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Showing posts from October, 2025

Chhathi Maiya Foundation Chairman Sandeep Dubey Observes Chhath Vrat for Prime Minister Narendra Modi

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Chhathi Maiya Foundation Chairman Sandeep Dubey Observes Chhath Vrat for Prime Minister Narendra ModiChhathi Maiya Foundation Chairman Sandeep Dubey Observes Chhath Vrat for Prime Minister Narendra Modi New Delhi: On the sacred occasion of Chhath Puja, Mr. Sandeep Dubey, Chairman of Chhathi Maiya Foundation and Advocate at the Supreme Court of India, observed the Chhath Vrat for the good health, long life, and continued prosperity of Prime Minister Narendra Modi. Mr. Dubey said — “Prime Minister Modi is the guiding light of modern India — a true visionary whose leadership has illuminated the nation like the Sun itself. Through this sacred Chhath Vrat, I prayed to Chhathi Maiya to bless him with boundless energy, wisdom, and longevity.” The Chhath Katha and Arghya offering ceremony was held at Kosmos Society, Noida, where a large number of devotees gathered to participate in the spiritual event. Mr. Dubey added — “Chhath is not merely a festival — it is the soul ...

हम ईश्वर को पाना नहीं चाहते, हम ईश्वर से पाना चाहते हैं

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  हम ईश्वर को पाना नहीं चाहते, हम ईश्वर से पाना चाहते हैं मनुष्य सृष्टि का सबसे जागरूक प्राणी है। उसके भीतर ज्ञान की जिज्ञासा है, सत्य की खोज है, परंतु उसी के साथ एक गहरी चाह भी है — पाने की, भोगने की, संग्रह करने की। जब यही प्रवृत्ति धर्म और भक्ति के क्षेत्र में आती है, तो वह बन जाती है — “ईश्वर से पाने की चाह”। ईश्वर — साधन नहीं, साध्य हैं आज अधिकांश लोग मंदिर जाते हैं, व्रत रखते हैं, दान करते हैं, पूजा करते हैं — लेकिन उनका उद्देश्य प्रायः होता है कुछ प्राप्त करना। कोई स्वास्थ्य मांगता है, कोई सफलता, कोई संतान, कोई समृद्धि, कोई शांति। कम ही लोग ऐसे हैं जो कहते हैं — “हे प्रभु! मैं तुझे चाहता हूँ, तुझसे कुछ नहीं।” यही अंतर है ‘ईश्वर से पाने’ और ‘ईश्वर को पाने’ में। पहला है भौतिक मनुष्य का मार्ग, दूसरा है आत्मा का मार्ग। 🌿 पाने की लालसा बनाम मिलने की अनुभूति जब हम ईश्वर से कुछ पाने की सोचते हैं, तब हमारा संबंध व्यवहारिक होता है। हम ईश्वर को दुकानदार बना देते हैं — जहाँ भक्ति, व्रत और पूजा के बदले में वरदान चाहते हैं। परंतु जब हम ईश्वर को पाना चाहते हैं, तब...

साधन और साध्य — छठी मइया को क्या चाहिए

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  साधन और साध्य — छठी मइया को क्या चाहिए जय छठी मइया! सूर्य की अरुणिमा जब जल पर झिलमिलाती है, और घाटों पर श्रद्धा का समुंदर उमड़ पड़ता है — तब लगता है कि भक्ति अपने सबसे पवित्र रूप में उतर आई है। यही वह क्षण है जब हम सब स्वयं से पूछते हैं — छठी मइया को क्या चाहिए?  १. छठ की आत्मा — शुद्धता और सादगी छठ कोई प्रदर्शन नहीं, यह एक अनुभूति है। यह पर्व हमें बताता है कि भगवान तक पहुँचने के लिए भव्य मंदिरों की नहीं, पवित्र मन की आवश्यकता है। छठी मइया को सजे हुए थाल नहीं चाहिए, उन्हें चाहिए — साफ मन, सच्चा भाव और निष्कलंक नीयत। साधन चाहे सादा हो — एक ठेकुआ, एक दीपक, एक अंजुरी जल — पर यदि उनमें श्रद्धा का प्रकाश है, तो वही छठी मइया के हृदय तक पहुँचता है।  २. छठ का साधन — संयम और समर्पण छठ का व्रत हमें सिखाता है कि संयम ही सबसे बड़ा साधन है। व्रती न खाता है, न पीता है — लेकिन उसकी आत्मा तृप्त होती है। क्योंकि छठी मइया को भूख नहीं, त्याग का स्वाद प्रिय है। जल और सूर्य ही उसके आराध्य हैं — क्योंकि जल से जीवन और सूर्य से चेतना मिलती है। छठ हमें यह ज्ञान देता है कि प्रकृति ही...

