्यक्तित्व में वह आत्मीयता थी, जिसने उन्हें हर प्रांत, हर समाज और हर वर्ग का अपना बना दिया। जनता ने उनमें केवल एक प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि भरोसे, संवेदना और नैतिक नेतृत्व का प्रतीक देखा। उनका जीवन इस बात का प्रमाण था कि सत्ता में रहते हुए भी विनम्रता और मानवीयता को सर्वोच्च स्थान दिया जा सकता है। अटल जी के लिए राजनीति संघर्ष का अखाड़ा नहीं, संवाद की साधना थी। उनकी वाणी में कठोरता नहीं, स्पष्टता थी; उनके विचारों में कटुता नहीं, बल्कि दृढ़ता थी। संसद में उनके शब्द लोकतांत्रिक मर्यादा के मानक बनते थे। वे असहमति को शत्रुता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की अनिवार्य शक्ति मानते थे। उनकी कविताएँ केवल साहित्य नहीं थीं—वे राष्ट्र के अंतर्मन की अभिव्यक्ति थीं। “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ...

छठ और विवाह का शाश्वत दर्शन

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छठ और विवाह का शाश्वत दर्शन प्रेम, विश्वास और सम्मान से बचता परिवार लेखक: संदीप कुमार दुबे अधिवक्ता – सर्वोच्च न्यायालय, भारत चेयरमैन – छठी मइया फ़ाउंडेशन लेखक का वक्तव्य (Author’s Note) यह पुस्तक मेरे पेशेवर अनुभव और व्यक्तिगत संवेदना—दोनों का परिणाम है। वर्षों से एक अधिवक्ता और मध्यस्थ के रूप में मैंने देखा है कि दांपत्य विवाद अदालतों में पहुँचने से पहले ही सुलझ सकते थे, यदि संवाद, धैर्य और सम्मान को अवसर दिया गया होता। कानून आवश्यक है, पर वह करुणा का विकल्प नहीं हो सकता। छठ मेरे लिए केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन का जीवंत उदाहरण है। इस पर्व में न कोई श्रेष्ठ है, न हीन; न अधिकार का प्रदर्शन, न अहंकार की जगह। यहाँ कर्तव्य है, सेवा है और परिवार के लिए समर्पण है। यही तत्व विवाह को स्थायित्व देते हैं। इस पुस्तक का उद्देश्य किसी को उपदेश देना नहीं, बल्कि एक ऐसा मार्ग दिखाना है जो व्यवहारिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक—तीनों दृष्टियों से संतुलित हो। यदि यह पुस्तक किसी एक परिवार को भी टूटने से बचा पाती है, तो इसका लेखन सार्थक होगा। मैं आशा करता...

Chhath: A Practice-Based Cultural Model for Sustainable & Inclusive Development

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 🌍 POLICY PRESENTATION  Chhath: A Practice-Based Cultural Model for Sustainable & Inclusive Development Presenter: Sandeep Kumar Dubey Author | Advocate | Cultural Thinker | India SLIDE 1 — TITLE SLIDE Chhath A Practice-Based Cultural Pathway to a Balanced Future Chhath represents a living civilizational model where sustainability, social equality, and ethical discipline are not enforced through law but practiced voluntarily through culture. From a global policy perspective, Chhath offers an alternative framework—behavior-first, ethics-led, community-driven—that complements modern governance systems. SLIDE 2 — THE GLOBAL CONTEXT The Challenge We Face Despite international conventions, treaties, and policy frameworks: Climate change continues unabated Social inequality persists despite constitutional guarantees Families and communities are weakening There is a widening gap between policy intention and human behavior Core Question: 👉 How do we transform conduct...

आधुनिक नीति बनाम मानव आचरण

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अध्याय 1 आधुनिक नीति बनाम मानव आचरण (जब कानून व्यवस्था बनाता है, पर मनुष्य नहीं) 1.1 भूमिका : नीति की सफलता और मनुष्य की विफलता इक्कीसवीं सदी को यदि “नीतियों का युग” कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। संविधान, अंतरराष्ट्रीय संधियाँ, पर्यावरण कानून, मानवाधिकार घोषणाएँ, लैंगिक समानता के प्रावधान, सामाजिक न्याय योजनाएँ—मानव इतिहास में शायद ही कभी इतनी व्यापक और विस्तृत नीतिगत संरचनाएँ अस्तित्व में रही हों। फिर भी प्रश्न यह है— क्या मनुष्य पहले से अधिक नैतिक हुआ है? क्या समाज अधिक संतुलित हुआ है? क्या प्रकृति अधिक सुरक्षित हुई है? उत्तर असहज है— नहीं। यह विरोधाभास ही इस पुस्तक की बुनियाद है। 1.2 नीति क्यों असफल होती है? नीति का मूल स्वभाव बाह्य नियंत्रण (External Regulation) है। वह कहती है: यह करो यह मत करो उल्लंघन पर दंड होगा परंतु नीति कभी यह नहीं पूछती: मनुष्य ऐसा क्यों कर रहा है? उसके भीतर कौन-सी नैतिक रिक्तता है? कानून अपराध को रोक सकता है, लेकिन लोभ को नहीं। नियम प्रदूषण पर जुर्माना लगा सकते हैं, पर प्रकृति के प्रति संवेदना पैदा नहीं कर सकते। यही कारण है कि: पर्यावरण कानूनो...