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Showing posts from November, 2025

वसुधैव कुटुम्बकम् से विराट भारत तक – सनातन दृष्टि और मोदी नेतृत्व

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वसुधैव कुटुम्बकम् से विराट भारत तक – सनातन दृष्टि और मोदी नेतृत्व लेखक : संदीप कुमार दुबे अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया चेयरमैन, छठी मैया फ़ाउंडेशन विश्व राजनीति और वैश्विक कूटनीति के बदलते परिदृश्य में भारत एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है। यह उदय केवल आर्थिक या सामरिक विकास का परिणाम नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सनातन दृष्टि और वर्तमान नेतृत्व के दूरदर्शी प्रयासों का संयोजन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय आत्मविश्वास और वैश्विक संदेश को एक सूत्र में पिरोया है, उसने भारत को फिर से एक सभ्यता-नेता के रूप में स्थापित किया है। G20 के माध्यम से विश्व के सामने प्रस्तुत “One Earth, One Family, One Future” केवल एक थीम नहीं, बल्कि उस भारतीय दर्शन का आधुनिक रूप है, जिसे उपनिषदों ने हजारों वर्ष पूर्व “वसुधैव कुटुम्बकम्” के नाम से विश्व को दिया था। शक्तिशाली भारत: सैन्य, विज्ञान और रणनीति में नई ऊँचाइयाँ सनातन भारत की अवधारणा में शक्ति का अर्थ आक्रमण नहीं, बल्कि सामर्थ्य, संयम और सुरक्षा है। आज का भारत इसी संतुलित शक्ति का...

छठ पुकारती है—“धरती को बचाओ, क्योंकि यही मानवता का एकमात्र घर है।” एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य

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  एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य  — लेखक: संदीप कुमार दुबे विश्व आज कई तरह की चुनौतियों से गुजर रहा है — जलवायु परिवर्तन, सामाजिक विभाजन, प्रदूषण, ऊर्जा संकट और सांस्कृतिक टूटन। ऐसे समय में भारत ने दुनिया के सामने एक नया मंत्र रखा — “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला मार्गदर्शक सिद्धांत है। और अद्भुत बात यह है कि यह विचार हमारे भारतीय सांस्कृतिक मूल में हजारों वर्षों से जीवित है। इसी मूल भावना को सबसे सुंदर रूप में प्रकट करने वाला पर्व है — छठ महापर्व। छठ — प्रकृति, परिवार और मानवता को जोड़ने वाली अनंत परंपरा छठ केवल पूजा नहीं है, यह पृथ्वी के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। जब छठव्रती बिना किसी भेदभाव के नदी, तालाब, झील, पोखरे पर खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तब यह संदेश स्पष्ट होता है कि —  पृथ्वी हमारी माता है सूर्य हमारा ऊर्जा–स्रोत है समाज हमारा परिवार है छठ के घाट पर कोई बड़ा–छोटा नहीं होता। सब एक समान। यही “एक परिवार” की सच्ची अनुभूति है। एक पृथ्वी — छठ का प्रकृति-प्रेम संसार को प्रेरित ...

एक जननेता, एक पिता, एक मित्र — जिन्होंने लिख दी मालवीय नगर की विकास गाथा

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  एक जननेता, एक पिता, एक मित्र — जिन्होंने लिख दी मालवीय नगर की विकास गाथा  लेखक: संदीप कुमार दुबे मालवीय नगर की राजनीति में अगर किसी एक नाम को विकास, विश्वास और विनम्रता का पर्याय कहा जाए, तो वह नाम है — सतीश उपाध्याय। आज उनके जन्मदिन के अवसर पर, हम न केवल उन्हें शुभकामनाएँ दे रहे हैं, बल्कि उस अनोखी यात्रा को भी याद कर रहे हैं, जिसने उन्हें एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर क्षेत्र के सर्वोत्तम जनप्रतिनिधियों की श्रेणी में ला खड़ा किया।  एक जननेता जिसकी पहचान सेवा है सतीश उपाध्याय ने राजनीति को कभी पद पाने का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि इसे सेवा का मार्ग चुना। मालवीय नगर के हर मोहल्ले, हर गली से उनका गहरा रिश्ता रहा है। चाहे सड़क बनवानी हो, चाहे जल-निकासी की समस्या हो, चाहे स्कूलों का कायाकल्प हो, या फिर आम लोगों की छोटी-छोटी दिक्कतें हों— उन्होंने हमेशा एक सुलभ नेता की पहचान बनाए रखी।  एक पिता के रूप में आदर्श नेतृत्व की व्यस्तताओं के बीच भी सतीश जी अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों को समान महत्व देते हैं। अपने बच्चों को संस्कार, अनुशासन और समाज-सेवा की प्रेरणा दे...

साधन और साध्य — छठी मइया को क्या चाहिए(Means and End — What Chhathi Maiya Truly Wants)

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🌞 ग्रंथ शीर्षक: साधन और साध्य — छठी मइया को क्या चाहिए (Means and End — What Chhathi Maiya Truly Wants) ✍️ लेखक: Advocate Sandeep Kumar Dubey Chairman, Chhathi Maiya Foundation (India) Supreme Court of India 🌺 पुस्तक की रूपरेखा (Book Structure) यह ग्रंथ 12 अध्यायों में विभाजित होगा — हर अध्याय छठ के दर्शन, साधना, और मानवीय मूल्य को नए दृष्टिकोण से व्याख्यायित करेगा। 🔶 अध्याय 1 – छठी मइया का परिचय : प्रकाश की देवी (Chhathi Maiya — The Goddess of Light and Purity) छठी मइया का ब्रह्मांडीय अर्थ: सूर्य की सहचरी और प्रकृति की छठी शक्ति। उनके अस्तित्व की व्याख्या — जल, सूर्य और मातृत्व से संबंध। “छठ” शब्द का रहस्य — संख्या छह का आध्यात्मिक अर्थ (षष्ठी तिथि, षड्गुण)। छठी मइया का स्थान — हर हृदय में प्रकाश और शुद्धता का निवास। 🔶 अध्याय 2 – छठ की उत्पत्ति और इतिहास (The Origin and Historical Roots of Chhath) वैदिक काल में सूर्योपासना का आरंभ। सप्तमी–षष्ठी की प्रथा और ऋग्वेद के सूर्य सूक्त से संबंध। रामायण और महाभारत काल में छठ परंपरा का उल्लेख। लोकसंस्कृति में छठ की यात्रा — मिथि...