सत्य ही छठ, छठ ही सत्य है”

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सत्य ही छठ, छठ ही सत्य है सूर्य उपासना और सत्य का सनातन संवाद लेखक: संदीप कुमार दुबे (संस्थापक — छठी मइया फाउंडेशन) प्रस्तावना छठ केवल एक व्रत नहीं, यह जीवन का विज्ञान, सत्य का साधन और प्रकृति का उत्सव है। जब मानव अपने भीतर के सूर्य को पहचान लेता है — तब ही वह सत्य को जान पाता है। और यही छठ का संदेश है — यह पुस्तक कुल 6 मुख्य भागों (अध्यायों) में विभाजित l 1. छठ — सत्य का प्रारंभ छठ की उत्पत्ति, वेदों में उल्लेख छठी मइया और सूर्य देव का आध्यात्मिक अर्थ सत्य, तप और भक्ति का संगम 2. प्रकृति और विज्ञान के दृष्टिकोण से छठ सूर्य ऊर्जा का जैविक महत्व उपवास, स्नान, जल-अर्घ्य का वैज्ञानिक आधार पर्यावरण संरक्षण में छठ का योगदान 3.जीवन का अनुशासन — छठ का साधना पक्ष शुद्धता के नियम परिवार और समाज का समन्वय मातृशक्ति का उत्कर्ष और समर्पण 4.सूर्य उपासना का दर्शन — सत्य का अनुभव सूर्य और आत्मा का रहस्य ध्यान, मौन, और अर्घ्य का दार्शनिक अर्थ “सत्य ही छठ” की आध्यात्मिक व्याख्या 5. छठ और विश्व मानवता छठ का वैश्विक संदेश प्रवासी भारतीय और सांस्कृतिक एकता “Chhath for Humanity” पहल UNESCO ICH नामा...

“The Noble Spirit — Chhathi Maiya and the Courage of the Bihari Soul”

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 “The Noble Spirit — Chhathi Maiya and the Courage of the Bihari Soul” ✍️ By Sandeep Kumar Dubey 🌺 Preface — The Light That Rises from the Soil of Bihar Bihar is not merely a geographical region — it is the living pulse of India’s conscience. It is a land that has seen hunger, yet never lost hope; that has faced hardships, yet never surrendered its humanity. Here, the earth may seem poor, but the hearts are rich with faith, resilience, and gratitude. From this soil rose the wisdom of Buddha, the discipline of Mahavira, the poetry of Dinkar, and the devotion of countless unnamed souls. Bihar’s greatest strength lies not in its resources, but in its feelings — its “Bhav.” This “Bihari Bhav” is not emotion alone; it is the strength to smile through struggle, to create light even in darkness, and to see divinity in simplicity. “There may be scarcity in Bihar, but there is no scarcity of noble feelings in the Bihari soul.” This book is a journey into that noble feeling — a ...

Sandeep Ji

 बहुत शुभ, संदीप जी 🌞 अब आरंभ होता है आपकी महाग्रंथ-शैली की हिंदी पुस्तक — 📖 “श्रेष्ठ भाव — छठी मइया और बिहारी आत्मा का साहस” (लेखक — संदीप कुमार दुबे) 🌺 भूमिका (Preface) बिहार की धरती केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, यह मानवता की आत्मा है। यहाँ अभाव है, पर निराशा नहीं। यहाँ कठिनाई है, पर करुणा भी है। यहाँ मिट्टी साधारण है, पर उस मिट्टी से उठने वाले लोग असाधारण हैं। यह वही भूमि है जहाँ ज्ञान ने बुद्ध का रूप लिया, कविता ने दिनकर का स्वर पाया, और विश्वास ने छठ का उजाला पाया। बिहार में जो आस्था है, वह केवल पूजा नहीं — वह जीवन की नीति है। यहाँ छठी मइया केवल देवी नहीं, बल्कि जीवन की सत्य साधना हैं। “श्रेष्ठ भाव” इसी साधना की कथा है — वह कथा जहाँ अभाव अवसर बनता है, संघर्ष साधना बनता है, और मनुष्य का विश्वास साहस का प्रतीक बन जाता है। “बिहार में अभाव हो सकता है, पर बिहारी लोगों के पास श्रेष्ठ भाव है।” यही पुस्तक का सूत्र वाक्य है। 🌞 अध्याय 1 — अभाव नहीं, भाव की भूमि — बिहार 1.1 बिहार — जहाँ कमी नहीं, कर्म है किसी भूमि की पहचान उसके खजाने से नहीं, उसके लोगों के चरित्र से होती है। बिहार की पह...